Saturday, September 29, 2018

भारतीय संस्क्रति और परम्पराएं और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हर देश की एक विचारधारा और संस्कृति होती है तथा कार्यपालिका हो चाहे न्यायपालिका हो या फिर चाहे विधायिका हो सभी उसी विचाधारा संस्कृति एवं संवैधानिक दायरे में राष्ट्र के संचालन में अपनी अपनी भूमिकाएं निभाते हैं।इधर हमारे धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के कारण देश में विभिन्न विचारधाराओं यहाँ तक की वामपंथी एवं कट्टरपंथी विचारधारा के भी लोग महत्वपूर्ण स्थानों पर विराजमान हैं। अबतक न्यायपालिका जो भी फैसले सुनाती थी वह देश की संस्कृति मान्यताओं एवं परम्पराओं को ध्यान में रखकर करती थी लेकिन इधर उसके कुछ फैसले ऐसे आये हैं जिन्हें लेकर टीका टिप्पणी होने लगी है और लोग उसे हिन्दुस्तानी कल्चर के विपरीत मानते हैं। इधर अभी तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जो भारतीय संस्कृति एवं मान्यताओं के विपरीत माना जा रहा है। इस फैसले में नारी को देवी स्वरूपा से एक बदचलन बनने की छूट दे दी गयी जो भारतीय सभ्यता मान्यता एवं संस्कृति के विपरीत है। फैसले को लेकर पूरे देश में  गर्मागर्म एवं चर्चाएं हो रही हैं और सबसे ज्यादा आक्रोश उन महिलाओं को है जो अपनी संस्कृति के अनुरूप अपने पति को परमेश्वर मानकर प्रतिव्रता जीवन व्यतीत कर रही हैं। इस देश की संस्कृति एवं मान्यताएं पत्नी के पराये पुरूष अथवा दोस्त से शारीरक सम्बंध बनाने की छूट नहीं देता है तथा अधिकांश महिलाएं अपने इस पतिधर्म का पालन करती है और पहले पति को खाना खिलाने के बाद ही खुद खाती है।इतना ही नहीं हमेशा सदा सुहागिन रहने के लिये तरह तरह की पूजा पाठ और मनौती मांगते हुये पति को गोदी में अंतिम सांस लेने कामना करती रहती है। इस अभूतपूर्व फैसले में सुप्रीम कोर्ट की खंड पीठ ने पति के होते हुये पराये पुरूष के साथ सहवास करने को वैध मान लिया है और विरोध करने वाला दंड का भागीदार हो.सकता है।देश की संस्कृति के विपरीत इस तरह के निर्णय देने वाले न्यायाधीशों को देश की परम्पराओं मान्यताओं एवं आस्थाओं को ध्यान में रखकर निर्णय देना उचित था।समाजिक कुकृत्यों को बढ़ावा देने की इजाजत संविधान नही देता है। न्यायाधीश हो चाहे न्यायपालिका हो उसे ऐसे संवेदनशील मामलों में फैसला देते समय सतर्क रहने की जरुरत है। यह फैसला पुनर्विचार करने योग्य है और इस पर पुनर्विचार करना अदालत का धर्म बनता है।  धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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