Thursday, July 5, 2018

बेलगाम और उत्पाती होते जंगली जानवर पर विशेष

जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए जंगली जानवर अभिशाप साबित होने लगे हैं और इन जंगली जानवरों के हमले से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है।इतना ही नहीं इन जगंली जानवर समय समय पर किसानों की बर्बादी का कारण बन जाते हैं। जबसे जंगली क्षेत्र कम होने लगा.है तबसे जंगली जानवरों के उत्पात आबादी में होने लगे हैं। देश के कुछ हिस्से के किसान अगर अगर पशुओं एवं नीलगायों से परेशान हैं तो बिहार छत्तीसगढ़ के किसान जंगली हाथियों से अधिक परेशान हैं।यह जंगली हाथी शेर भालू चीता से अधिक भयावह हैं क्योंकि यह गुस्सा में आकर हर तरह का नुकसान करने लगते हैं।यह उत्पाती हाथी लोगों को मार डालते हैं खेत फसल बरबाद कर डालते हैं और जब इनका मूड खराब होता तो घरों को भी उलट पलट कर नेस्तनाबूद कर देते हैं। इन जंगली हाथियों का सबसे ज्यादा कहर पूर्वोत्तर भारत के साथ साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर के जंगलों के आसपास कुछ ज्यादा ही रहता है। वन विभाग के लोग इन बेलगाम उत्पाती मतवाले हाथियों पर नियन्त्रण नहीं कर पाता है और न ही उनके मूवेंट की जानकारी ही मिल पाती है। इन हाथियों के अपने दल होते हैं और एक उस दल का मुखिया होता है। मुखिया हाथी के पीछे पूरा दल चलता और एक दूसरे पर जान छिड़कता है।छत्तीसगढ़ की ही बात करें तो बीते पांच सालों में इन जंगली उत्पाती हाथियों ने करीब दो सौ लोगों को मार डाला है और भोजन पानी की तलाश में सात हजार से ज्यादा घरों को नेस्तनाबूद कर दिया है।इतना ही नहीं करीब पैतिस हजार हेक्टेयर पर लगी किसानों की फसल को यह हाथी मिट्टी में मिला चुके हैं और सरकार को करीब चालीस हजार करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ा है।अभी इसी साल दो बार हाथियों के दल रायपुर तक पहुंच चुके हैं और यह दल जिस तरफ से गुजर जाते हैं उस तरफ मैदान साफ हो जाता है। छत्तीसगढ़ में इस समय दो सौ जंगली हाथियों के एक दर्जन दल सक्रिय वनक्षेत्र में सक्रिय हैं। नौ हाथियों के दल अम्बिकापुर तथा तीन महोसमुंद-सिरपुर क्षेत्र में पाये जाते हैं।इन बेलगाम जंगली उत्पाती हाथियों के लगाम कसने का फैसला सरकार ने किया है और इनकी गतिविधियों की जानकारी के लिए इनको रेडियो कालर पहनाने की शुरुआत की गई है। शुरुआती दौर में हाथियों के दलों के नेताओं को यह कालर पहनाई जायेगी।यह रेडियो कालर सीधे सेटलाइट से जुड़कर इनके दल की गतिविधियों को पारदर्शी बना देगा और किसी भी समय किसी भी दल की गतिविधियों को देखा जा सकता है। जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए उन्हें तो रेडियो कालर पहनाकर सेटलाइट से जोड़ा जा रहा है लेकिन जिन क्षेत्रों में बाघ चीता नीलगाय एवं आवारा पशुओं ने किसानों एवं गाँव वालों का जीना हराम कर रखा है उनके बारे में सरकार कुछ नहीं कर रही है और न मुआवजा ही दे रही है। इस समय किसान जंगली आवारा पशुओं से बेहद परेशान हैं तथा दलहनी तिलहनी फसलों की बुआई बंद हो गयी है। इस समय इन्हीं जंगली पशुओं की वजह से इस समय किसानों को सबकुछ छोड़कर अपने धान की नर्सरी की रखवाली करना पड़ रहा है और पूरे समय घर बार छोड़कर खेत की रखवाली करना पड़ रहा है।आवारा पशु आये दिन जानलेवा हमला बोलकर लोगों को जान से मार रहे या घायल कर रहे हैं तथा कोई कुछ कर नहीं पाता है और हाथियों एवं नीलगायों की तरह इनके भी दल या झुंड बन गये हैं। हर दल में पांच से पन्द्रह बीस तक सदस्य रहते हैं और जब एक साथ निकलते हैं तो लगता है कि अनुशासित फौज कहीं के लिये कूच कर रही है। यह जंगली जानवर आज से नहीं आदिकाल से हमारे साथ रहे हैं लेकिन सभी अपने अपने दायरे में रहते खाते खेलते और जीवन यापन करते थे। इधर जंगलों का सफाया होने से जंगली जानवरों को मजबूरी में भूख प्यास बुझाने के लिए आबादी में आना पड़ रहा है और व्याकुल होकर पागलपन में मारकाट तोड़फोड़ उथलपथल करने लगते हैं। आज जंगली जानवरों के उत्पात के लिये हम खुद जिम्मेदार हैं क्योंकि हम खुद वनों को काटकर आबादी में तब्दील कर रहे हैं। जंगल में वन विभाग के अधीनस्थ जंगली जानवरों पशुओं की गणना के साथ उनकी गतिविधियों पर नजर रखना भी जरूरी है। जंगली जानवर पशु हमारे दोस्त भी और दुश्मन भी हैं क्योंकि जब भूख प्यास लगती है तो कुछ सूझता नहीं है और पागलपन सवार हो जाता है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
            भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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