Tuesday, June 5, 2018

जनतांत्रिक प्रणाली में पंचायती व्यवस्था और मुख्यमंत्री की ग्राम स्वराज योजना

लोकतंत्र की स्थापना जनतांत्रिक प्रणाली की पंचायती व्यवस्था के आधार पर की गयी है जिसमें जनता खुद अपने भाग्यविधाता का चुनाव अपने प्रतिनिधि के तौर पर  करती है। इसमें पंचायती व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह पंचायती आज से नहीं बल्कि आदिकाल से चली आ रही है। इसमे समय समय पर सुधार जरूर हुआ है लेकिन मूल उद्देश्यों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और पंचायती व्यवस्था आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पंचायती व्यवस्था कहानीकार एवं उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर से मिलती जुलती है जिसमें गाँव के समस्याओं का हल गाँव स्तर की पंचायत से हो जाता है और थाना कोर्ट कचेहरी दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ती है।एक समय था कि लोग गाँव जेवार पंचायत से डरते थे और कोई भी गलत कार्य करने से घबड़ाते थे क्योंकि जानते थे गाँव जेवार के लोग नाराज होकर पंचायत में सजा सुना दी जायेगी। पंचायत में पंच परमेश्वर गाँव के सम्भ्रांत ईमानदार चरित्रवान लोग होते थे और पंचायत में बैठने के बाद समाजिक बंधनों से दूर ईश्वर तूल्य हो जाते थे और सारे समाजिक नाते रिश्ते भूल जाते थे। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर इसका ज्वलंत उदाहरण है जिसमें फैसला धर्म और न्याय के तराजू पर तौलकर किया जाता है। आजकल ग्राम पंचायतों के पास विकास के धन है जबकि पहले यह निर्धन थी लेकिन आज की अपेक्षा ज्यादा ईमानदार न्यायप्रिय और चरित्रवान थी। आसपास की पंचायतों को मिलाकर बनी न्याय पंचायतों में सरपंच होते थे जो मौका देखकर और अदालती सुनवाई करके फैसला सुनाते थे जिसके खिलाफ जिला स्तरीय अदालतों पर अपील होती थी। इधर हमारी पंचायती व्यवस्था धनवान तो बन गयी हैं लेकिन न्यायिक व्यवस्था चरमरा गई है। फलस्वरूप सरकार को गाँव पंचायतों के लोगों की समस्याओं के निस्तारण के लिए रोजाना दो घंटे हर अधिकारियों को जनसुनवाई के लिये अपने कार्यालय में मौजूद रहने के साथ थाना तहसील दिवसों एवं आनलाइन शिकायती व्यवस्था करनी पड़ रही है फिर भी हर स्तर पर समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। लोगों में गाँव पंचायत समाज का कोई भय नहीं रह गया है और ईमानदारी से मौके पर किये गये फैसले को न मानकर लोग पैसा और पहुंच के बल पर सीधे थाना तहसील पहुंच जाते हैं।यह सही है कि अगर हर ग्राम पंचायतों में ईमानदार निष्पक्ष धर्म एवं न्याय परायण लोगों की पंचायत सक्रिय हो जाये तो सरकारी तंत्र और सरकार पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है। ग्राम पंचायतों के पंच प्रधान आजकल न्याय अन्याय नहीं बल्कि अपना समर्थक देखते हैं और पांच साल के कार्यकाल में ही फर्श से अर्श पर पहुंचने की कोशिश करते हैं।वोट की राजनीति इस पंचायती व्यवस्था में बाधक बनी हुयी है वह चाहे ग्राम स्तर पर हो चाहे ब्लाक जिला प्रदेश एवं देश की पंचायत हो।इसके बावजूद ग्राम पंचायतों की प्रासंगिकता आज भी है और यह सत्य है कि भ्रष्टाचार कमीशन खोरी के बावजूद गाँवों में खुशहाली आई है और अंधाधुंध विकास भी हुआ है। जहाँ साइकिल से जाने का रास्ता नहीं था वहां पर चार पहिया जाने के पक्के मार्ग बन गये हैं और लोगों का सर्वांगीण विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री योगीजी की ग्राम स्वराज योजना निश्चित तौर पर गाँव पंचायतों को मजबूती प्रदान करके अपने सिर का बोझ कम करना चाहते हैं और इस दिशा में उनकी पहल सराहनीय एवं स्वागत योग्य है। यह सही है कि अगर ग्राम पंचायत की सभी छः कमेटियां सक्रिय हो जाय और पंच परमेश्वरी व्यवस्था लागू हो जाय तो गाँव की समस्याओं का हल गाँव पंचायत स्तर पर हो सकता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि यह सभी समितियां सिर्फ दिखावे की होती हैं और प्रधान की मनमानी के सामने इन समितियों का अस्तित्व न के बराबर हो गया है। अगर मुख्यमंत्री योगीजी की पंच परमेश्वर अवधारणा फलीभूत होती है तो निश्चित ही छोटे छोटे मामलों का निस्तारण पंचायत स्तर पर हो जायेगा।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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