Monday, July 9, 2018

जीवन मे पेड़ों और वनों का होता है विशेष महत्व-भोला नाथ मिश्रा

कहते हैं कि -" वृक्ष कबौ नहि फल चखै नदी न पिवै नीर, परमारथ के कारन साधुन धरा शरीर"।वृक्ष मनुष्य जीवन से जुड़े हुए होते हैं और कहा जाता है कि-" मरते लकड़ी जीते लकड़ी अजब तमाशा लकड़ी का"। मनुष्य जबसे पैदा होता है तभी से लकड़ी का साथ हो है और उसे जिस पालने में लिटाया जाता है वह लकड़ी का ही बना होता है। जीवन के हर पायदान पर लकड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं और मरने के बाद जलाने तक लकड़ी मनुष्य का साथ देती है। इसीलिए हमारे यहाँ लकड़ी को हमेशा से संरक्षित किया गया है और वन बाग बगीचा लगवाना धर्म और ईश्वरीय कार्य से जोड़ दिया गया है। लकड़ी वृक्ष से मिलती है इसलिए मनुष्य जीवन में वृक्ष का बहुत महत्व होता है और कहते हैं कि-" एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान होता है"। पुत्र तो दगा दे सकता है लेकिन वृक्ष कभी दगा नहीं देते हैं बल्कि आड़े समय में पुत्र की भूमिका निभाते हैं। वन जंगल, बाग बगीचा और हरियाली ही धरती माता का श्रंगार मानी गयी है। वृक्ष मनुष्य का वर्तमान और भविष्य के साथ दूसरी पीढ़ी तक साथ देते हैं और दुख मुसीबत के समय काम आते हैं। हमारे यहाँ बुजुर्गों द्वारा लगायी गयी बागों जंगलों को वर्तमान पीढ़ी ने काटकर खेत मकान एवं दूकान काम्पलेक्स बनवा लिया है फलस्वरूप जंगलों में रहने वाले जंगली जानवरों के रहने खाने पीने की समस्या खड़ी हो गई है और वह आबादी में घुसकर तबाही मचाने लगे हैं।वृक्षारोपण मनुष्य जीवन का एक जरुरी अंग होता है क्योंकि मनुष्य के न रहने के बाद भावी पीढ़ी में इन्हीं वृक्षों से नाम एवं पहचान बनी रहती है।अपने हाथ के रोपकर तैयार किये हुये वृक्ष की लकड़ी और फल कितने प्रिय आत्मसंतुष्टि प्रदान करते हैं इसका अहसास वृक्षारोपण करके ही किया जा सकता है।वृक्ष हमारे धार्मिक आस्था एवं देवी देवताओं से भी जुड़े हुए हैं और हर वृक्ष से हमारी अलग अलग तरह के देवी देवताओं एवं भूतप्रेतों का जुड़ाव माना गया है और पीपल को वृक्षों का राजा तो आम को फलों का राजा माना गया है।पीपल के बारे में कहा जाता है कि -" मूले ब्रह्मा तने विष्णु साखे साखे महेश्वरः पात्रे पात्रे देवानाम् वृक्ष राजा नमस्तुते"।बरसात का मौसम आ गया है और हर साल की तरह इस साल भी वनविभाग के माध्यम से सरकार वन महोत्सव मनाकर वृक्षारोपण अभियान शुरू कर चुकी है। सरकार हर साल विशेष अभियान चलाकर पौधरोपण करती है और इन रोपित पौधे में से सिर्फ बीस फीसदी ही मौके पर हर साल तैयार हो जाय तो प्रदेश वृक्षों से आच्छादित होकर "ग्रीन प्रांत" बन जाय।इस बार भी हमारे मुख्यमंत्री योगीजी ने एक व्यक्ति एक वृक्ष का नारा दिया है और पांच करोड़ पौध रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री योगीजी ने यह नारा भगवान बराह और हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक सूफी संतो, भगवान शिव के प्राकट्य एवं जो रब है वहीं राम है की पावन धरती बाराबंकी के शिवधाम महादेवा से दिया है।आज वृक्षों के अभाव के चलते हमें तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और पर्यावरण के साथ जलवायु परिवर्तन जैसे संकट दुनिया को चुनौती दे रहे हैं।वृक्ष लगाकर और रोजाना उनसे भेंट मुलाकात कर बातचीत की जा सकती है क्योंकि वृक्ष तनाव को कम कर सकून प्रदान करते हैं। वृक्ष लगाकर उन्हें तैयार करने में कितना आत्म सकून मिलता उसका वर्णन नहीं बल्कि वृक्ष लगाकर अनुभूति की जा सकती है।वन महोत्सव एवं रिमझिम बरसात के मौसम की पावन वेला पर हम अपने सभी सुधीपाठकों अग्रजों से भावपूर्ण निवेदन करते हैं कि अपने जीवन को वृक्षों से जोड़े और वृक्ष लगाकर उन्हें फलदायक बनाकर पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन समस्या के निदान में सहायक बन पुण्य के भागीदार बने।अपने आसपास पौंध रोपकर इस महायज्ञ में आहूति डालना मानवता एवं समय की माँग है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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