Wednesday, July 11, 2018

जेल के अंदर मुन्ना बजंरगी की हत्या के लिए हथियार कौन लाया

देश प्रदेश में रंगबाजी एवं आतंक के पर्याय बन चुके माफिया डान कुख्यात सात लाख रुपये का ईनामी खूंखार अपराधी मुन्ना बजरंगी की मौत तो होनी ही थी क्योंकि वह जिस बुलंदियों पर पहुंच गया था वहाँ पर पहुंचने के बाद दो रास्ते बचते हैं।एक रास्ते से तो मौत मिलती है या फिर दूसरे रास्ते से वह राजनीति में सक्रिय नेता हो जाता है। शहाबुद्दीन मुख्तार अंसारी फूलनदेवी पवन पाण्डेय जैसे न जाने कितने माफिया डान मरने से इसलिए बच गये क्योंकि उन्होंने समय रहते राजनैतिक लबादा ओढ़ लिया था।मुन्ना बजरंगी ने भी जान बचाने के लिए पिछले दिनों भाजपा के जरिये अपने एक डमी को लोकसभा चुनाव में उतारने की कोशिश तो की लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सका था। मुन्ना बजरंगी एक समय में  मुख्तार अंसारी का बहुत करीबी था लेकिन भाजपा से नजदीकियां बढ़ाने के कारण दूरी भी बढ़ गयी थी। यह कटु सत्य है कि मुन्ना बजरंगी को एक न एक दिन गैंगवार या पुलिस मुठभेड़ में मरना तय था लेकिन जेल में मरने की आशंका उसे इतनी अधिक नहीं थी।वह जानता था कि उसकी हत्या पेशी पर जाते आते समय रास्ते में हो सकती है। यहीं बात तो बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने अपने वकील के साथ दस बारह दिन पहले 29 जून को राजधानी लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था।उन्होंने कहा था कि उनके पति की हत्या की हत्या हो सकती है और ऐसा तब होगा जब उन्हें मुकदमें की पैरवी के लिए जेल से अदालत ले जाया जा रहा होगा। मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगीजी से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी।उनका कहना था कि गत दिनों झाँसी जेल में वरिष्ठ अधिकारियों के इशारे पर उनके पति पर जानलेवा हमला किया गया लेकिन वह बाल बाल बच गये।बागपत जेल में हुयी घटना को पूर्वनियोजित षड़यंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कुछ सफेदपोश नेता और उद्योगपति भी शामिल हैं। उनका कहना था कि इस तरह के कुछ लोगों के नाम भी उनके पति ने अदालत को लिखित बताये थे। अब सवाल यह उठता है कि जब मुन्ना बजरंगी को जान का इतना खतरा था तो उसकी बात पर गौर क्यों नहीं किया गया? शाम को उसे झांसी से बागपत जेल पेशी पर लाया गया और सुबह छः बजे ही उस पर जानलेवा हमला हो गया और उसके शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया गया। आखिर हमलावरों के पास इतनी सुबह असलहा कैसे मौजूद थे क्या रात में असलहा लेकर कैदी सोते थे? इतनी सुबह जेल के अंदर हमला करके असलहा लेकर या गटर में फेंककर हत्यारों या हत्यारे का बच निकलना जेल प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। जेल के अंदर कारतूस असलहा रखने के लिए सबसे पहले वहाँ के बंदी रक्षकों और संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार करके उनके विरुद्ध साजिश का मुकदमा दर्ज होना न्यायहित में होगा। अगर जेल के जिम्मेदार नहीं चाहते तो जेल के अंदर असलहा नहीं जा सकते थे इसलिए इस घटना में कुछ षड़यंत्र की बू जरूर आ रही है। मुन्ना बजरंगी के बागपत जेल पहुंचते ही असलहों का वहाँ पहुंच जाना और सुबह उसका भरपूर इस्तेमाल हो जाने के पीछे भी एक गहरे षड़यंत्र की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के पीछे इतने अनुउत्तरित सवाल है जिनका पर्दाफाश उच्चस्तरीय जांच से ही संभव है शायद इसीलिए कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सीबीआई से जाँच कराने की माँग सरकार से की है। इस अनहोनी घटना की उच्च स्तरीय जाँच कराना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह जेल की सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है।जेल प्रशासन और अपराधियों की गठजोड़ की चर्चाएं पहली बार नहीं हो रही है बल्कि दशकों से हो रही है। जो जितना बड़ा अपराधी होता है जेल में उसका उतना अधिक सम्मान होता है क्योंकि बड़ा अपराधी बख्शीश बहुत देता है। जेल में फैल रही इस अव्यवस्था में बदलाव जरूरी है क्योंकि जेल में अपराध नहीं होता है बल्कि बड़े से बड़ा अपराधी चूहा बनकर रहता है। जेल में अपराध करने का मतलब जेल नहीं खाला के घर जैसा है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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