Thursday, June 14, 2018

मध्यप्रदेश में सिर्फ सरकार ही नही व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत-आलोक अग्रवाल

रीवा आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने सिरमौर में सभा को संबोधित करते हुए भाजपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज सिर्फ सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति बदलने की जरूरत है। कांग्रेस और भाजपा ने पिछले दशकों में प्रदेश में जो एक सरीखी राजनीति चलाई है, उससे प्रदेश के हालात गर्त में चले गए हैं। इस भ्रष्ट राजनीति को देश भर में आम आदमी पार्टी की ईमानदार और स्वच्छ राजनीति से खतरा है। इसीलिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा है, तो मध्य प्रदेश में भी दोनों पार्टियां मिलकर प्रदेश को लूटने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा में जुमला राजनीति है, तो कांग्रेस भी दगाबाजी करती रही है। इससे पहले उन्होंन रीवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी कांग्रेस-भाजपा पर तीखा हमला किया। प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल और आप के प्रदेश संगठन मंत्री पंकज सिंह एक दिवसीय रीवा दौरे पर आए थे। इससे पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति, संगठन और राजनीतिक मामलों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी आगामी चुनावों में पूरी मजबूती से सभी 230 विधानसभाओं में चुनाव लड़ेगी और एक मजबूत विकल्प देगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का मानना है कि मध्य प्रदेश में पिछले कई दशकों से भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने मिलकर प्रदेश की स्थिति को गर्त में पहुंचाने का काम किया है। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है। यहां बिजली बेहद महंगी है। पानी की व्यवस्था नहीं है। स्कूल बंद किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य की स्थिति भी बदहाल है। प्रदेश में कृषि के हालात यह है कि पांच किसान रोज आत्महत्या कर रहे हैं। रोजगार हैं नहीं इस वजह से दो युवा रोज आत्महत्या करते हैं। हालात यह हैं कि प्रदेश में पूरी तरह अव्यवस्था छाई हुई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिवराज सिंह और भाजपा की पिछले 15 साल की सरकार और इससे पहले रही कांग्रेस की सरकार जिम्मेदार है। इन हालात को बदलने के लिए सिर्फ सरकार बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि आज राजनीति को बदलना होगा। असल में कांग्रेस और भाजपा एक ही सरीखी राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर आए थे और उन्होंने कहा था कि 10 दिन में किसानों की कर्ज माफी कर देंगे। लेकिन उनसे पूछा जाना चाहिए कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट तो कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान ही आ गई थी, लेकिन उन्होंने 2006 से 2014 के दौरान रिपोर्ट लागू क्यों नहीं की। जबकि इस दौरान कांग्रेस सत्ता में थी। यही नहीं अभी पंजाब में भी चुनाव के दौरान कर्जमाफी की घोषणा की थी, लेकिन सरकार बनने के बाद यह वादा पूरा नहीं किया और महज कुछ हजार किसानों के आंशिक कर्ज ही माफ किए। इस तरह एक तरफ जुमले हैं, तो दूसरी ओर दगाबाजी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मंदसौर क्यों आए थे, क्योंकि शिवराज सिंह के शासन में किसानों को मारा गया था। लेकिन वे भूल गए कि 1998 में कांग्रेस की दिग्विजय सिंह की सरकार में भी किसानों पर गोली चलाई गई थी, जिसमें 18 किसानों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने किसानों की हत्या की है, उन्हें कोई हक नहीं कि किसानों की बात करें। उन्होंने कहा कि हमारा कहना है कि मध्य प्रदेश में दो राजनीति हैं, एक भ्रष्ट राजनीति है और एक ईमानदार राजनीति है, जो आम आदमी पार्टी कर रही है। उन्होंने दिल्ली के हालात पर बात करते हुए कहा कि दिल्ली में पिछले तीन महीने से आईएएस अफसर मोदी जी और एलजी के दबाव में काम कर रहे हैं। हमने दिल्ली में 100 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, झुग्गियों में टॉयलेट के लिए, लेकिन स्वच्छ भारत की बात करने वाले आईएएस अफसरों के जरिये यह काम नहीं होने देना चाहते। हम वहां गरीबों को घर देना चाहते हैं, प्रदूषण मुक्त करना चाहते हैं। लेकिन मोदी सरकार यह काम नहीं करने दे रही है। आम आदमी पार्टी जो स्वच्छ और ईमानदार राजनीति कर रही है, वह कांग्रेस और भाजपा को रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि क्या आईएएस अफसरों को घर बैठने की तनख्वाह दी जाती है। देश भर में राशन वितरण में गड़बड़ी होती है। हमने राशन के पैकेट बनाकर भेजने की योजना बनाई है, लेकिन एलजी और आईएसएस के जरिये केंद्र सरकार इसे लागू नहीं करने दे रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस को मालूम है कि मध्य प्रदेश की जनता को यह मालूम चल गया कि दिल्ली में बिजली के दाम यहां से 3 गुना कम हैं, तो जनता सवाल करेगी कि जब दिल्ली हमसे ही बिजली खरीदती है तो वहां इतनी सस्ती बिजली क्यों है। यही नहीं पानी मुफ्त लोगों के घरों में पहुंचता है, तो बुंदलखंड के लोग पूछेंगे कि हमारे घरों तक सरकार ने पानी क्यों नहीं पहुंचाया। अगर लोगों को पता चला कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 92 प्रतिशत रहता है, तो मध्य प्रदेश में 48 प्रतिशत क्यों है यह पूछेंगे। इसीलिए भाजपा और कांग्रेस आम आदमी पार्टी की इस राजनीति को आगे नहीं आने देना चाहती हैं।

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