Sunday, September 30, 2018

उत्तरप्रदेश के लखनऊ में सरेराह पुलिस द्वारा की गई युवक की हत्या

  लोकतांत्रिक प्रणाली में नागरिकों को शांति सुरक्षा प्रदान कर अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने के पुलिस विभाग बनाया गया है। सरकारें बदलती हैं या राष्ट्रपति शासन लागू होता है लेकिन वहीं साठसाला सरकारी पुलिस यथावत जैसी की तैसी बनी रहती है और वह कभी नहीं बदलती है। इसके बावजूद पुलिस पर हमेशा सत्ता एवं राजनैतिक दलों के इशारे पर काम करने के आरोप लगते रहते हैं। इतना ही नहीं हमारी मित्र पुलिस कभी कभी हमारी दुश्मन जैसी बन जाती है। सभी जानते हैं कि कभी पूरा समुदाय एक जैसी मानसिकता एवं कार्यशैली का नही होता है और उसमें भी तरह तरह अच्छे बुरे दोनों कार्यशैली एवं मानसिकता के लोग रहते हैं।यूपी पुलिस महाराष्ट्र पुलिस की तरह एन्काउंटर स्पेशलिस्ट मानी जाती है और समय समय पर उसने अभूतपूर्व सफलताएँ प्राप्त कर विभाग को गौरान्वित करती रहती है।साथ ही समय समय पर उस पर अन्याय मनमानी एवं मुठभेड़ के नाम पर बेगुनाहों की हत्या करने के आरोप लगते रहे हैं। इधर योगीजी की सरकार ने अपराधियों के सफाये के अपनी पुलिस को अपराधियों को खुलेबाजार गोली मार देने की छूट दे रखी है जिससे वह बेलगाम एवं क्रूर निर्दयी होती जा रही है। कल प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरेआम सिपाही द्वारा एक बेगुनाह  बाइक सवार को गोली मार दिया गया। इस घटना को लेकर जहाँ गोली लगने बेसहारा हुये परिवार के लोग पुलिस एवं प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे है वहीं इस घटना के आरोपी पतिपत्नी दो सिपाही भी पुलिस पर फरियाद सुनकर रिपोर्ट न दर्ज कर मनमानी एवं अन्याय करने का दोष मढ़ रहे हैं। घटना के बाद राजनैतिक सरगर्मी तेज हो गई है तथा विपक्षी दलों के नेता इस घटना को लेकर सरकार को घेरने लगे हैं और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर गर्मागरम बहसें छिड़ गई हैं। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगीजी को खुद मीडिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि घटना एन्काउंटर नहीं है बल्कि हत्या की है इसलिये रिपोर्ट लिखकर दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।इस सफाई का मतलब है कि पुलिस इस हत्याकांड को मुठभेड़ का रंग देने का प्रयास कर रही थी।घटना के बाद से ही दोनों पति पत्नी सिपाही बचाव में गिरगिट की तरह रंग बदल जेल जाने से पहले तरह तरह की कहानियां गढकर मीडिया को भ्रमित करते रहे जिससे साफ लगता है कि यूपी पुलिस की खाकी पर एक और बेगुनाह की हत्या का कलंक लग गया है। अपराधियों को गोली मारने की छूट का मतलब रास्ता चलते गोली मारकर हत्या करना नहीं है।इस घटना में मुख्यमंत्री हत्या के शिकार परिवार को ढांढस बधाने भले ही उसके घर न गये हो लेकिन घटना के बाद उनकी सक्रियता के चलते हत्या के आरोपी दोनों सिपाहियों को चट्टपट्ट गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है और उन्होंने साफ कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो घटना की सीबीआई जाँच भी कराई जायेगी।इतना ही नहीं बल्कि दोनों सिपाहियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।यहाँ पर सवाल जेल भेज देने या सीबीआई जाँच कराने या बर्खास्तगी का नहीं है बल्कि सवाल यह है कि आखिर उस परिवार का क्या होगा जिसका पालनहार भरी जवानी में बेगुनाह पुलिस की मनमानी का शिकार होकर इस दुनिया से चला गया है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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