Sunday, October 14, 2018

दिल्ली की हवाओं में जहर घोलते पड़ोसी राज्य

नई दिल्ली : पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में किसानों ने धान की कटाई के बाद पराली जलाना शुरु कर दिया है। जिस कारण दिल्ली की हवाओं में जहर घुल रहा है। राजधानी मेंं गहराती प्रदूषण की समस्या को देखते हुए उपराज्यपाल अनिल बैजल ने सभी संबंधित एजेंसियों से धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन दिल्ली सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद पड़ोसी राज्यों में धड़ल्ले से पराली जलायी जा रही है।प्रदूषण की समस्या पर बैजल ने ऐपका अध्यक्ष द्वारा बुलाई बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन व ऐपका अध्यक्ष भूरेलाल सहित संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान आनंद विहार आईएसबीटी क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों से संबंधित सुधार कार्य के प्रगति की समीक्षा की गई, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार की जा सके वहीं दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने के चित्र जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाले रास्ते के किनारे भी पराली जलायी जा रही है। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पंजाब,हरियाणा,राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने का काम शुरू होते ही राजधानी की आबोहवा पर इसका असर पड़ रहा है। इससे दिल्ली में वायु प्रदूषणखतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। इससे यह भी साफ  हो गया है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व राजस्थान ने पराली जलाने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लाख आग्रह के बावजूद केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक तक नहीं बुलाई है। गंभीर वायु प्रदूषण का सीधा असर बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं व रोगियों पर पड़ रहा है। प्रदूषण जब बहुत ज्यादा होगा तो चेतावनी जारी की जाएगी। इससे संबंधित प्रणाली की शुरुआत सोमवार को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन करेंगे। इस प्रणाली को मौसम विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) व मौसम विज्ञान संबंधी कई शोध संस्थानों द्वारा विकसित किया गया है। इसका संचालन विभाग की राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान इकाई द्वारा किया जाएगा। प्रणाली की मदद से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की क्षेत्रवार स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।
प्रदूषण फैलाने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई
ग्रीन पीस इंडिया का कहना है कि सरकार राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) को अधिसूचित करने में देरी कर रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ग्रीनपीस इंडिया के सुनील दहिया ने कहा कि सरकार लगातार पर्यावरण से जुड़े कानून कमजोर करके और प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों के हित में नीतियों में बदलाव कर रही है। वायु प्रदूषण की खराब स्थिति पर सवाल उठाने पर राज्य और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर उंगली उठाने लगते हैं। पर्यावरण मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक इकाइयों और थर्मल पावर प्लांट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर थर्मल पावर प्लांट के लिए जारी उत्सर्जन मानकों को लागू करने की समय सीमा को पांच साल और बढ़ाने की अनुमति दे दी।दिल्ली नगर निगम भी प्रदूषण से बचाव के लिए हरकत में आ गए हैं। दक्षिणी और पूर्वी निगम के आयुक्त डॉ. पुनीत गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह प्रदूषण से बचाव के लिए तेजी से काम करें। निगम ने आईटीपीओ की प्रगति मैदान परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों और दिल्ली मेट्रो रेल निगम के कार्यों के दौरान प्रदूषण रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के लिए भी कहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना (एसएपीसीसी) में आप सरकार द्वारा किये जाने वाले संशोधनों के बारे में समूची जानकारी के लिए दिल्ली में पर्यावरण विभाग के अधिकारी को तलब किया है। न्यायमूॢत राघुवेंद्र एस राठौड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने विभाग के उपसचिव या संबंधित वरिष्ठ वैज्ञानिक को 25 अक्तूबर को पेश होने का निर्देश दिया। पीठ में विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान सिंह गरबयाल भी थे। पीठ ने कहा कि सितम्बर 2016 में एक मसौदा कार्य योजना तैयार की गई थी। हालांकि, दिल्ली सरकार के वकील कार्ययोजना में किये जाने वाले संशोधनों के बारे में कोई अद्यतन जानकारी नहीं दे पाए। पीठ ने कहा कि इसलिए, राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित अद्यतन जानकारी से हमें अवगत कराया जाए। एनजीटी में अगली कार्यवाही के दौरान दिल्ली के पर्यावरण विभाग के उप सचिव/ संबंधित वरिष्ठ वैज्ञानिक को संपूर्ण सूचना और जलवायु परिवर्तन की कार्ययोजना में प्रस्तावित संशोधनों के बारे में विवरण के साथ आने का निर्देश दिया जाता है। यह आदेश तब दिया गया जब पर्यावरण विभाग ने अधिकरण को सूचित किया कि उसने एसएपीसीसी में कुछ संशोधन करने का फैसला किया है।  राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार सुबह तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई और इस दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस नीचे 17.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वीरवार को शहर का न्यूनतम तापमान 24.5 और अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में गिरावट आई है और शनिवार से एक बार फिर तापमान में बढ़ोतरी होने लगेगी। सफदरजंग वेधशालामें न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे आद्रता का स्तर 69 प्रतिशत दर्ज किया गया। अन्य मौसम केंद्रों जैसे आयानगर में (16 डिग्री सेल्सियस), रिज में (16.4 डिग्री सेल्सियस), लोधी रोड में (18 डिग्री सेल्सियस) और पालम में (18.5 डिग्री सेल्सियस) न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। वीरवार को शहर के कुछ हिस्सों में तेज धूल भरी आंधी आई थी जिसके कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमश: 18 और 33 डिग्री सेल्सियस के करीब बने रहने का अनुमान है। 

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