Friday, August 10, 2018

पुलिस पीएसी सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा निरस्त

कहावत है कि-" खेत खाय गदहा और मारे जाय जुलाह"। कभी कभी गलती कोई करता है और उसका परिणाम दूसरे बेगुनाहों को झेलना पड़ता है।कुछ इसी तरह पिछले महीने सिपाहियों की लिखित परीक्षा के दौरान हुआ है जिसका खामियाजा लाखों नवजवानों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले महीने 18 एवं 19 जून को सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस एवं पीएससी सिपाहियों के 41520पदों के लिये लिखित परीक्षा कराई गयी थी।परीक्षा सम्पन्न कराने का कार्य भर्ती बोर्ड द्वारा टाटा कंसल्टेंसी  सर्विसेज के माध्यम से किया गया था।इसमें प्रदेश के दस लाख से ज्यादा बेरोजगार शामिल हुये थे तथा प्रदेश के 860 केन्द्रों के माध्यम से दो पाली में परीक्षा सम्पन्न हुयी थी। दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान इलाहाबाद स्थित गुरु माधव प्रसाद शुक्ला इंटर कालेज में 18 जून को पहली पाली की परिक्षा में दूसरी पाली के प्रश्न पत्र खुलकर बंट गये थे जबकि एटा के पीपीएस इंटर कालेज में पहली पाली की परीक्षा में दूसरी पाली और दूसरी पाली में प्रथम पाली के पर्चे वितरित हो गये थे।इस घपलेबाजी का पर्दाफाश परीक्षा सम्पन्न होने के दो तीन दिन बाद होने के बाद इसकी जाँच अनु सचिव भर्ती तृतीय द्वारा जब की गई तो घपले की पुष्टि हुयी है।भर्ती बोर्ड ने इस गलती के लिये केन्द्र व्यवस्थापक, पुलिस प्रेक्षक एवं परीक्षा कराने वाली संस्था को दोषी मानता हैं।फिलहाल जाँच में घपले की पुष्टि होने के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया की इस परीक्षा को ही निरस्त कर दिया गया है और सभी जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। जिम्मेदार लोगों की गैर जिम्मेदाराना हरकतों के चलते दस लाख लोगों को अब दूबारा परीक्षा देना पड़ेगा इसके लिये जल्दी ही दूसरी तिथियों की घोषणा की जायेगी।परीक्षा कराने वाली संस्था आज भी इस गलती को मानने को तैयार नहीं है और उसका मानना है कि अगर ऐसी गलती हुयी होती तो केन्द्र पर्वेक्षकों या अन्य माध्यमों से इसकी सूचना आ गयी होती। कोई अपनी गलती माने या न माने लेकिन दस लाख बेरोजगारों का भविष्य जरूर दाँव पर लगा दिया गया है। अब इन बेरोजगारों को दूबारा परीक्षा में शामिल होने के लिये एक बार फिर से पैसा समय और परिश्रम करना पड़ेगा। हांलाकि इस गलती से परीक्षा की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है बल्कि मात्र दो केन्द्रों पर पेपर में हेराफेरी हो गयी है। जाँच के दौरान भी पाया गया कि परीक्षा पेपर बदल जाने से किसी परीक्षार्थी को कोई फायदा नहीं हुआ है।जब परीक्षा की शुचिता शुद्ध थी तो पूरी परीक्षा को निरस्त करना ईमानदारी का प्रमाण देने जैसा लगता है।आखिर वह कौन से तत्व हैं जो विभिन्न नौकरियों की परीक्षाओं के पेपर लीक करके या हेराफेरी करके परीक्षा को रद्द करवा देते है इसका पर्दाफाश होना जरुरी होता है।इस समय राजनैतिक प्रतिस्पर्धा के चलते एक दूसरे के कार्यकाल में की गई भर्तियों की जाँच कराने या भर्ती रद्द करने का जैसे दौर शुरू हो गया। इस उलट पलट का सीधा असर बेरोजगार युवकों पर पड़ता है तथा बेरोजगारी को बढ़ावा मिलता है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार / समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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