Wednesday, July 11, 2018

भारतीय किसान यूनियन ने प्रमुख मांगो को लेकर भेजा प्रधानमंत्री की लेटर


विषय- प्रदेश के किसानों की समस्याओं के सम्बन्ध में।

आदरणीय श्री मोदी जी
प्रदेश में भाकियू हमेशा किसानों के लिए संघर्ष करती रही है। प्रदेश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ा है। किसान के अत्यधिक परिश्रम के बाद भी उसको उसकी मेहनत के अनुसार लाभ नहीं मिल पाता। किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रत्येक वर्ष 4 से 6 प्रतिशत के बीच किसान खेती छोडकर किसान से खेतीहर मजदूर बन रहे हैं। एन0एस0एस0ओ0 की रिपोर्ट के अनुसार अगर कोई दूसरा धंधा मिले तो 50 प्रतिशत किसान खेती छोडने को तैयार है। प्रदेश के किसानों की समस्याओं की सूची लम्बी होती जा रही है।

आज दिनांक 09.07.2018 को भाकियू द्वारा आयोजित प्रदेशव्यापी जिला मुख्यालयों पर धरना/प्रदर्शन के माध्यम से निम्न मांग करती है-

1. फसलों का लाभकारी मूल्य- भारत सरकार द्वारा हाल में ही खरीफ की फसलों के दाम जिस फार्मूले से तय किये गये हैं। इससे किसान संतुष्ट नहीं है। किसानों की मांग एवं सरकार के वादे के अनुसार किसानों को c2 लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर दिया जाए। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक दर्जा देते हुए समर्थन मूल्य से नीचे की खरीद को अपराध माना जाये। सभी मुख्य फसलों, फलों, सब्जी व दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधीन लाया जाए।

2. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल इंजन को (एंटिक कारों के आधार पर) मुक्त किया जाए।

3. सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए। 

4. गन्ना- प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया भुगतान अविलम्ब कराया जाए। पिछली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गलत तरीके से तीन सत्रों का गन्ना भुगतान पर मिलने वाला ब्याज गलत तरीके से माफ कर दिया गया था। सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा निरस्त कर दिया गया है। किसानों को ब्याज का भुगतान कराया जाए।

5. ऋण- केन्द्र सरकार के माध्यम से सभी किसानों का (केन्द्रीय एवं सहकारी बैंक) कर्जा पूर्णतः माफ किया जाए।

6. बिजली- बिजली की दरों में की गई वृद्धि को वापिस लिया जाए एवं किसानो को सिचाई हेतू निशुल्क बिजली दी जाय।वर्तमान सरकार के गठन के पश्चात सामान्य योजना के अन्तर्गत निजी नलकूप के कनेक्शन में लाईन की लम्बाई 300 मीटर से घटाकर 190 मीटर कर दी गयी है। जिससे किसानों पर अत्यधिक भार बढ़ गया है। सामान्य योजना के अन्तर्गत कनेक्शन पर दी जाने वाली सब्सिडी में वृद्धि की जाए।

7. सिंचाई- प्रदेश में नई नहरों के निर्माण एवं चौगामा नहर परियोजना व बुंदेलखण्ड पंचनदा बांध परियोजना को अविलम्ब पूरा किया जाए।

ऽ बुंदेलखण्ड में सिंचाई विभाग का पूरा ताना-बाना चोक हो चुका है। जिससे बांध व खेत तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। बुंदेलखण्ड में लिफ्ट ऐरिकेशन एवं सरफेस वाटर सप्लाई की कार्य योजना बनाकर कार्य शुरू किया जाए।

ऽ नहरों के पानी टेल तक पहुंचाने व टेल के किसानों के सम्पर्क नम्बर रखने व उस पर सम्पर्क कर कृषकों से यह सुनिश्चित करने की टेल तक पानी पहुंच रहा है, की कारगर व्यवस्था की जाए।

8. बुंदेलखण्ड-पिछले 10 वर्षो से बुन्देलखण्ड के किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे है, जिससे किसानों पर कर्ज का बडा भार हो गया है। आये दिन बुन्देलखण्ड में किसानों द्वारा आत्महत्या की जा रही है। बुंदेलखंड के किसानों का पलायन रोकने एवम आजीविका के संकट के समाधान हेतु एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए। बुन्देलखण्ड़ के किसानों के सभी कर्ज माफ किये जायें।

10. प्रदेश में आवारा पशुओं जैसे वनरोज, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाये।बुंदेलखण्ड में अन्ना प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए

11. किसानों के परिवार में से आत्महत्या करने पर किसान परिवार के एक आदमी को सरकारी नौकरी एवं सभी का कर्ज माफ किया जाए।

आशा है कि किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जायेगा।।       इसी क्रम में गोंडा जनपद मुख्यालय पर जिला अध्यक्ष शिव राम उपाध्याय के नेतृत्व में धरने के आयोजन किया गया ।

No comments:

Post a Comment