Monday, June 4, 2018

जम्मू कश्मीर में हिंसक झड़पे और रमजान में स्थगित किये गए अभियान पर विशेष रिपोर्ट

सुप्रभात-सम्पादकी 
जम्मू कश्मीर- कहते हैं कि सांप को चाहे जितना दूध पिलाया जाय लेकिन वह मौका मिलते ही डंसने से बाज नहीं आता है।कुछ ऐसे ही हालत जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंंकियों और उनके सिरफिरे अलगाववादी पत्थरबाज समर्थकों का है और वह मौका मिलते ही अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। राजनैतिक लोग इन्हें भूला भटका कहकर इनके साथ हमदर्दी करते हैं लेकिन वह अपना दुश्मन मानकर देश विरोधी ताकतों के इशारे पर देशद्रोही हरकतें करते हैं। वह हिंसक प्रदर्शन और आतंंकियों के मरने पर गम के नाम पर सेना पर पथराव और हिंसक प्रदर्शन करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे खुंखार आतंकी संगठन आईएस के झंडे लहराकर पाकिस्तान जिन्दाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं। अभी सरकार ने रमजान के मुबारक मौके पर आतंंकियों के खिलाफ चल रही सेना की मुहिम को स्थगित कर दिया है लेकिन इसका कोई असर आतंंकियों पर नहीं पड़ा है और वह लगातार हमले एवं सैनिकों पर पथराव कर रहे हैं। सरकार द्वारा काश्मीरियों को पाक रमजान के महीने में दी गई राहत का नाजायज फायदा आतंकी एवं पत्थरबाज उठाकर घिनौनी हरकतें कर रहें हैं। सरकार की सोच के विपरीत आज जम्मू कश्मीर के हालात हो गये हैं और परसों श्रीनगर में प्रदर्शन के दौरान एक पत्थरबाज की सीआरपीएफ की गाड़ी से कुचल कर मौत हो जाने के बाद हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गये हैं और सुरक्षा सैनिक सरकार के निर्देश पर उनके साथ सख्ती नहीं कर पा रहे हैं। आतंकवाद और अलगाववाद के समर्थक देश के दुश्मन केन्द्र सरकार के सदभावना संदेश का जबाब जम्मू कश्मीर की सदभावना को बिगाड़ कर दे रहे हैं।वहाँ पर एकतरफा युद्ध विराम जैसी स्थिति है और आतंंकियों एवं अलगाववादियों पर सरकार के इस सदभावना संदेश का कोई असर नहीं पड़ा है। सबसे दुखद स्थिति यह है कि वहाँ की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इन्हीं इन्हीं हिंसक प्रदर्शन करने और सेना पर पत्थर फेंकने वालों के साथ सख्ती न करके उनके साथ हमदर्दी करती हैं। केन्द्र सरकार ने उनके अनुरोध पर रमजान महीने में सेना का अभियान स्थगित किया है इसलिये उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इन राष्ट्र विरोधी ताकतों पर अंकुश लगाये। एक पत्थरबाज के कुचल पर हिंसक झड़प करने वाले भूल गये हैं कि अभी कुछ दिनों पहले हमारी सेना के दो लोग भी कुचल कर मारे जा चुके हैं। सरकार की तमाम बंदरघुड़ियो के बावजूद पड़ोसी देश अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और जम्मू कश्मीर में अपनी सेना और आतंंकियों के सहारे जम्मू कश्मीर ही नहीं नहीं बल्कि पूरे मुल्क के अमन और अखंडता पर हमले कर रहा है। सेना के बहुचर्चित आपरेशनों के बावजूद जम्मू कश्मीर आतंंकियों व अलगावदियों की सुरक्षित शरणस्थली बना हुआ है और जो भी सरकार यहाँ पर आती है वह इन आतंंकियों एवं अलगाव वादियों से नाते रिश्तेदारी निभाकर इन्हें संरक्षण देती है। यही कारण है कि केन्द्र सरकार के तमाम कोशिशों के बावजूद इन हिंसक प्रदर्शन करने तथा सेना पर पत्थरों से हमला करने वालों पर लगाम नहीं लग पा रही है। उनका मनोबल घटने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। इन्हीं अलगाववादी पत्थरबाजों एवं आतंंकियों की घिनौनी हरकतों के चलते काश्मीरी ब्राह्मणों को दशकों से निर्वासित जीवन कैम्पों में जीना पड़ रहा है। रमजान के पवित्र मौके पर हिंसा प्रदर्शन पत्थरबाजी और सेना की गाड़ियों पर जबरदस्ती चढ़ने वालों को उनकी भाषा में जबाब मिलना चाहिए। हाँलाकि हमारी सेना चौकस और सीमा पर सजग है साथ ही मुँहतोड़ जबाब भी दे रही है लेकिन रमजान महीने में घर घर छिपे बैठे राष्ट्र विरोधियों के खिलाफ अभियान नहीं चला रही है। अभियान न चलने से राजी से या जबरदस्ती घरों में घुसे बैठे आतंंकियों को भीड़ के साथ निकलने का सुनहरा मौका मिल गया है। इनके साथ मुरव्वत करना आस्तीन में साँप पालने जैसा है इन्हें राहत देने नहीं बल्कि इनका मुँह कुचलने की जरूरत है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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