Tuesday, July 31, 2018

परमात्मा के साकार स्वरूप और पौराणिक मान्यताओं पर विशेष

नारी को परमपिता परमेश्वर के निराकार रूप का साकार स्वरूप माना गया है। ऐसी मान्यता है कि परमेश्वर का नारी स्वरूप ही परमपिता परमात्मा और जगतमाता होता है।नारी एक स्वरूप माँ का होता है जिसके अधीन ईश्वर को भी रहना पड़ता है और जब उसे धरती पर आना होता है तो वह भी नारी के माँ स्वरूप को माध्यम बनाता है। ब्रह्मा विष्णु महेश सभी इसी नारी को ही अपनी माता मानकर उनकी आज्ञा का पालन करते हैं। इतिहास साक्षी है जब जब इस धराधाम पर अत्याचार पापाचार दुराचार अन्याय उत्पीड़न एवं अधर्म बढ़ा है तब तब नारी शक्ति ने ही धर्मपरायण लोगों की रक्षा के लिए इन आसुरी शक्तियों का विनाश किया है।इसीलिए नारी को शक्ति स्वरूपा एवं जगत नियंता कहा गया है और कहते हैं कि-" जहाँ पर नारी का सम्मान होता है वहाँ पर देवताओं का वास होता है"। इतिहास गवाह है कि जिसने भी नारी का अपमान करने की कोशिश की उसका सर्वनाश हो गया क्योंकि नारी के दो स्वरूप होते हैं जिनमें एक स्वरूप प्रेममयी माता का तो दूसरा रणचण्डी दुर्गा का होता है।नारी का उत्पीड़न तभी तक होता है जबतक वह प्रेममयी सरलसलिला माँ बनी रहती है जिस समय वह अपना माँ का स्वरूप त्याग देती है तो वह दुर्गा बनकर प्रलय मचाने लगती  है। इधर नारीशक्ति यानी महिलाओं के कुछ अपवाद बने मंदिरों में प्रवेश एवं पूजा पाठ करने पर सदियों पहले से लगे प्रतिबंध को लेकर चर्चाओं एवं बहस का दौर चल रहा है।अभी कुछ दिन पहले केरल के शबरी माला मंदिर में दस से पचास साल तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने पर लगी रोक को लेकर पूरे देश में चर्चाएं होते होते मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यों की पीठ के सामने मंदिर के पैरोकार वकील ने इसे पुराने रीति रिवाजों में हस्तक्षेप तथा अयोध्या जैसा नया विवाद शुरू होने की आशंका व्यक्त की है।इस शबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा अर्चना होती है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पीछे जो तर्क दिये जा रहे हैं वह पूरी तरह से सही नहीं माने जा सकते हैं क्योंकि सरकार और भगवान दोनों नारी को समानता का अधिकार देते हैं।यह सही है कि महिलाएं मासिक धर्म के दौरान अपवित्र रहती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है कि वह कभी पवित्र ही नहीं रहती हैं। क्षणिक अपवित्रता के लिये उन्हें बहिष्कृत करके उनके समानता के मौलिक अधिकारों को नहीं छीना जा सकता है। यह सही है कि हमारा विज्ञान रीति रिवाजों और मान्यताओं पर विश्वास नहीं करता है लेकिन कभी कभी वह भी इनके अधीन होने पर विवश हो जाता है।अभी दो दिन पहले हमीरपुर स्थित ध्रूम रिषि आश्रम में बने पुराने उनके मंदिर में वहां की महिला भाजपा विधायक मनीषा अनुरागी के जाने के बाद जो कुछ हुआ उसे लेकर महिलाओं के पूजा घरों में घुसने पर लगी रोक का मामला फिर से चर्चा में आ गया है।इस मंदिर में शतकों पहले से महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगी हुई है और मान्यता है कि महिलाओं के प्रवेश करने पर ध्रूम ऋषि क्रोधित हो जाते हैं और सूखा पड़ जाता है। कहते हैं कि ऐसा चार दशक पहले महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने पर हो चुका है। गत 12 जुलाई को भाजपा विधायक एक स्कूल के समारोह में हिस्सा लेने के बाद आश्रम के मंदिर में गयी थी। उस समय तो किसी ने विरोध नहीं किया लेकिन जाने के बाद ध्रूम ऋषि की प्रतिमा को मंत्रोच्चार के साथ प्रयागराज संगम ले जाकर पवित्र किया गया है।इसे अंधविश्वास कहा जाय या ध्रूम ऋषि का चमत्कार कहा जाय कि मूर्ति को पवित्र करते ही बरसात शुरू हो गई जो अचानक मंदिर में विधायक के जाने से बंद हो गयी थी। मान्यता है कि मंदिर सतयुग में भगवान नारायण के गुरु ध्रूम ऋषि का सदियों पुराना आश्रम पड़ोस मुस्कुरा खुर्द में बना हुआ है। मान्यता है कि ध्रूम ऋषि का आगमन यहाँ पर विजय दशमीं के दिन होता है और दीपावली पर तीन दिवसीय भव्य मेला भी लगता है।मीडिया भले ही इसे सुर्खियां बना रही हो लेकिन विधायक इसे भूल मानती है और बताती हैं कि उन्हें इसके बारे किसी ने बताया नहीं था।
धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

        भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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