Saturday, September 22, 2018

इमाम हुसैन और उनके साथी शांति स्थापित करने के लिए हुए थे शहीद

मार्च को सुबह मोहर्रम की 10 तारीख को आशुरे का जुलूस मातम करता हुआ हुसैन की शहादत का ऐलान करता हुआ स्थानीय सिंधीपुरा गया से सुबह 8 बजे  निकल कर इमामिया मस्जिद में 12 बजे वापस आया ।
मातम करते हुए लबैक या हुसैन की सदा को बुलंद कर रहे थे।शिया आशना अशरी अंजुमने इमामिया बुरहानपुर के इफ़्तेख़ार अली (जानी पहलवान) ने बताया कि आज से 1400 साल पहले यज़ीद ने धोके से इमाम हुसैन और उनके साथियों जिनमे छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे को भूका प्यास रख कर शहीद कर दिया था।जानी पहलवान ने बताया कि आज जो यज़ीद की नस्ल बाकी है वही आतंकवादी है इमाम हुसैन की कुर्बानियां इंसानियत को बचाने,सच्चाई पर चलने के साथ साथ दुनियाभर में शांति और भाईचारे को स्थापित करने के लिए थी। इमाम हुसैन ने सच्चाई के अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया आज सारी दुनिया मे उनको याद करके मातम के जरिये उनका पैगाम सुनाया जाता है।  उनकी बेमिसाल कुर्बानियां सारे संसार को बताई जाती है क्या हिंदू, क्या मुसलमान, क्या सिख सारे संसार के लोग इस गम में शामिल होते है जुलूस का संचालन भी इफ़्तेख़ार अली (जानी पहलवान) ने बड़े ही अनुशाषित तरीक़े से किया।

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