Monday, September 10, 2018

सरकार के अर्थव्यवस्था मजबूती अभियान और बढ़ती मंहगाई पर भारत बन्द का एलान

आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनैतिक सरगर्मियां तेज होने लगी है और सभी दलों को जनता का दुख दर्द याद आने एवं हमदर्दी बढ़ने लगी है। आगामी चुनाव के दृष्टिगत इलेक्ट्रॉनिक चैनलों पर बहसों का दौर शुरू हो गया है और पूरा विपक्ष मोदी सरकार के प्रति हमलावर होकर उन्हें जनता की अदालत के कटघरे में खड़ा करने लगा है।यह सही है कि अगर देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करके दुनिया में धाक जमानी है तो देशवासियों को आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा क्योंकि सरकारी खजाना तभी भरेगा जब आमलोगों की सुविधाओं रियायतों में तमाम कटौती करके राजस्व में वृद्धि होगी। मोदी सरकार शुरू से अर्थव्यवस्था मजबूत करने का प्रयास कर रही है लेकिन दुख इस बात का है कि इसके लिये सबसे ज्यादा आमजनता को शिकार बनाया जा रहा है। तमाम अनुदान देने की परम्परा को धीरे धीरे समाप्त किया जा रहा है और लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील की जा रही है तथा पेंशन नीति बदल दी गयी है।जीएसटी लगाकर छोटे व्यवसाइयों से भी टैक्स देने पर मजबूर कर दिया गया है और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के नाम पर  नोटबंदी योजना चलाई गयी जिसका धुँआ अभी भी उठ रहा है।इस योजना के बाद अर्थव्यवस्था मजबूत हुयी हो या न हुयी हो लेकिन नये नियमों की बदौलत बैंक मनमानी कटौती हेराफेरी करके जरूर मालामाल हो गये और ग्राहक को भगवान से गरजी बेवश बना दिया गया। अर्थव्यवस्था सुधार के नाम पर सरकार ने डीजल पेट्रोल मिट्टी तेल गैस जैसी जनमानस से जुड़ी चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया जो आज विपक्ष के लिये वरदान साबित हो रहा है। आज डीजल पेट्रोल के आसमान छूते मूल्यों को लेकर धरना प्रदर्शन आंदोलन के बाद विपक्षी दलों द्वारा भारतबंद का आवाह्वान किया गया है।तारीफ की बात तो यह है कि सरकार की हर नीतियों पर विपक्ष हमलावर होता है लेकिन सरकार के एससी एसटी एक्ट विधेयक का कोई विरोध नही किया।लगता है कि जैसे सवर्ण अछूत हो गया है और उसकी जरूरत किसी भी दल को नहीं रह गई है। एससी एसटी एक्ट के समर्थन एवं विरोध दोनों में भारतबंद का आवाह्वान करने से समाजिक समरसता छिन्न भिन्न होने के कगार पर पहुंचती जा रही है। भारतबंद का मतलब देश बंद होता है जो अक्सर राष्ट्रीय स्तर की समस्या को लेकर होता है और इसमें प्रायः विपक्षी दल शामिल होते हैं क्योंकि इस तरह के आयोजनों से विपक्षी राजनैतिक एकता एवं मजबूती को बल मिलता है। डीजल पेट्रोल के मूल्यों में वृद्धि के खिलाफ विपक्षी दलों के भारतबंद के आवाह्वान के दौरान शांति बनाये रखना जरुरी होता है क्योंकि इधर बंद के दौरान जोर-जबरदस्ती, आगजनी, हिंसक प्रदर्शन, तोड़फोड़ आदि करके विरोध जताना एक फैशन बनता जा है। लोकतंत्र में अहिंसा को परमो धर्मा कहा गया है और हिंसक आंदोलन को कोई स्थान नहीं दिया गया है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग /नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं ।।  ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमःशिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।

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