Sunday, August 12, 2018

विभिन्न जिलों के मशहूर उत्पादों को अंतराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध कराने की सरकारी पहल

एक समय था जबकि हर जाति के हुनर अलग अलग होते थे और लोग अपने पुश्तैनी धंधे के अलावा दूसरा धंधा नहीं करते थे। समाजिक विभिन्न कार्यों करने की जिम्मेदारी समाज के विभिन्न वर्गो के लोग निभाते थे।मसलन कुरील चमड़े का काम, धोबी कपड़ों की धुलाई, नाई बालों की कटिंग, बढ़ई लकड़ी के सामान बनाने, लुहार लोहे, सुनार सोना चाँदी के गहने बनाने का काम तथा ब्राह्मण पूजा पाठ एवं लोक कल्याण के कार्य करता था।बदलते समय के साथ जातीय हुनर का मिथक टूटने लगा है और अब कोई हुनर किसी जाति धर्म से जुड़ा हुआ नही रह गया है।हुनर जाति धर्म नही देखता है और जो प्यार से उसे ग्रहण कर लेता है वह उसके पास पहुंच जाता है।उत्तर प्रदेश को देश की जान कहा जाता है क्योंकि यहाँ का हुनर दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखता है। हर जिले में अलग अलग हुनरमंद लोग रहते हैं और अपने उत्पाद के बल पर अपनी और अपने जिले की पहचान बनाये हुये हैं। मुरादाबाद की पहचान अगर पीतल हुनर से होती है तो बाराबंकी की पहचान मेंथा और केला बुनकरी से होती है। इसी तरह यहाँ के बने कपड़े दरियाबादी रूमालें मुस्लिम देशों में अपनी पहचान बनाये हुये हैं। वाराणसी की बनारसी साड़ी तो भदोही की कालीन और अलीगढ़ का ताला विश्वविख्यात है। इसी तरह इलाहाबादी लाल गुदे वाला अमरूद तो फैजाबादी बंडा व कानपुर का पेठा और मलिहाबादी आम दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है।इतना ही नही आगरा का चमड़ा ,फिरोजाबाद की चूड़ियां, मऊ और टांडा पावरलूम, प्रतापगढ़ का आँवला  अन्तर्राष्ट्रीय पहचान रखता है। इसी तरह करीब करीब सभी जिले अपने उत्पाद के अपनी अलग पहचान रखते है।अगर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विभिन्न उत्पादों को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार का सहारा मिल जाय तो निश्चित ही उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन सकता है और बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है। सरकार ने इस दिशा में पहली बार पहल की है और प्रदेश के 75 जिलों के उत्पादों की प्रदर्शनी का दो दिन पहले राजधानी स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान मेंं महामहिम राष्ट्रपति उद्घाटन भी कर चुके हैं।इससे पहले राजधानी में सिमट2018 का हो चुका है। महामहिम ने भी माना कि यहाँ के हुनरबाजों की हुनरमंदी को महत्व देकर उनके उत्पादों को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार लायक बनाया जा सकता है क्योंकि यहाँ के विभिन्न जिलों के बने विभिन्न उत्पादों की अन्तरराष्ट्रीय बाजार में माँग पहले से है। उन्होंने यह कहा कि हमे विदेशों से सीख लेनी चाहिए कि वहां के लोग किस तरह हाथ से बनी चीजों को आधुनिक बांडिंग एवं मार्केटिंग के जरिये विदेशी मुद्रा कमा रहें हैं।सरकार द्वारा एक जिला एक उत्पाद योजना के माध्यम से स्थानीय विशेषताओं को उभारकर उन्हें पहचान दिलाने एवं उनके उत्पाद को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया गया है जो एक स्वागत योग्य सराहनीय पहल है।अगर सरकार की यह योजना परवान चढ़ती है तो निश्चित ही जिलों की सूरत एवं सीरत बदल जायेगी। योजना को लक्ष्य तभी मिल सकता है जब ईमानदारी के साथ इसका क्रियान्वयन किया जाय क्योंकि सरकारी उपेक्षा के चलते प्रदेश के तमाम उद्योग धंधे बंद होने की कगार पर पहुंच गये हैं। यह सब ऐसे उद्योग धंधे हैं जो एक जमाने में धूम मची थी लेकिन आधुनिक टेक्नोलॉजी के युग ने इन हाथ के धंधों को अपाहिज बना दिया है क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में वह मुकाबला नहीं कर पाते हैं। फिलहाल सरकार की यह अनूठीं पहल कितना परवान चढ़ पाती है यह तो भविष्य ही तय करेगा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार /समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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