Sunday, August 19, 2018

इतिहास बाढ़ प्रकृतिक कहर कहीं कोई चेतावनी तो नही

आज हमारा विज्ञान भले ही प्रकृति या कुदरत के वजूद को न मान रहा हो लेकिन जब प्रकृति अथवा कुदरत अपना रौद्र रूप धारण करके कहर बरपा करने लगती है तब आधुनिक विज्ञान भी फेल होकर बेवश हो जाता है। भूकंप बाढ़ जैसी दैवी प्रकोप के आगे विज्ञान असहाय हो जाता है और पूर्व अनुमान तक नहीं लगा सकता है।एक बाढ़ हर साल भारी बरसात होने पर आती है जबकि एक बनावटी कृतिम बाढ़ विभिन्न बैराजों का पानी विभिन्न नदियों में छोड़ने से आती है।कभी कभी मौसमी बरसात या बादल फटने से ऐसी बाढ़ आ जाती जिससे तबाही मच जाती है और देखते ही देखते सबकुछ जलमग्न हो जाता है।सरकार का करोड़ों अरबों बचाव सहायता राहत और आपदा प्रबंधन पर खर्च हो जाता है। लोग देखते ही देखते आसमान से नीचे आकर दाने के मोहताज हो जाते है तथा बाढ़ में डूबने के साथ ही विभिन्न बाढ़ जनित बीमारियों की चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा जाते हैं। बाढ़ आने से भले ही बचाव सहायता राहत आदि के नाम पर सरकारी खजाना खाली हो जाता हो लेकिन यह सहायता बाढ़ पीड़ितों के लिये ऊँट के मुँह में जीरे की तरह होती है इसीलिए ऐसी मुसीबत में दानवीर कर्ण आगे आते हैं और दिल खोलकर मदद देने में संकोच नहीं करते हैं। इस समय दुनिया के कई देश भीषण ऐतहासिक बाढ़ विभीषिका की चपेट में हैं और बाढ़ के आगे बेवश होकर अपनी तबाही अपनी ही आँखों से देखने के लिये मजबूर हैं। दुनिया के आकाओं में से एक चीन जैसा सर्व सम्पन्न सुपर देश इस वक्त बाढ़ के आगे नतमस्तक है। अपने देश के कई राज्य भी बाढ़ की चपेट में कराह रहे हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा रौद्र रूप केरल में है जहाँ प्रकृति के आगे सबकुछ बेकार साबित हो रहा है।यहाँ पर अबतक तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत निर्मोही बाढ़ से हो चुकी है। प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री खुद केरल के इतिहास में सैकड़ों साल बाद आयी ऐसी अभूतपूर्व प्रलंयकारी बाढ़ का हवाई निरीक्षण करके छः सौ करोड़ रूपये की सहायता देने की घोषणा कर चुके हैं।वहाँ आई बाढ़ के आगे सभी बौने साबित हो रहे हैं और लोगों के समक्ष रोटी कपड़ा और मकान की समस्या खड़ी हो गयी है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केरल के मुख्यमंत्री को देशवासियों से मदद देने की गुहार लगानी पड़ रही है। इसी बीच बाढ़ सहायता को लेकर राजनैतिक आरोपों प्रत्यारोपों की शुरुआत हो गयी है और सहायता देने में भेदभाव के आरोप सरकार पर विपक्षी लगाने लगे हैं।केरल के अलावा बाढ़ का प्रकोप जम्मू काश्मीर उत्तर प्रदेश बिहार आदि राज्यों में चल रहा है और चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। हमारी सेना के साथ राष्ट्रीय आपदा बचाव दल बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में जुटे हैं और विभिन्न सरकारी एजेंसियां बाढ़ पीड़ितों को रहने खाने पीनेे रोशनी एवं दवाई की व्यवस्था कर रही है।कहते कि आग पानी या दैवी प्रकोप छोटा बड़ा अमीर गरीब नहीं देखता है और उसका व्यवहार सभी के साथ एक जैसा होता है। बाढ़ जैसी दैवी आपदा का मुकाबला करना अकेले सरकार के वश की बात नहीं होती है और बिना दानवीरों की मदद के काम नहीं चल पाता है।देश के सभी राजनेता अगर अपने वेतन को दान कर दे तों करोड़ों रूपये एकत्र हो सकते हैं।इसी तरह सरकारी सेवा में लगे लोग सिर्फ पांच दिन का वेतन दे दे तो भी करोड़ों रूपये एकत्र हो सकते हैं।हमें खुशी हो रही है कि इस दिशा में पहल हुयी है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ----------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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