Monday, November 19, 2018

राजस्थान में कई निर्दलीय बिगाड़ सकते है कांग्रेस बीजेपी के समीकरण

विधान सभा चुनाव के नामांकन प्रक्रिया के 5 दिन बीतने के बाद दर्जनों उम्मीदवारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पेश किया वहीं भाजपा के प्रत्याशी पूराराम चौधरी ने भी छठी बार अपना नामांकन पत्र दाखिल किया हैं, तो  कांग्रेस से 10 साल सत्ता से दूर रहने के बाद एक बार फिर समरजीत सिंह को पार्टी ने मैदान में उतारा है। दोनों ही पार्टी प्रत्याशियों को निर्दलीयों का डर सता रहा है। भाजपा से टिकट की मांग कर रहे रमेश पुरोहित को टिकट नहीं मिलने से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। जातीय समीकरणों को देखते हुए रमेश पुरोहित पिछले 20 वर्षों से भाजपा में अलग-अलग पदों पर रह चुके हैं। वहीं वर्तमान में पंचायत समिति सदस्य भी है । जनता में अच्छी पकड़ होने के नाते भाजपा को इन का डर सता रहा है। तो वही रामलाल सोलंकी पिछले 1 साल से सामाजिक कार्यक्रम एवं समाजसेवी के रूप में उभर कर सामने आए हैं। जो निर्दलीय चुनावी मैदान में है । दोनों ही निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा के वोटों में सेंध कर सकते हैं। इनसे भाजपा कार्यकर्ताओं एवं प्रत्याशी पूराराम चौधरी को भी इनका डर सता रहा है। कहीं निर्दलीय चुनावी समीकरण को बिगाड़ ना दें । वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को भी अपने वोट बैंक में सेंध मारी दिखती नजर आ रही है। पूर्व विधायक प्रत्याशी उम सिंह राठौड़ को टिकट नहीं मिलने से भोमिया राजपूत समाज कांग्रेस पार्टी एवं प्रत्याशी डॉक्टर समरजीत सिंह से नाराज चल रही है। इसके चलते 30000 भोमिया राजपूत समाज के मतदाता कांग्रेस से कटने का डर पार्टी को सता रहा है। समरजीत सिंह को 10 साल सत्ता से दूर रहने के बाद फिर से पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। तो उधर बसपा से कृष्ण कुमार देवासी भी चुनावी मैदान में है जो एससी एसटी के मतदाताओं को प्रभावित करेंगे। यह भी कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो सकता है । इनके अलावा भी एक दर्जन से ऊपर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि विजय श्री का ताज किसके सर पर जाता है। फिलहाल तो दोनों ही पार्टियां निर्दलीयों के डर से अपने समीकरण बिठाने में लगी हुई है। निर्दलीयों ने दोनों ही पार्टियों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

भीनमाल से उत्तम सिंह राव की रिपोर्ट..

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