Wednesday, October 24, 2018

पत्रकारिता के भेष में पत्रकारिता का करते पोस्मार्टम

गोंडा।   जनपद में  स्थित चारो  तहसीलो मे सरकारी कर्मचारी पत्रकारिता का लबादा ओडकर विभागीय अधिकारियों पर धौस जमा रहे हैं। सबसे खराब स्थित शिक्षा विभाग की हैं परिषदीय विद्मालयो मे तैनात अध्यापक पत्रकारिता की चादर ओढकर न तो समय से विद्मालय जाते है न ही पठन पाठन मे रुचि दिखाते हैं। लेट लतीफी व अपने दायित्वों से बिमुख पत्रकारिता के नाम पर सदाचार की बात करने वाले सरकारी नौकर/पत्रकार कदाचार मे लिप्त हैं। विभागीय उच्चाधिकारी सबकुछ जानने के बाद भी इनके विरुद्ब कार्यवाही से डरते हैं। जिसके पीछे लोगो का कहना है कि शिक्षा विभाग मे कार्यरत कई आध्यापक पत्रकारिता की आड मे नाजायज धंधो मे संलिप्त होकर समाज के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता की छवि को धुमिल कर रहे हैं। जब सरकार इन्हे शिक्षक के रुप मे तैनाती दी है और माह मे मोटा बेतन उठा रहे है तो इन्हे पत्रकारिता के क्षेत्र मे कार्य करने की क्या आवश्यक्ता हैं जबकि पत्रकारिता 24 घंटे का कार्य हैं। कभी भी घटना दुर्घटना पर पत्रकारिता का कार्य करने वालो को पहुचना व मामले की निष्पक्ष कबरेज करना पत्रकारिता क्षेत्र मे आता हैं और सच्चाई यह है कि पत्रकारिता का चादर ओढे तथाकथित मास्टर खुद को परिचय के रुप मे अध्यापक बताने की जगह पत्रकार बताना पसंद करते हैं। पत्रकारिता की आड मे बच्चों का भविष्य चौपट कर रहे हैं। पठन पाठन मे इनका कोई सरोकार नही रह गया है ऐसे मे जिले मे तथाकथित शिक्षक/पत्रकार शिक्षा जगत व पत्रकारिता दोनो का छवि धुमिल कर रहे हैं। जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को सरकारी अध्यापक से पत्रकार बने लोगो पर नकेल कसने की आवश्यक्ता हैं। वही कुछ अन्य विभाग के कर्मचारी भी इसमें संलिप्त है ।वही न्यूज पेपर के हेड का कहना है कि हम कौन सा वेतन दे रहे है।उनसे हमे विज्ञापन भी मिलता है ।इस तरह की मानिसकता ही सरकारी कर्मचारी बेलगाम हो गए ।ऐसी मानसिकता को बदलना होगा ।वही शासन व प्रशासन को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए और अपने कर्मचारियो पर लगाम लगाने की जरूरत है । गोंडा से ब्यूरो पवन कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट

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