Tuesday, September 4, 2018

राजस्थान में अयोध्या दास महराज कर रहे है लघु रुद्र यज्ञ

मंगलवार 4 सितम्बर को निम्बोड़ा गाँव के लम्बोदर नाड़ी के निकट स्थित व्यास फार्म हाउस पर सन्त श्री अयोध्यादास जी महाराज की 43 दिवसीय भगवान शिव की कष्ट आराधना का उद्यापन होगा। इस दौरान प्रातःकाल में लघुरुद्र यज्ञ का आयोजन भगवान शिव की पूजा अर्चना का कार्यक्रम भी होगा। इस मौके समस्त निम्बोड़ा ग्रामवासी भी उद्यापन के अवसर पर होने वाले पूजन कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस मौके निम्बोड़ा के पूर्व जागीरदार पृथ्वीराज जी व्यास की ओर से प्रसादी का आयोजन भी होगा। इससे पूर्व सोमवार की रात्रि में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी अयोध्या पूरी में गाँव के प्रबुद्धजनों की मौजूदगी में महिलाओं और कन्याओं द्वारा मनाया जाएगा। जन्माष्टमी कार्यक्रम के तहत रात्रि में भक्ति संध्या भी होगी।
आपको ज्ञात रहे कि निकटवर्ती निम्बोड़ा गांव में व्यास फार्म हाऊस पर गत 26 जुलाई से अयोध्यादास जी महाराज शिव कष्ट आराधना कर रहे है। इससे पूर्व आप सभी को ज्ञात होगा कि मार्च माह में इसी फार्म हाऊस पर योगी संत अयोध्यादास जी महाराज ने कष्ट अनुष्ठान नवरात्रि व नाभि कुम्भ कलश स्थापना के साथ लगातार नौ दिनों तक अपनी साधना की थी। इस साधना के बाद बैशाख माह में महाराज जी ने भगवान विष्णु की आराधना भी कष्टपूर्वक की थी। जिसमें महाराज दिन में 11:45 बजे से 3:40 बजे तक कड़ी धूप में भगवान विष्णु की उपासना पँचधूणी यज्ञ के माध्यम से करते थे। इस दौरान भी महाराज जी निराहार रहे थे। इन दोनों मौकों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने महाराज जी के दर्शन कर अपने मनोरथों की प्राप्ति की थी।

*महाराज जी इन दिनों कर रहे है भगवान शिव की कष्ट आराधना व लघुरूद्र यज्ञ*
इसी कृषि फार्म पर अयोध्यादास जी महाराज गत 26 जुलाई आषाढ शुक्ल 14 से भगवान शिव की आराधना कष्टपूर्वक कर अपने भक्तों के दु:खों को दूर करने की प्रार्थना कर रहे है। महाराज अपनी आराधना के तहत पण्डितों की निश्रा में प्रात:काल 7 बजे से 11 बजे तक लघुरूद्र यज्ञ करते है। उसके बाद 11 बजे से 2:30 बजे तक अपने गुरू महाराज की पूजा अर्चना व विभिन्न देवी देवताओं की पूजा अर्चना करते है। 2:30 बजे से 4:00 बजे तक महाराज जी अपनी कुटिया में मनन चिंतन करते है। दिन में 4 बजे से सायं 7 बजे तक अपने भक्तों से मिलते है उनसे बातचित करते है। सायं 7 बजे से लेकर प्रात: 7 बजे तक वे पूर्ण मौन व्रत में व खड़े रहते है। पूरी रात्रि में अपने मुंह से किसी प्रकार की बातचित करना और किसी जगह पर बैठना, सोना या खड़े रहने के लिए सहारा लेना महाराज जी के लिए निषिद्ध है। इस दौरान महाराज जी अपनी तपस्या स्थली पर स्थित शिव के जागृत धूणे के चारों और रात भर में 1100 परिक्रमा लगाते है। यह क्रम गत 40 दिनों से नियमित रूप से चलता आ रहा है। इस आराधना का मंगलवार को उद्यापन होने जा रहा है। महाराज जी के द्वारा की जा रही आराधना में पंडित नारायणलाल दवे का सहयोग सदैव मिलता रहा। पूरी आराधना में नारायण लाल ब्राह्मण पद पर विरजित होकर महाराज की आराधना में पूजा अर्चना का कार्य देखते रहे।

*अयोध्यादास जी महाराज जी का संक्षिप्त परिचय*
महाराज का जन्म गुजरात के गिर क्षेत्र के तुलसी श्याम धाम के निकटवर्ती निटली गाँव मे माता श्रीमती कमला बेन की कोख से श्री लाखा भाई के घर हुआ था। आप अपने माता पिता की तीसरी सन्तान थे। आपका बचपन का नाम अश्विन कुमार था। सैकड़ों हजारों बीघा जमीन के मालिक इस परिवार में पले बढ़े अयोध्यादास जी महाराज का बचपन से झुकाव भक्ति की ओर रहा। युवावस्था में ही उन्होंने सांसारिक मोहमाया को त्याग कर अध्यात्म के मार्ग का अनुसरण कर लिया। तब से वे विभिन्न गुरू महाराजों के सम्पर्क में रहे और उनकी सेवा सुश्रुषा कर उनका आशीर्वाद लिया। महाराज जी ने विभिन्न सम्प्रदायों को करीब से भी देखा है। महाराज वर्तमान में वैष्णवी सम्प्रदाय को आलोकित कर रहे है।

*महाराज जी की सेवा में रहते है ये भक्तगण*
महाराज जी की तपस्या के दौरान एडवोकेट निरंजन व्यास, पण्डित रमेश दवे, पण्डित नारायण दवे, जसाराम मेघवाल, मूलाराम देवासी, भोलाराम देवासी, बाबूलाल मेघवाल, मंछाराम पुरोहित, छेलाराम पुरोहित, गणपतसिंह धनवाड़ा व ओमप्रकाश दर्जी सहित कई लोग सेवा में मौजूद रहते है।

पृथ्वीराज गोयल पत्रकार,

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