Wednesday, September 12, 2018

पृथ्वी राज शिव मंदिर जहां सपने में हुए थे शिवलिंग के दर्शन

गोन्डा ब्यूरो पवन कुमार द्विवेदी
गोन्डा जनपद की शान है पृथ्वीनाथ शिव मंदिर
जिले का प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ मंदिर (खरगुपुर) क्षेत्र में स्थित हिन्दुओं का प्रमुख धार्मिक स्थल है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का शिवलिंग भीम ने स्थापित किया था। यह भी कहा जाता है कि पृथ्वीनाथ सिंह नामक एक व्यक्ति को स्वप्न में शिवलिंग का दर्शन हुआ था, और उसी के नाम पर इस मन्दिर का नाम पृथ्वीनाथ मन्दिर हुआ। प्रत्येक कजली तीज, शिवरात्रि व दशहरा को यहाँ विशाल मेला लगता है। यही नहीं, हर तीसरे वर्ष पड़ने वाले मलमास में एक माह का मेला भी यहाँ पर आयोजित किया जाता है। श्रावण माह में प्रत्येक शुक्रवार व सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ इस मन्दिर पर उमड़ पड़ती है। यह अति प्रसिद्ध मन्दिर ज़िला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर जनपद के एक छोटे से कस्बे खरगुपुर बाज़ार के पश्चिम में मौजूद है। यह मन्दिर वास्तुकला का एक सर्वोत्तम नमूना है। इस मन्दिर में स्थापित शिवलिंग विश्व का सबसे ऊँचा शिवलिंग बताया जाता है, जिसे द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने स्थापित किया था। 
पृथ्वीनाथ मन्दिर के दर्शन पाकर सभी भक्त आत्मिक शांति को पाते हैं। मन्दिर के शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट, कलेश दूर हो जाते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास इस स्थान की महत्ता को दर्शाता है। एक कथा के अनुसार जब पांडवों को अज्ञातवास दिया गया तो वह यहाँ पर आए। इस दौरान भीम ने यहाँ पर शिवलिंग की स्थापना की। परंतु कालांतर में यह शिवलिंग जमीन में धसने लगा और धीरे- धीरे पूरा का पूरा शिवलिंग धरती में समा गया। कहा जाता है की एक बार खरगुपुर के राजा गुमान सिंह की अनुमति को पाकर गाँव के निवासी, जिसका नाम पृथ्वीनाथ सिंह बताया जाता है, उसने अपना घर बनाने के लिए निर्माण कर्य शुरू करवाया। जमीन की खुदाई के दौरान यहाँ से रक्त का फौव्वारा बहने लगा।इस दृश्य को देखकर सभी लोग सहम गए तथा पृथ्वीनाथ सिंह ने घर का निर्माण कार्य रोक दिया, परंतु उसी रात में पृथ्वीनाथ सिंह को एक सपना आया। सपने के द्वारा उसे इस बात का पता चला कि भूमि के नीचे 7 खण्डों का एक शिवलिंग दबा हुआ है। पृथ्वीनाथ सिंह को शिवलिंग निकाल कर उसकी स्थापना का आदेश प्राप्त होता है। प्रात: काल उठकर वह इस बात को राजा के समक्ष रखता है, जिसपर राजा उस स्थान पर एक खण्ड तक शिवलिंग खोदने का निर्देश देता है। वहाँ से शिवलिंग प्राप्त होता है। इस शिवलिंग की स्थापना की जाती है। राजा पूर्ण विधि विधान से शिवलिंग को मन्दिर में स्थापित करवाता है। पृथ्वीनाथ के नाम पर ही इस मन्दिर का नाम पृथ्वीनाथ शिव मन्दिर पड़ गया। इस मंदिर के बारे में कुछ अन्य कथाये भी प्रचलित है। इस मंदिर पर सालभर में अनेक बार मेला लगता है जहां भक्तो की भारी भीड़ होती है।
पृथ्वीनाथ मंदिर में कजली तीज के अवसर पर भक्तो की अपार भीड़ होती है। कजली तीज पर कल आस्था से ओतप्रोत लाखों श्रद्धालु पहुंचकर यहाँ जलाभिषेक करेंगे। सरजू, अयोध्या और राप्ती से जल लाकर यहां मौजूद भव्य शिवलाट पर तमाम श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। छह फुट ऊंचा यह शिवलिंग काले कसौटी के दुर्लभ पत्थर से बना हुआ है। पुरातत्व विभाग की जांच में ज्ञात हुवा की यह एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जो 5 हजार वर्ष पूर्व महाभारत काल का है। यहां सच्चे मन से जलाभिषेक, दर्शन, पूजन करने से लोगो की मनवांछित मनोकामना पूरी होती है। यहाँ अनेक मौको पर आसपास के तमाम जिलों सहित पड़ोसी देश नेपाल तक के तमाम श्रद्धालु आकर जलाभिषेक एवं पूजन- अर्चन करते है। यहाँ कजली तीज में आने वाले लाखों कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशाशन पूरी तरह से तैयार है। मंदिर के गर्भगृह व सम्पूर्ण परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरे से हो रही है। सुरक्षा के दृस्टि से भारी संख्या में यहाँ फ़ोर्स बुलाई गई है।

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