Saturday, September 1, 2018

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट से निकला नोटबन्दी का जिन्न

🇳🇪सुप्रभात-सम्पादकीय🇳🇪
केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी नोटबंदी योजना धीरे धीरे सरकार के गले की हड्डी बनती जा रहा है।नोटबंदी योजना लागू हुये भले ही दो साल बीत रहे हो लेकिन नोटबंदी का जिन्न अभी भी जिंदा है और रिजर्व बैंक की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट आते ही बोतल से बाहर निकलकर सरकार का सिरदर्द बढ़ाने लगा है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट आते ही नोटबंदी का पुराना घाव एक फिर ताजा होकर दुखदाई हो गया है और विपक्षी दलों को एक बार फिर नोटबंदी पर सरकार की घेराबंदी करके का मौका मिल गया है।रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के समय देश में पाँच सौ एवं एक हजार के कुल मिलाकर 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपये के नोट प्रचलन में थे। सरकार को उम्मीद थी कि नोटबंदी योजना से तमाम कालाधन सरकारी खजाने में आ जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका और रातोंरात अधिकांश कालाधन बैंकों की  ले दे कर खाऊँ कमाऊँ नीति का शिकार हो गया।रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद 15 लाख 31 हजार करोड़ के नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गये है और सिर्फ करीब 10 हजार करोड़ रूपये ही वापस नही आये हैं जबकि नोटबंदी के समय कम से कम दो तीन लाख करोड़ का फायदा राजकीय कोष में होने की आशा थी।यही सोचकर देश की 60 फीसदी जनता तमाम दिक्कतों के बावजूद नोटबंदी योजना का समर्थन कर रही थी। उसे उम्मीद थी कि हरामखोर कमीशनखोर जमाखोर सड़क पर आ जायेंगे और जमाराशि रद्दी होकर जलानी या फेंकनी पड़ेगी लेकिन जब ऐसा कुछ नहीं हुआ तो लोगों को लगा कि समर्थन देकर धोखा हो गया है। 15 लाख 41 हजार करोड़ में दस हजार करोड़ वापस न आना कोई मायने नहीं रखता है और इसे योजना की सफलता का प्रतीक भी नहीं माना जा सकता है।नोटबंदी से न तो सरकार को फायदा हुआ और न ही आमजनता की मुराद ही पूरी हो सकी। नोटबंदी से फायदे के रूप में बैंकिंग व्यवस्था भले ही मोटी हो गई हो लेकिन बैकिंग प्रणाली में बदलाव करके ग्राहक को भगवान से गरजू बनाकर मनमानी कटौतियों मनमाने नियमों का शिकार जरूर बना दिया गया।आशा के अनुरूप नोटबंदी से न तो नक्सली आंदोलन पर कोई असर पड़ा और न ही आतंंकियों पर कोई प्रभाव पड़ा बल्कि उनके नोट सबसे पहले बदल गये।यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार की नीतियों एवं बैंकिंग प्रणाली के चलते नोटबंदी सरकार के लिये हेडक बनती जा रही है हाँलाकि सरकार योजना को फ्लाप नहीं बल्कि सफल मानकर अपनी पीठ अपने हाथ से थपथपाने लगी है।लगभग सभी नोटों की वापसी के बाद नोटबंदी योजना पर छिड़ी बहस एवं सरकार से पूंछे जा रहे सवालों के बीच केन्द्रीय वित्त मंत्री ने योजना से हुये फायदों को बताते हुये कहा है कि नोटबंदी से नकदी के रूप में घरेलू बचत उच्च स्तर पर पहुंच गया है और नोटबंदी के दौरान मतलब से ज्यादा रूपये जमा करने वाले18 लाख लोगों के खिलाफ जांच चल रही है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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