Sunday, September 2, 2018

बिजली आपूर्ति के लिए किसानों की भूमि का प्रयोग उनका उपयोग या सहयोग

व्यवसाय में कोई कार्य मुफ्त में नहीं होता और उसमें उपयोग होने की वाली हर चींज का पैसा देना पड़ता है।चाहे दूकान हो चाहे कल कारखाने हो सभी को जमीन भवन कच्चे माल के साथ उस व्यवसाय से जुड़े हर सामान की खरीददारी करनी पड़ती है या फिर किराया देना पड़ता है।बिजली की आपूर्ति देकर पैसा कमाना भी एक व्यवसाय है क्योंकि विभाग इस धंधे से कमाई यानी व्यवसाय करता है।बिजली व्यवसाय के लिये लाइन बिछाई जाती है और पोल गाड़कर उस पर लाइन खींचकर अपनी सेवाओं को ग्राहक तक पहुंचाया जाता है।यह लाइनें सरकारी गैरसरकारी एवं कृषि भूमि पर सिंगल या डबल पोल लगाकर बनाई जाती हैं। खेत के बीच से लाइन खींचने से हमेशा फसल जलने का खतरा बना रहता है और हर साल करोड़ों की फसल इन बिजली लाइनों की चिंनगारियो से जलकर नष्ट हो जाती है।हांलाकि बिजली विभाग इन लाइनों से होने वाली फसलों की क्षतिपूर्ति मुआवजा अदा करता है। इसी तरह जिस खेत में बिजली का पोल गाड़ दिया जाता है उसके आसपास की भूमि कृषि लायक नहीं रह जाती है।बिजली विभाग किसान की जमीन का इस्तेमाल करके अपना व्यवसाय तो करता है लेकिन बदले में जमीन का किराया नहीं देता है।किसान इधर काफी दिनों स अपनीे भूमि इस्तेमाल करने के बदले में मुफ्त बिजली देने तथा जमीन इस्तेमाल करने के बदले मुआवजे के रूप में पैसा देने की भी माँग काफी दिनों से की जा रही है। दो दिन पहले सरकार ने पहली बार इस दिशा में पहल करते हुये आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार ने किसानों को खुश करने के लिये बिजली खंभा गाड़ने के बदले मुआवजा देने की घोषणा की है।प्रदेश के बिजली मंत्री द्वारा किसानों की भूमि का व्यवसायिक इस्तेमाल करने पर फसल क्षति मुआवजा के साथ साथ जमीन का किराया देने की घोषणा विधानसभा में बसपा नेता लालजी टंडन के सवाल के जबाब में की गई है।बिजली मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इस सम्बंध में जल्दी ही आदेश जारी कर दिया जायेगा। सरकार ने माना है कि खेत में बिजली खंभा गड़ने से एक सौ बाइस वर्ग मीटर भूमि प्रभावित होती है और इसमें से पच्चासी फीसदी भूमि का मुआवजा किसान को दिया जायेगा। सरकार की यह घोषणा किसानों को एक बड़ी राहत देने वाली है बशर्ते इसका क्रियान्वन धरातल पर साकार रूप ले सके। सरकार की यह घोषणा निश्चित तौर पर किसानों की हितैषी है और इसके लिये सरकार बधाई की पात्र है। इस देश में किसान इकलौता ऐसा जो घाटे का व्यवसाय खेती के रूप में करता है और कभी आँधी तूफान ओला तो कभी अतिवृष्टि से तबाह होकर दाने दाने का मोहताज बन जाता है।खेत में पोल गाड़कर बिजली व्यवसाय करने के बदले भूमि का किराया अथवा मुआवजा किसानों को बहुत पहले मिल जाना चाहिए था लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि किसानों के हमदर्द तो सभी राजनैतिक दल बनते हैं लेकिन किसी ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। सरकार द्वारा विधानसभा में की घोषणा में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार की इस इस घोषणा के तहत आजतक जितने खेतों में बिजली खंभे गाड़े गये हैं वह सभी आ जायेगें या फिर जो अब गाड़े जायेगे उनको ही लाभ मिल पायेगा? सरकार की घोषणा घोषणा ही रह जायेगी या फिर साकार स्वरूप धारण कर लेगी यह तो भविष्य ही तय करेगा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं ।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -----/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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