Monday, July 30, 2018

वाराणसी फ्लाईओवर हादसे में गिरफ्तारी और निर्माण कार्यो में अनदेखी पर विषेस

कहते लोभ पाप का बाप होता है और लोग लोभ मोह में फंसकर महापाप कर डालते हैं। लोभ के चलते ही इधर हरामखोरी का बोलबाला हो गया है और हर जगह लूट खसोट मची है। सरकारी मशीनरी से जुड़े लोग लोकसेवक होते हैं और उन्हें सरकारी खजाने से जनता की गाढ़ी कमाई से हर माह वेतन मिलता  है।व्यापार में भले ही घाटा हो सकता है तथा खेती किसानी चौपट हो सकती है लेकिन नौकरी में कभी घाटे की नौबत नहीं आती है।सरकारी नौकरी में हर माह एक मुश्त तनख्वाह जरूर मिलती है चाहे सरकार का घाटा हो चाहे मुनाफा हो। इसके बावजूद अधिकांश सरकारी लोगों का पेट जल्दी वेतन से नहीं भरता है और उन्हें हरामखोरी कमीशनखोरी का सहारा लेना पड़ता है। हराम इस कदर सिर चढ़ गया है कि उस कमाई के आगे गाँव देश समाज कुछ नहीं दिखाई देता है।सरकारी निर्माण कार्य चाहे गाँव ब्लाक जिला स्तर से हो चाहे प्रदेश स्तर से होते हो उसमें दोहरी कमाई करने के लिये कार्ययोजना एवं कार्य का स्टीमेट बनाते समय ही इतना बढ़ा दिया जाता है कि कार्य बेहतर ढंग से मानक के अनुरूप कराकर फायदा उठाया जा सकता है। इसके बावजूद सरकारी मशीनरी से जुड़े लोगों का पेट नहीं भरता है और वह निर्माण गुणवत्ता में घपला करने से बाज नहीं आते हैं।दोहरी कमाई के चक्कर में ही तमाम निर्माण जानघातक बन जाते हैं और बनने के साथ ही ढहने लगते हैं। पुल आवास जैसे तमाम ऐसे निर्माण कार्य हैं जो सीधे आमलोगों के जीवन से जुड़े होते हैं इसीलिए इन कार्यों की गुणवत्ता से जल्दी समझौता नहीं किया जाता है। अभी दो महीने पहले हरामखोरी की हद हो गयी और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बन रहे एक फ्लाईओवर पुल की दो बीमे हरामखोरों की हरामखोरी की भेंट चढ़कर बनते समय ही ढह गई थी। इस हादसे में पन्द्रह लोगों की मौत हो गयी थी और एक दर्जन लोग घायल हो गये थे। हादसे के बाद सरकार ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जाँच उत्तराखंड स्थित सेंटल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की से कराई गयी थी। घटना के समय से ही यह माना जा रहा था कि यह हादसा  मानक विपरीत घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के चलते हुआ है और इसी घटना के तत्काल ही निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था सेतु निगम के पूर्व मुख्य परियोजना प्रबंधक गेंदालाल सहित चार लोगों को निलम्बित कर दिया गया था। इस हादसे की जाँच दर्ज कराये गये मुकदमें के आधार पर क्राइम ब्रांच द्वारा की गयी थी और विभिन्न एजेंसियों की जाँज रिपोर्ट के आधार पर परसों घटना के 75वें दिन सेतु निगम के पूर्व मुख्य परियोजना प्रबंधक के साथ तत्कालीन मुख्य परियोजना प्रंबधक समेत सात इंजीनियरों एवं एक ठेकेदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ऐसा समझा जाता है कि इस हादसे में अभी कुछ ठेकदारों की गिरफ्तारी हो सकती है। सभी गिरफ्तार लोगों को चौदह दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।इस हादसे में जाँच के आधार पर की गई गिरफ्तारी से प्रदेश की प्रमुख विश्वस्तरीय विश्वनीयता प्राप्त बड़े निर्माण कराने वाले सेतु निगम की आख पर गहरा आघात लगा है और यह साबित हो गया है कि यहाँ पर भी लोभ पाप का बाप बन गया है जिसमें ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार पनप गया है।इधर मानकों के विपरीत गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कराने का रोग एक राष्ट्रीय कैंसर की बीमारी जैसी बन गया है और कोई भी निर्माण बिना कमीशन खोरी हरामखोरी के बिना नही होता है।अबतक इस तरह के हादसा होने के बाद अधिकारियों को हल्की फुल्की चेतावनी या निलम्बन करके ठेकेदारों को प्रायः कालीसूची में डाल दिया जाता था। शायद पहली बार शीर्ष से लेकर नीचे तक के लोगों को जिम्मेदार मानकर उन्हें अभियुक्त बनाकर जेल में डालकर कड़ा संदेशा दिया गया है जो एक स्वागत योग्य तथा समय की माँग के अनुरूप है।आम लोगों के जनजीवन से जुड़े निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी करके लोगों की जान जोखिम में डालना हत्या करने से भी बड़ा जघन्य अपराध होता है और ऐसे कार्यों में घपला करने वालों के साथ रियायत करने का मतलब कमीशनखोरी हरामखोरी को बढ़ावा देने जैसा है।इस हादसे उन पुलिस कर्मियों को भी दोषी ठहराया जाना चाहिए जिन्होंने निगम की सूचना पर गौर न करके यातायात डायवर्जन नही किया और निर्माण के दौरान आवागमन जारी रहा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

No comments:

Post a Comment