Wednesday, July 4, 2018

अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमले और बढ़ते आतंकवाद पर भोलानाथ मिश्रा का लेख

दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं होगा जहाँ पर विभिन्न जाति धर्म सम्प्रदाय के लोग नही रहते हैं। देश में रहने वाले सभी लोग आपस में मिलजुलकर आपसी तालमेल मेलमिलाप से रहते हैं और कभी जाति धर्म सम्प्रदाय आड़े नहीं आती है।धर्म सम्प्रदाय के आधार पर देश का आँकलन करने की शुरुआत आजादी मिलने के बाद से हुयी है।ऐसा नहीं है कि हिन्दू सिख ईसाई ही इसके शिकार बन रहे हैं बल्कि रोहिंग्या काश्मीरी एवं मुसलमान भी इसकी चपेट में हैं। आजादी के पहले जिस काश्मीरी में हिन्दू राजा हरीसिंह थे और तब तक वहाँ पर हिन्दुओं की संख्या मुसलमानों से कम नहीं थी। आज उसी काश्मीरी में हिन्दुओं की संख्या अँगुली पर गिनने लायक भी नहीं गयी है और काश्मीरी ब्राह्मणों के साथ अन्य राष्ट्र भक्तों को वहाँ से भगा दिया गया है। वहाँ से भागकर आये सभी लोग पिछले कई दशकों से शरणार्थी जीवन जी रहे हैं और उनकी पुश्तैनी चौखट छीन ली गयी है। इस घिनौनी हरकतें किसी धर्म सम्प्रदाय के लोग नहीं बल्कि दुनिया में इस्लामिक स्टेट का राज करने का ख्वाब देखने वाले कट्टरपंथी आतंकी संगठन कर रहे हैं। इस समय पाकिस्तान अफगानिस्तान और उसके आसपास अनेकों आतंकी गुट अथवा संगठन बने हुए हैं और अधिकांश सभी अपने को आइएस ही बता रहे हैं। एक समय था जबकि कंधार नरेश यहाँ के राजा थे वहाँ पर हिन्दुओं का उस समय बोलबाला था लेकिन आजकल वहाँ संख्या लाखों से घटकर सैकडों हजारों में बची है। सरकार तो इन्हें देश के नागरिक के रुप में मान्यता देती है लेकिन आतंकी संगठन इन्हें मान्यता नहीं दे रहे हैं और गिनगिन कर लोगों को मारकर देश प्रदेश को हिन्दू सिख मुक्त कर देना चाहते हैं। अफगानिस्तान में रविवार को जलालाबाद में हिन्दुओं एवं सिखों को निशाना बनाकर किया हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है बल्कि यह दौर पिछले कई दशकों से चल रहा है और आतंकी जानबूझकर कर इन्हें देश से खदेड़ने की साजिश के तहत जानलेवा हमले कर बेगुनाहों के खून को बहाकर धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बिगाड़ रहे हैं।रविवार को हुये इस भीषण हमले में बीस से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है और मरने वाले वहां पर रहने वाले सिख परिवार के लोग हैं।दो दशक पहले यहाँ पर सिख परिवारों की संख्या लाखों में थी लेकिन ताबड़तोड़ हमले होने के कारण यह संख्या बमुश्किल से दो चार हजार रह गयी है।इस हमले के बाद वहां बचे खुचे हिन्दू सिखों में इस कदर असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है कि वह अब अफगानिस्तान में नहीं रहना चाहते हैं।अगर जलालाबाद के सिख पलायन करते हैं तो इसका अफगानिस्तान के दूसरे प्रांतों ही नहीं दुनिया भर में रहने वाले सिखों एवं हिन्दुओं पर पड़ेगा।इस हमले की भी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है लेकिन अभी यह कह पाना संभव नहीं है कि हमला किस आतंकी संगठन ने किया है क्योंकि छोटे छोटे आतंकी भी अपनी हनक बनाने के लिए अपने को आईएस बता रहे हैं।अफगानिस्तान में आतंंकियों ने हमला करके वहाँ की सरकार के साथ भारत को भी संदेशा देने का प्रयास किया है।दुनिया भर में आतंकवाद के सहारे बेगुनाहों का खून बहाकर इस्लामिक स्टेट का राज स्थापित करने वाले आतंकी दुनिया के सभी धर्मनिरपेक्ष देशों के लिए खुली चुनौती है और इनका विनाश करना दुनिया के अमन चैन के लिये जरूरी हो गया है। आतंकी आतंक के सहारे अपने मकसद में धीरे धीरे कामियाब होते जा रहे हैं और लोग जान बचाकर देश छोड़कर पलायन कर रहे हैं। अगर यहीं हाल रहा और समय रहते इस आतंकवाद को समूल नष्ट नहीं किया जाता है तो तो निश्चित ही इस्लामिक स्टेट अपने उद्देश्य में सफल हो सकता है।यह हमला अफगानिस्तान के सिखों पर नहीं बल्कि दुनिया भर के अमन पसंदों पर हुआ है और इसका असर दुनिया भर में रहने वाले हिन्दुओं पर पड़ा है।भारत सरकार ने घटना का विरोध एवं निंदा की है लेकिन विरोध एवं निंदा से काम चलने वाला नहीं है। सरकार को अपने देश के विभिन्न देशों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा करना नैतिक दायित्व बनता है। यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद की जननी है और वहीं इन आतंंकियों को संरक्षण भी देता है।दुनिया भर में सिर्फ इकलौती पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना ही है जो आतंंकियों का खुला साथ दे रही है। अफगानी सिखों पर हमला करने वाले निश्चित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी हैं जो अफगानिस्तान में आतंक का राज कायम किये हुये हैं।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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