Wednesday, October 10, 2018

क्राइम रोकने में अशफ़ल दिखी पुलिस कार्य शैली पर उठे सवाल

गोन्डा जनपद में केवल कागजो पर क्राइम कंट्रोल दिखाई दे रहा है जबकि हकीकत कुछ और है ।गोन्डा जनपद में पुलिस का अपराधियो पर अंकुश नही है और न ही अपराधी पुलिस से नही डरते है ।इसमें केवल अपराधी का दोष नही उसका तो काम ही अपराध करना लेकिन पुलिस का काम अपराध को रोकना ।लेकिन यहाँ पुलिस की कार्यशैली इसके विपरीत है उसका काम क्राइम होने दो तब देखेंगे ।पुलिस के पास यदि कोई यह फरियाद लेकर जाता है की विपक्षी/दबंगो से उसके जान माल का खतरा है तो पुलिस उन दबंगो के खिलाफ कार्यवाही न करके प्राथी को ही परेशान करती है और कहती मैं उधर से राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है हम क्या कर सकते है जब कोई घटना होगी तब जो कारवाही करना होगा की जाएगी इस तरह के बयान बाजी से अपराधियो का हौसला नही बुलंद होगा तो क्या होगा फिर वही जब कोई घटना घट जाती है तब भागा दौड़ मचाएंगे ,अगर वही पहले ही यदि कारवाही कर दी जाय तो अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है ।ऐसी घटनाएं आये दिन होती रहती है उसके बाद पुलिस सबक नही ले रही है ।जिसका जीता जाता उदाहरण अभी हाल में ही समाजसेवी पत्रकार को अपनी जान गवा कर भुगतना पड़ा ,अब पुलिस की भागम दौड़ चालू है ।अब कुछ हो जाय मृतक को कोई वापस नही ला सकता है ।ऐसा ही एक प्रकरण इटियाथोक निवासी समाजसेवी पत्रकार पवन कुमार द्विवेदी के साथ पुलिस का रवैया चल रहा है ।जमीन व समाचार प्रकासन को लेकर कुछ भूमाफिया लोगो के निशाने पर है जिसकी लिखित सूचना इटियाथोक पुलिस ,एसपी ,डीएम ,सीएम काल सेंटर पर जानकारी देने का बाद भी पत्रकार व उसके परिवार को कोई सुरक्षा ना दिया गया और उल्टे ही उसको ही गलत बताकर पल्ला झाड़ लिया गया ।पुलिस की तरफ से ही दबाव बनाया जा रहा है कि समझौता कर लो जबकि पूरा प्रकरण न्यायालय में चल रहा है ।अब ऐसे में पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये से दबंगो का हौसले बुलंद है ।वही इटियाथोक पुलिस अपने उच्चाधिकारियो को भी सही बात न बता कर गलत रिपोर्ट देती है जिसके कारण उनका भी नाम बदनाम होता है ।ऐसे पुलिस वालों के कारण ही क्राइम रेट घटने के बावजूद बढ़ रहा है ।जब पुलिस समाजसेवी पत्रकारो के मान सम्मान की रक्षा नही कर सकती उनके जान माल की सुरक्षा नही कर सकती है तो क्या कर सकती है ।

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