Sunday, September 16, 2018

समाधान दिवस के अवसर पर बड़े अधिकारियों ने समझा जनता का दर्द

गोन्डा ब्यूरो पवन कुमार द्विवेदी
आयुक्त देवीपाटन मण्डल सुधेश कमुार ओझा, डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र ए0के0 राय तथा एसपी लल्लन सिह ने समाधान दिवस की हकीकत परखने के लिए थाना कोतवाली नगर में अचानक पहुंचकर मामलों की सुनवाई की तथा निस्तारण की हकीकत देखी। शनिवार के जिले के सभी थानों में  समाण्धान दिवस का आयोजन किया गया जिसमें कुले 93 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से 16 शिकायतों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया।
           समाधान दिवस में आयुक्त व डीआईजी नेे सख्त चेतावनी दी कि समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों का निस्तारण हर हाल में गुणवत्तापूर्ण हो। गलत निस्तारण पाए जाने पर चाहे पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारी हों अथवा राजस्व विभाग के दोनों के खिलाफ कार्यवाही होगी। डीआईजी श्री राय ने समाधान दिवस रजिस्टर में दर्ज निस्तारित शिकायतों के फरियादियों को फोन कर उनसे निस्तारण के बारे में पूछा। लम्बित शिकायतों के बारे में आयुक्त ने सख्त निर्देश दिए कि समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतें जो भी लम्बित हैं उनका निस्तारण एक पक्ष के अन्दर हर हाल में हो जाना चाहिए। उन्होने निर्देश दिए कि भूमि विवाद के मामलों में दोनों पक्षों को थाने बुलाकर न्यापूर्ण समझौता कराने का प्रयास करें परन्तु यदि कोई भी व्यक्ति दबगंई दिखाए तो उससे सख्ती से निपटें। आयुक्त व डीआईजी ने कहा कि पीडितों के साथ थानों में अच्छा व्यवहार करें तथा उन्हें न्याय देने का काम करें। पुलिस अधीक्षक लल्लन सिंह ने बताया कि समाधान के अवसर पर जनपद के सभी थानों को मिलाकर कुल 93 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से 16 शिकायतों का निस्तारण थाने में ही कर दिया गया, शेष शिकायतों के निस्तारण हेतु सम्बन्धित को निर्देश दिए गए हैं। निर्देश दिए कि कि पुलिस व राजस्व विभाग के कर्मी आपस में समन्वय बनाकर मामलों का निस्तारण करें तो स्थाई निस्तारण भी होगा और निस्तारण में भी आसानी होगी।
इस अवसर पर एसपी लल्लन सिंह, नगर मजिस्ट्रेट सुभाषचन्द्र प्रजापति, कोतवाल नगर अशोक सिंह सहित राजस्व निरीक्षक, लेखपाल तथा फरियादी मौजूद रहे। थानों पर समाधान दिवस का आयोजन एक अच्छी पहल है लेकिन समाधान दिवसों में अधिकतर जमीनों के मामले सामने आते है लेकिन उनका सही समाधान न होने से आम लोगो का मोह भंग हो रहा है ।वही इससे प्रशासन इसे अपनी उपलब्धि मान रही है लेकिन हकीकत में ऐसा नही है ,यह प्रशासन के लिए शर्म की बात है ।यहाँ एक हकीकत यह है कि शासन जितना दबाव डाल रहा कि लोगो को न्याय मिले ,प्रशासन  न्याय न करके और अन्याय कर रहा है ।अगर कोई कुछ कहता है तो उसको जो उत्तर मिलता है कि जाओ योगी जी के पास जाओ ,डीजीपी के पास जाओ घूम कर कागज मेरे पास ही आएगा ।कही पर जाओ ।इस बात से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि योगी व डीजीपी के आदेश को असर नही है केवल आँकड़ो में लोगो को न्याय मिल रहा है ।हकीकत में कुछ और है ।

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