Wednesday, August 15, 2018

15 अगस्त स्वाधीनता दिवस की पावन बेला पर विशेष

आज हमारा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है और छोटा बड़ा सभी स्वतंत्रता दिवस की मस्ती में देशभक्ति गीतों पर झूम रहा है। स्कूल हो चाहे सरकारी अर्द्ध सरकारी अथवा गैर सरकारी कार्यालय संस्थाएँ हो या फिर गाँव गली मुहल्ला हो हर जगह भारतमाता की जय स्वाधीनता दिवस अमर रहे और वंदेमातरम् जैसे देशभक्ति नारों से गुंजायमान हो रहा है।जगह जगह तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं और जगह जगह संगोष्ठियों के आयोजन के साथ खेलकूद एवं भाषण प्रतियोगिताओं के आयोजन हो रहे हैं।इतना ही नहीं  स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुये तमाम जाने अनजाने भारत माता के सच्चे सपूत शहीदों को दीपदान करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।आज स्वतंत्रता दिवस की पावन वेला पर परम्परा के अनुसार प्रधानमंत्री स्वतंत्रता के प्रतीक लाल किले की प्राचीर से देश को संबंधित करेगें।आजादी हमें आज जैसे जाति धर्म सम्प्रदाय के दल दल में फंसकर नहीं मिली बल्कि कौमी राष्ट्रीय एकता अखंडता के बल पर हजारों लोगों के निःस्वार्थ देशप्रेम की बलिदानी भावना से मिली है। आजकल लोग सेवा एवं देशप्रेम कम करते हैं बल्कि इसका दिखावा ज्यादा करते हैं और जो कुछ भी करते हैं वह निःस्वार्थ भाव से नहीं बल्कि अपना उल्लू सीधा करने के लियेे ज्यादा करते हैं।हमें आजादी जिनकी बदौलत मिली है उनके अंदर स्वार्थ नहीं बल्कि भारतमाता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने की अंतिम तमन्ना थी।अपने ही लोगों की साजिश के शिकार आजादी के मतवाले चन्द्रशेखर आजाद रहे हो चाहे नेता जी सुभाषचंद्र बोस रहे हो सभी का एकमात्र जीवन का लक्ष्य आजादी था। महात्मा गांधी का नारा कि-" न मारेगें न मानेंगे बहादुर कष्ट झेलेगें" अंग्रेजी सरकार की लिये तोप से भी अधिक भयावह दिखने लगा और करो या मरो के नारे एवं आजाद हिन्द फौज के अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे के साथ हमला करने के बाद ब्रिटिश सरकार को लगा कि अब यहाँ पर ज्यादा देर रूकने का मतलब करारी हार का मुँह देखना है। तभी तो अंग्रेजों ने अपनी इज्ज़त बचाने के चाल चलकर जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना दोनों को प्रधानमंत्री बनने की इच्छा व्यक्त करते हुये हमारे देश की कमाई लेकर सत्ता को सशर्त हस्तातंरित करके भाग खड़े हुये। हम यहाँ पर शर्तनामे पर चर्चा नहीं करना चाहते है लेकिन इतना जरूर कहना चाहते हैं कि पूर्ण आजादी तो हमें तब मिलती जब हम दुश्मनों से अहिंसात्मक या हिंसात्मक आदोलन या हमला करके उनसे सत्ता छीनकर उन्हें यहां से जान बचाकर भागने पर मजबूर कर देते। हमें अंग्रेजों ने सत्ता हस्तांतरण के साथ ही देश का बंटवारा, साम्प्रदायिक खूनी हिंसा मार काट आतंकवाद जातिवाद का दंश भी दिया है जिसकी ज्वाला में हमारी आजादी को लपटें लगने लगी हैं।आजादी के बाद बंटवारे के समय से हमारा ही भाई हमारा दुश्मन बना दुनिया में आतंंकियों का सप्लायर और आतंकी की नर्सर तैयार कर रहा है। वह खुद अपनी आजादी को बचा नहीं पा रहा है और बंगला देश का बदला काश्मीर को अलग करके लेने के लिये गली कूचों में फियादीन आतंकी पैदा करके हमारी आजादी को प्रभावित करना चाहता है।हमारे पड़ोसी पट्टीदार दुश्मन देश की करतूतों की वजह से हमें हमेशा आतंकी घुसपैठ का खतरा बना रहता है और सीमा पर बिलावजह सीजफायर के बावजूद रातदिन फायरिंग करके आतंंकियों को सीमा पार कराने का प्रयास किया जा रहा है। हमें भले ही पूर्ण आजादी न मिली हो लेकिन लोकतांत्रिक आजादी तो मिली है। अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार के फलस्वरूप ही हम अपने टूटे फूटे विचार आप सभी के समक्ष रोजाना सुप्रभात सम्पादकीय के रूप में प्रस्तुत कर रहें है। हमें जो भी आजादी जिस भी रूप में मिली है उसे धरोहर के रूप सदैव  बनाये रखना हर देशभक्त का प्रथम कर्तव्य बनता है। हमें नही भूलना चाहिए इस आजादी के लिये न मालूम कितनी सुहागिनों की माँग का सिंदूर उजड़ गया है और माताएँ निःसंतान हो गयी है। हमें आजादी दिलाने वाले आजकल की तरह के कमीशनखोर पद लोलुप स्वार्थी भ्रष्ट बेईमानी देशद्रोही मक्कार हरामखोर नहीं थे बल्कि वह भारतमाता के सच्चे लाड़ले थे जिन पर आज भी देश गर्व करता है।हमें आजादी दिलाने वालों में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी थे लेकिन आजादी की जंग में सभी हिन्दुस्तानी थे।हम आज स्वाधीनता दिवस की वर्षगांठ की पावन वेला पर अपने सभी साथियों सुधीपाठकों अग्रजों को शुभकामनाएं देते हुये आप सभी के मंगल जीवन एवं आजादी की अक्षुण्णता की कामना ईश्वर से करते हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।।  ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार / समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।
सम्पादक-बाराबंकी

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