Wednesday, June 27, 2018

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी की तुलना हिटलर से किये जाने पर विशेष

राजनीति में राजनैतिक रोटियां सेंकने के किसी पर भी कोई आरोप लगाया जा सकता है।इस देश की सर्वोच्च सत्ता में सबसे अधिक समय तक जमी रहने वाली कांग्रेस का एक अपना अलग इतिहास रहा है।कांग्रेस की ही अगुवाई में भारत को आजादी मिली थी और कांग्रेस की ही अगुवाई में आजादी की लड़ाई भी लड़ी गयी थी। यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि आजादी मिलने के तीन दशक के अंदर ही देशवासियों को कांग्रेस के समय में ही इमरजेंसी का दंश झेलना पड़ा।आजादी मिलने के बाद पहली बार देशवासियों को इमरजेंसी का अनुभव हुआ और लोग तिलमिला उठे थे।इमरजेंसी की याद आते ही आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और लोग अज्ञात भय से काँपने लगते हैं।इमरजेंसी लगाने के लिये आज भी लोग तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आज भी कोस रहे हैं और इमरजेंसी लगाने का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ रहे हैं।कांग्रेस भाजपा को तो भाजपा कांग्रेस को आज के दौर का सबसे बड़ा दुश्मन मानकर इस समय आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक दूसरे पर राजनैतिक हमला बोल रहे हैं।अभी परसों एक केन्द्रीय मंत्री अरूण कुमार जेटली ने इमरजेंसी लगाने के मद्देनजर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की तुलना तानाशाह हिटलर से करके एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।केन्द्रीय मंत्री जेटली ने यह धमाका फेसबुक पर लिखे जा अपने लेख" इमरजेंसी रीविजिटेड" की दूसरी किश्त में इंदिरा गांधी जी की तुलना हिटलर से की गयी है।उन्होंने कहा है कि दोनों नेताओं ने लोकतंत्र को तानाशाही में परिर्वतित करने का काम किया है।इंदिरा गांधी कोय हिटलर से भी आगे बताते हुए जेटली ने कहा है कि उन्होंने तो हिटलर को पीछे धकेल दिया और संसदीय कार्यवाही का प्रकाशन रोककर देश को वंशवादी लोकतंत्र में बदल दिया।लोगों का मानना है कि 1975 में लगाई गई इमरजेंसी 1932 में जर्मनी से प्रेरित होकर लगाई गयी थी। जेटली ने अपने दूसरे लेख को शीर्षक "आपातकाल का उत्पीड़न" कहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि कुछ कार्य इंदिरा जी नहीं ऐसे किये हैं जो हिटलर ने भी नहीं किये थे। हिटलर ने अपने शासनकाल में इस दौरान25 सूत्रीय आर्थिक कार्यक्रम शुरू किया था तो इंदिरा गांधी जी ने भी  इमरजेंसी के दौरान 20 सूत्रीय कार्यक्रम शुरू किया था।पाँच अंकों की कमी को पूरा करने के लिए संजय गाँधी ने इसमें पाँच सूत्रीय समाजिक एवं आर्थिक कार्यक्रम जोड़कर हिटलर के समान 25 सूत्री बना दिया गया था।इतना ही नहीं  बल्कि जिस तरह जर्मन नाजी नेता ने अपने को सर्वोच्च शिखर पर बैठ गये थे उसी तरह इंदिरा गांधी जी के जमाने में  उन्हें भी कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष देवकांत बरूआ ने भी कहा था कि-"इंडिया इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा।जेटली के इस लेख को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी अपने टवीटर पर शेयर किया है।कांग्रेस मिटाओं अभियान के तहत भाजपा के वरिष्ठ नेता के इस धमाके से कांग्रेस तिलमिला उठी है।यह सही है कि एक समर था जबकि इंदिरा गांधी जी को आयरन लेडी एवं दुर्गा का अवतार कहा जाता था। यह भी सही है कि वह एक कुशल शासक एवं राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूर्ति के लिए फोड़े को अधिक दिनों तक पालती नहीं थी बल्कि फोड़े को कैंसर बनने से पहले ही आपरेशन कर देती थी। पंजाब का खालिस्तान आंदोलन और भिंडरावाला इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इमरजेंसी लगाना इंदिरा गांधी जी के जीवन का सबसे दुखद पहलू कहा जा सकता है जिसका खामियाजा उनकी आने वाली कौमों एवं पार्टी का झेलना पड़ता रहेगा क्योंकि इमरजेंसी को अच्छा कहने वाले बहुत कम लोग हैं।वैसे इंदिरा गांधी जी की तुलना हिटलर से करना उचित नहीं है क्योंकि इंदिरा जी में और हिटलर में जमी आसमान का फर्क है और राजनीति में इमरजेंसी आज से बल्कि बहुत पहले से लगी हुयी है। राजनैतिक इमरजेंसी में बोलने निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता है बल्कि हाँ हजूरी का बोलबाला रहता है और जो जुबान खोलकर चलाने लगता है उसकी जुबान को बंद कर दिया जाता है। लोकतंत्र में सरकार चलाने के लिए प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का हड़कदार कड़कदार और जरूरत पड़ने पर राष्ट्र हित में कठोर निर्णय लेने वाला होना आवश्यक होता है। फिलहाल जेटली जी के लेख ने एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है और इस पर राजनैतिक बहस हो सकती है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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