Tuesday, July 3, 2018

देश की राजधानी में एक ही परिवार के ग्यारह लोगों की मौत आखिर क्यों

देश व प्रदेश की राजधानियों को हर दृष्टि से सुरक्षित व संरक्षित माना जाता है क्योंकि राजधानियों के मुख्यालय देश व प्रदेश की सुदृढ़ता के प्रतीक होते हैं।जहाँ पर सरकार का मुख्यालय होता है वहाँ पर अमन चैन की सबसे उम्मीद की जाती है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली हमेशा से दिल वालों की दिल्लगी रही है और इसने राजतंत्र के राजे महराजे नबाबों के साथ लोकतंत्र के पहरेदार कलियुगी राजनेताओं तक के नाज नखरे देखें और झेले हैं। अपराधिक मामलों में भी दिल्ली कभी खास चर्चा में नहीं रहती है और चर्चा में आना भी नहीं चाहिए क्योंकि वहाँ पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के निवास और कार्यालय मौजूद हैं। कहते हैं कि दिल्ली बम्बई जैसे महानगरों में दिन रात का पता ही नहीं चल पाता है और लोगों को रातदिन एक जैसा लगता है। वैसे तो छोटी मोटी घटनाएं तो यहां पर होती रहती हैं लेकिन पहली बार परसों देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिससे देख सुनकर दिल्लीवासियों ही नही बल्कि देशवासियों के रोंगटे खड़े हो गये। इस घटना से पूरी राजधानी के लोग भौचक्के होकर सहम से गये हैं क्योंकि घटना ही कुछ ऐसी हो गयी है।घटना को किस खूबसूरती से अंजाम दिया गया है कि कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है कि यह सब दिल्ली में कैसे और क्यों हो गया? यह घटना रविवार को दिल्ली के  बुराड़ी संतनगर क्षेत्र की गली नम्बर दो के एक मकान में हुयी और मकान के अलग अलग हिस्सों से महिला पुरष बच्चे मिलाकर ग्यारह लोगों के शव लटकते अजीबोगरीब स्थिति में पाये गये हैं। लटके मिले दस शवों के हाथ पैर व मुँह बंधे मिले तथा दस लोगों की आँखों में पट्टी बंधी हुई थी।एक मात्र बुजुर्ग महिला का शव कमरे में जमीन पर पड़ा मिला है।इस भवन में राजस्थान  के मूल निवासी बुजुर्ग महिला नारायण अपने दो बेटों उनकी बहुओं, पोते पोतियों एवं विधवा बेटी के साथ पिछले बाइस सालों से यहाँ पर रहती थी। मकान के निचले तल पर दूकानें बनी हुई है जबकि दूसरे तल पर सभी लोग रहते हैं। दोनों बेटे दूकान करते हैं और रविवार की सुबह सबसे पहले घटना की जानकारी उनके पड़ोसी रिटायर्ड पुलिस अफसर को तब हुयी जबकि रोजाना की तरह वृद्धा का बेटा ललित घूमने नहीं निकला।दोनों दूकानें रोजाना सुबह छः बजे खुल जाती थी लेकिन जब उस दिन पड़ोसी अधिकारी ने दूकानें बंद देखी तो जगाने के ऊपर जाकर कुण्डी खटखटाने लगा।दरवाजा खुला हुआ था इसलिए वह सीधे कमरे तक पहुंच गये लेकिन वहाँ हालत देखकर उन्हें चक्कर सा आ गया। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस शवों का पोस्टमार्टम करवाकर कर मृत्यु का कारण जानने की कोशिश कर रही है लेकिन उसकी समझ में यह घटना ऐसी अनोखी जिसमें हत्या या आत्महत्या दोनों बातों पर विश्वास नहीं होता है। पूरे परिवार की एक साथ रहस्यमयी परिस्थितियों में हुयी मौत की घटना से दिल्ली दहल गयी और देश में दहशत फैल गयी है।आत्महत्या करने वाला हाथ पैर व आँखों में पट्टी क्यों बांधेगा? साथ ही आत्महत्या करने से पहले ऐसा खुद अपने हाथों करके लटक पाना संभव नहीं है।यह निश्चित है कि घटना का भले पटाक्षेप हो जाय और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण ज्ञात न हो सके लेकिन इतना तो पक्का है कि घटना स्वाभाविक प्रतीत नहीं होती है और निश्चित तौर पर यह पूरे परिवार की हत्या का मामला है। हाँलाकि हमारी पुलिस आज इतना सक्षम है कि अगर वह मन लगाकर टीम भाव से जुट जाये तो आसमान से तारों को पकड़कर ला सकती है लेकिन दुख इस बात का है कि व्यस्तता के चलते घटना की तह तक पहुंच ही नहीं पाती है। पूरा का पूरा परिवार  अस्वाभाविक मौत की चपेट में कैसे आ गया क्योंकि हाथ पैर बांधना आसान नहीं होता है और कहासुनी हल्ला गुल्ला होता है। आखिर एक खाता पीता खुशहाल परिवार आत्महत्या क्यों करेगा यह बात समझ नहीं आ रही है और यह भी समझ नहीं आ रहा है कि परिवार की हत्या करने से उनके परिजनों के अलावा किसी को उनकी सम्पत्ति भी तो नहीं मिल सकती है।यह घटना दिल्ली और केन्द्र दोनों सरकारों के लिए बेहद शर्म की बात है और इस घटना का पर्दाफाश होना चाहिए क्योंकि इस परिवार की मौत का बदला लेने वाला भगवान के शिवाय दूसरा कोई नहीं है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार / समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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