Monday, August 20, 2018

पंजाब की कांग्रेस सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तानी दौरे पर विशेष

जो हमारे देश का दुश्मन होता है वह हम सब देशवासियों का दुश्मन होता है क्योंकि राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है।देश के आन-बान-शान की रक्षा करना हर देशवासी का पुनीत कर्तव्य एवं नैतिक उत्तरदायित्व होता है।यहीं कारण है कि जब देश के मान सम्मान की बात आती है तो सभी राजनैतिक दल अपने सभी वैचारिक मतभेदों को भुलाकर एकमत और एकजुट हो जाते हैं। इधर स्वार्थवादी राजनीति हमारी राष्ट्रभक्ति एवं एकता अखंडता को प्रभावित करने लगी है और कुछ लोग खाते पीते सोते शौच जाते हैं हिन्दुस्तान में लेकिन कसीदे पढ़ते हैं दुशमन देश पाकिस्तान की। इधर कुछ लोग अपने भारत देश से कहीं ज्यादा दुश्मन देश से प्यार करने और बेहतर बताने लगे हैं।इस राष्ट्र विरोधी हरकतों में अबतक राजनेता शामिल नहीं थे लेकिन अब वह भी दुश्मनों को गले लगाने से गुरेज नहीं कर रहें हैं। स्थिति तो यहाँ तक पहुंच गयी है कि कुछ लोग दुश्मन देश के आंगन में बैठक राजनैतिक खिचड़ी पकाकर राजनीति का छौंका मारने लग गये है। उन लोगों की किरीकरी देश में हो ही रही थी कि इसी बीच अभी परसों जबकि पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री सर्वमान्य राजनेता राजनैतिक युगपुरुष पंडित अटल बिहारी बाजपेयी के निधन से शोक में डूबा था उसी समय कांग्रेस के पंजाबी राजनेता नवजोत सिद्धू दुश्मन पड़ोसी देश पाकिस्तान के नवनिर्वाचित अपने खिलाड़ी दोस्त इमरान खान के बुलावे पर अटल जी का गम भूलकर उनके प्रधानमंत्री पद के शपथग्रहण समारोह में जश्न मनाने उनके यहाँ पहुंच गये।दुख की बात तो यह है कि ऐसे राष्ट्रीय शोकाकुल माहौल में सरकार ने उन्हें वहां जाने की अनुमति क्यों दे दी? सरकार का ऐसे माहौल में पाकिस्तान जाने की अनुमति देने को एक राजनैतिक बिसात बिछाना मात्र माना जा सकता है।हद तो तब पार हो गयी जब वह हमारे बेगुनाह सैनिकों की निर्मम हत्या करके सिर तक काटकर उठा ले जाने वाली सेना के सेनाध्यक्ष से वह गले मिलकर पंजाब सरकार के मंत्री रूप में उनकी पीठ थपथपाने लगे। इतना ही नहीं शपथग्रहण समारोह के दौरान वह उस तथाकथित आजाद काश्मीर के स्वंयभू राष्ट्रपति के बगल गर्व के साथ बैठे जिसे हमारे देश ने मान्यता नहीं दी है और आज भी हम उसे अपने देश का एक अंग मानकर उसे गुलाम काश्मीर कहते हैं। पंजाब सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री का राष्ट्रीय शोक के दौरान दुश्मन देश में आयोजित समारोह में शामिल होना एक गंभीर मामला है।यह कटु सत्य है कि सिद्धू को भारतीय स्टेट मंत्री के रूप में पाकिस्तान में बेवकूफ बनाकर दुनिया के सामने पेश करके अपना उल्लू सीधा कर लिया गया।नवजोत होशियार कौआ की तरफ पाकिस्तान के कसीदें पढ़ते हंसते मुस्कारते गर्व के साथ सीना फूलाकर वापस भी लौट आये हैं।उन्हें अपनी भूल का अहसास तब हुआ जबकि उनके खिलाफ प्रदर्शन जलाया एवं उनके पुतले फूंके जाने लगे और  मीडिया में किरकिरी होने लगी। नवजोत सिद्धू के पाकिस्तानी दौरे से उनकी देशभक्ति संदिग्ध हुयी है और इसका हो रहा विरोध भी जायज है।सिद्धू को नहीं भूलना चाहिए कि जिस जनप्रिय सर्वप्रिय राजनेता मानता है वह उनके भी गुरु थे। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ----------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार /समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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