Wednesday, October 3, 2018

अन्नदाता पर आंसू गोले और लाठियां चलवाना मोदी सरकार की नाकामी का सबूत

नई दिल्ली 2 अक्टूबर को एक तरफ देश भारत की दो महान विभूतियों को नमन कर रहा था तो वहीं दूसरी तरफ सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार किसानों पर लाठी और गोले चलवा रही है समझ मे यह नही आ रहा कि क्या मोदी राज में अपने हकों की आवाज उठाना भी गुनाह है या केंद्र में बैठी मोदी सरकार देश को तानाशाही की ओर धकेल रही है अब सवाल यह बनता है कि अन्नदाता के इन हालातों का जिम्मेदार कौन है
सरकार या प्रशासन या स्वयं हम लोग शायद यह भूल रहे है कि हमे  अगर एक दिन भी अन्न न मिले तो हम तड़प जाते है पर क्या किसी ने अन्नदाताओं की तड़प को कभी समझा कभी इनके हित के लिए कुछ किया ? अन्ना हज़ारे आंदोलन मे हज़ारों लोग एकत्र हुए तो क्या हम किसान आंदोलन में एकत्र होकर इनका साथ नही दे सकते जो हमारे आपके बच्चों का भी भरण पोषण करते है। क्या कसूर है इन बेबस मेहनती अन्नदाताओं का और क्या कारण है कि बुजुर्गों को भी सरकार के खिलाफ लाठी उठानी पड़ी जबकि उनको अपना हक मांगना केंद्र सरकार को रास नही आया और उन्हें बेदर्दों की तरह से पीटा जा रहा है क्या सरकार और प्रशासन की मानवता खत्म हो गयी सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तानियों पर करनी थी या अपने ही अन्नदाताओं पर ।

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