Wednesday, July 25, 2018

मुझे सच लिखने की सजा मिली -पत्रकार वीरेंद्र यादव

एक पत्रकार  की आप बीती - मैं वीरेंद्र यादव उन्नाव जिले का रहने वाला हूँ. अभी तक News nation चैनल का पत्रकार था. लेकिन मौजूदा समय में एक फ्रीलांसर पत्रकार हूँ. उन्नाव प्रेस क्लब का अध्यक्ष भी हूँ. दरहसल मेरी ये लड़ाई उन सभी पत्रकार साथियों के लिए है जो दिन रात तपती धूप में बारिश में और कंपा देने वाली ठंड में काम करके ना सिर्फ लोगो को इंसाफ दिलाते हैं बल्कि अपने संस्थान को भी उचाईयो पर ले जाते हैं. लेकिन हमारी इस कड़ी मेहनत के बाद हमारा संस्थान हमे देता क्या है… एक चपरासी से भी कम वेतन. और तो और, जब मन करता है तो अपने किसी फायदे के लिए हमें बाहर भी निकाल देता है…. सवाल ये है कि आखिर कब तक हमारा ऐसा शोषण होता रहेगा उन्नाव के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर रेप कांड मामले से आप सभी अवगत होंगे.. इस खबर को सबसे पहले मैंने कवर करके पीड़िता की आवाज़ को उठाया था… चैनल पर ख़बर चलाई थी… इस ख़बर को कवरेज करने के दौरान विधायक के गुर्गो ने हमे जान से मारने की धमकी भी दी थी… लेकिन मैंने बिना डरे निष्पक्षता से पीड़िता की आवाज़ और भाजपा विधायक व उसके भाई की करतूत का सच दुनिया के सामने लाया…. चैनल ने भी ख़बर से खूब टीआरपी बटोरी… इस खबर ने सत्तारूढ़ बलात्कारी विधायक और उसके भाई को जेल पहुंचा दिया… इस खबर से लखनऊ से लेकर दिल्ली में बैठी बीजेपी सरकार की जमकर किरकिरी हुई… नतीजन विधायक से लेकर पूरी सरकार के टारगेट पर मैं आ गया…खबर कवर करने के दौरान विधायक के गुर्गों ने मुझे मारने की योजना भी बनाई लेकिन मुझे खबर लगते ही मैंने अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से लेकर शासन सत्ता के सभी आधिकरियों को चिट्ठी लिख दी.. इससे उनकी ये योजना कामयाब नहीं हुई.. फिर क्या था… सभी ने साजिश रचकर मुख्यमंत्री योगी के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार से चैनल मालिक संजय कुलश्रेष्ठ को फोन कराया और मृत्युंजय कुमार ने मुझ पर फ़र्ज़ी आरोप लगाकर मुझे चैनल से बाहर निकालने का दबाव बनाया… इस तरह सत्ता के आगे झुक गया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ…चैनल मालिक ने मुझे बिना वजह बताये चैनल से बाहर कर दिया… मैं लगातार पूछता रहा कि मेरा कसूर क्या है… लेकिन चैनल ने मेरी एक न सुनी… चाहता तो मैं अन्य दूसरे चैनल में ज्वाइन कर सकता था लेकिन मेरी अंतरात्मा ने कहा कि ये तो फ़र्ज़ी आरोपों को स्वीकारना होगा… आखिर कब तक हम पत्रकारों का शोषण होता रहेगा… कब तक ये मीडिया संस्थान हमारा इस्तेमाल करते रहेंगे और शासन सत्ता की रखैल बनकर काम करेंगे…मेरी खबर पर तो सीबीआई की रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी… तो फिर मेरा कसूर क्या है… क्यों मुझे सच दिखाने की सजा दी गयी… रेप पीड़िता को इंसाफ तो मिल गया, मुझे कब मिलेगा… बस इन्हीं कुछ सवालों के साथ मैं इस मुहिम को आगे बढ़ाना चाहता हूँ… ताकि जो मेरे साथ हुआ वो मेरे किसी अन्य भाई के साथ ना हो… इसलिए आप सभी से निवेदन है कि मेरी इस लड़ाई में मेरा साथ दें… इसको इतना शेयर करें कि उन संस्थानों को शर्मसार होना पड़े जो हम पत्रकारों को कंडोम समझते हैं…. और, ऐसी सरकार का भी सच लोग जान सके जो अपने बलात्कारी विधायक पर कार्यवाही करने की हिम्मत ना जुटा सकी और एक पत्रकारी की नौकरी छीन ली…

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