Sunday, November 11, 2018

किसानों की आमदनी दोगुनी होने में बाधक है मूल्यों की बृद्धि-भोला नाथ

इस देश में हर एक सामान के निर्माता अथवा उत्पादक को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारण करने का अधिकार होता है और सभी अपनी लागत के साथ उसमें मनमाने मुनाफे का अनुपात जोड़कर उसके मूल्यों को तय करके उस पर मूल्य लिख या चिपका देते हैं।आजकल मूल्य निर्धारण करने के मिले अधिकार का हर स्तर पर दुरपयोग हो रहा है तथा मूल्य से भी अधिक मूल्य लिखकर उपभोक्ताओं को ठगने का धंधा जोरों पर चल रहा है।इस देश का एकमात्र किसान ऐसा है जिसे अपने उत्पाद का मूल्य तय करने का अधिकार नहीं है और रातदिन कड़ी मेहनत मशक्कत कर विपरीत परिस्थितियों एवं मौसम में खेती करने वाले की मेहनत एवं उत्पाद का मूल्य का निर्धारण वातानुकूलित कक्ष में बैठकर वह लोग करते हैं जिन्हें खेती का अनुभव तथा गन्ना और पतवार की पहचान तक नहीं होती है। किसानों की बेहतरी के लिये आजादी के बाद से ही तरह तरह के कार्यक्रम जरूर चलाये जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी किसानों का बेमौत मरना जारी है।इधर सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए विशेष अभियान चला रही है और इस दिशा में वह अपने ढंग से प्रयास भी कर रही है लेकिन इस प्रयास से लगता नहीं है कि किसानों की आमदनी जल्दी दोगुनी नहीं हो पायेगी। किसान को सभी दूधारू गाय की तरह दुहा जा रहा है और कोई उसकी दीनहीन दशा पर कोई रहम नहीं कर रहा है।यह सही है कि सरकार ने किसानों की स्थिति सुधारने की दिशा में उन्नति किस्म के हाईब्रिड बीज तक किसानों को आनलाइन छूट देकर उपलब्ध कराती है इससे कालाबाजारी पर रोक तो जरूर लग गई है लेकिन अब किसानों को छूट वाला बीज लेने के लिए पहले से अधिक पैसे की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं अन्य तरह तरह की सहूलियतें सरकार की तरफ से किसानों को आनलाइन दी जा रही हैं तथा उनके उत्पाद का सरकारी मूल्य निर्धारित करके उसकी सरकारी खरीद भी की जाती है। हर साल किसानों के अनाज की सरकारी खरीद करने के नाम पर एफसीआई से लेकर खरीद केन्द्र तक जो रवैया अख्तियार किया जाता है वह जगजाहिर है और पिछली सरकारी खरीद के समय मुख्यमंत्री जी खुद औचक निरीक्षण करके अपनी आँखों से देखकर कार्यवाही भी कर चुके हैं।अब तो सरकारी खरीद में राजनैतिक सहभागिता एवं हस्तक्षेप भी होने लगे हैं और किसानों को अपने उत्पाद की सरकारी खरीद केन्द्रो पर बिक्री करने पर मजदूरी एवं एफसीआई आदि के नाम पर अतिरिक्त खर्चा भी देना पड़ता है। यहीं कारण है कि खरीद के समय केन्द्रों पर किसानों से अधिक व्यवसायिक तथाकथित किसानों को तवज्जो दी जाती है क्योंकि वह बिना किसी न नुकुर के प्रति कुंटल के हिसाब से चुपचाप एडवांस देने को तैयार रहते हैं। क्वालिटी के नाम पर छानाई बिनाई करने से जितना नुकसान सरकारी केन्द्रों पर किसानों का होता है उतना प्राइवेट बाड़ा चलाने वालों के यहाँ नहीं होता है क्योंकि वहाँ बिजली से बड़ा वाला पंखा नहीं लगा होता है। किसानों की दोगुनी करने की दिशा में एक नही अनेकों बाधाएँ हैं जिनकी शुरुआत सिंचाई से होती है जिसके लिये मुख्य रूप से उसे डीजल की जरूरत पड़ती है लेकिन उसके भी मूल्य भी आसमान पर पहुंचकर दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। यह सही है कि इस समय सरकार की बिजली आपूर्ति व्यवस्था का लाभ लोगों के साथ किसानों को भी मिल रहा है लेकिन यह नहीं नही भूलना चाहिए कि अभी साठ फीसदी किसान ऐसे हैं जो डीजल इंजन के सहारे या किराये के पानी के सहारे खेती करते हैं।कहने का मतलब सिंचाई की लागत ही नही बढ़ गयी बल्कि उसके साथ ही बीज खाद मजदूरी यानी हर स्तर पर लागत मूल्यों में हो रही वृद्धि किसानों की आमदनी दोगुनी करने में बाधक है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने की दिशा में सरकारी धान खरीद का हड़ताल के चलते शुरू न हो पाना किसानों की आमदनी दौगुना करने में बन गया है क्योंकि इस समय दीपावली के साथ खेत की पलेवा करके खाद बीज खरीदने के लिए पैसे की तत्काल जरूरत है। किसान गेहूं की बुआई दस नवम्बर के बाद से लोग गेहूँ शुरु कर देते हैं जिसके लिए उन्हें तत्काल पैसे की जरूरत होती है। सरकार ने भले ही धान गेहूं के मूल्यों में वृद्धि करके आय दोगुनी करने की दिशा पहल की गयी हो लेकिन खादों बीजों दवाओं एवं मजदूरी मूल्यों में हुयी वृद्धि के साथ इस बार कुछ बीज कम्पनियों के बीजों में लगे कडुआ रोग से हुयी भयंकर तबाही किसानों की आमदनी दोगुना करने में बाधक है। जिन कम्पनियों के बीजों में रोग लगा है उन कम्पनियों को किसानों की हुयी तबाही का मुआवजा दिलाया जाना चाहिए साथ ही पीड़ित किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिलना चाहिए। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/  ऊँ नमः शिवाय।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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