Wednesday, November 7, 2018

दीपावली के पौराणिक महत्व और अयोध्या के पुराने गौरव की वापसी

आज पाँच दिवसीय दीपोत्सव का मुख्य पर्व दीपावली है। हम सबसे पहले इस ज्योति प्रकाश के पर्व की पावन मंगलमयी वेला पर अपने सभी अग्रजों शुभचिंतकों सुधी पाठकों एवं देशवासियों को दिल की गहराइयों से बधाई  देते हुए आप सभी के सुखमय मंगलमयी जीवन की कामना कर शुभकामनाएं देते हैं। साथियों ! जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दीपावली का पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आतताई असुरों का विनाश कर उसके चंगुल से जगतजननी सीता जी को मुक्त कराकर उनके अयोध्या आगमन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।भगवान राम आज नहीं बल्कि त्रेतायुग में रावण के साथ असुरों का संहार करके चौदह वर्षों बाद अपनी जन्मभूमि वापस लौटे थे और उस समय अयोध्या नगरी अवध की राजधानी थी और बृहद भारत इसके अधीन था। सर्वविदित है कि देवासुर संग्राम में मनु शतरूपा के वंशज चक्रवर्ती महाराजा दशरथ की अहम भूमिका थी और यह खानदान हमेशा से असुरों का विरोधी रहा है।अयोध्या दुनिया में आज से नहीं बल्कि आदिकाल से एक विशेष पहचान एवं महत्व रखती है लेकिन इसकी पहचान को मुगलकाल में मिटाकर इसे फैजाबाद जिले का एक कस्बा बनाकर यहाँ पर बाबरी मस्जिद बनवाकर इस पावन नगरी को कलंकित कर दिया गया था।इतना ही नहीं बल्कि रामराज्य की राजधानी रही अयोध्या को राज्य जिला तहसील नहीं बल्कि नगरपालिका बना दिया गया था जो भगवान राम एवं उनकी प्रिय नगरी अयोध्या का अपमान करने जैसा था। आजादी के बाद से चल रहे बाबरी मस्जिद एवं रामजन्मभूमि विवाद के चलते अयोध्या हमेशा दुनिया भर में सुर्खियों में रहा है और बाहरी लोग मानते हैं कि इतना मशहूर पावन पवित्र देवताओं का नगर जिला मुख्यालय जरूर होगा लेकिन यहाँ आने जब उन्हें मालूम होता है कि यह मंडल जिला या तहसील नहीं बल्कि नगरपालिका है तो वह स्वतः असमंजस में पड़ जाते हैं।मुगल शासनकाल के बाद यह पहली दीपावली है जबकि अयोध्या को अपना पुराना गौरव मिल गया है और अब जिले का नाम फैजाबाद नहीं बल्कि अयोध्या हो गया है। गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगीनाथ द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सभालते ही अयोध्या के पुराने गौरव को वापस लाकर रामराज्य की अवधारणा को मूर्ति रूप देने का प्रयास किया जा रहा है और पिछले दो वर्षों से दीपावली के अवसर एक बार फिर सतयुग की तरह अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया संवारा और दीप मालिकाओं से सीता जी के साथ भगवान राम के वापसी जैसा माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। दीपावली की पूर्व संध्या पर कल अयोध्या में विशेष आयोजन किया गया और मुख्यमंत्री खुद दीवाली मनाने कोरियाई राष्ट्रपति की धर्मपत्नी की गौरवमयी मौजूदगी में आये थे।इस अवसर पर उन्होंने जिले का नाम फैजाबाद से बदलकर अयोध्या कर दिया गया तथा हवाई अड्डे सहित अन्य स्थानों के नाम भी भगवान राम से जोड़ दिये गये हैं।इतना ही नहीं अयोध्या की पहचान कोसों दूर पहले से कराने के लिए भगवान की सैकड़ों मीटर ऊँची विशालकाय मूर्ति की भी स्थापना भी की गई है। आज की दीपावली इतिहास के पन्नों में अजर अमर हो गई है और आने वाले समय में लोग इसे याद करके कहेंगे कि योगी के राज में 2018 की दीपावली मनाकर उसे यह यादगार सौगात दी गई थी। योगीजी के इस फैसले से अयोध्या निश्चित तौर पर गौरान्वित हुयी है और लगता है कि सतयुग वाले राम एक बार फिर अवतरित हुए हैं। वैसे राजनीति में नये जिले सत्तादल से जुड़े आराध्य पूज्य लोगों के नाम पर रखकर समुदाय या वर्ग विशेष के लोगों का समर्थन हासिल करने का इधर दौर शुरू हो गया है जिसकी वजह से तमाम जिलों की पुरानी पहचान बदली है। मुख्यमंत्री योगी अभी कुछ दिनों पहले प्रदेश की राजधानी रह चुके इलाहाबाद का नाम बदलकर उसके पौराणिक स्वरूप में  प्रयागराज कर चुके हैं जिसे लेकर राजनैतिक छीटाकशी हो चुकी है। विरोधी राजनैतिक दलों का यह कहना किसी हद तक सही है कि फैजाबाद एवं इलाहाबाद के नाम राजनैतिक महत्वाकांओ की पूर्ति के उद्देश्य से बदले जा रहे हैं लेकिन जो कार्य अब हुआ है उसे मुगलकाल के अंत होने या आजादी मिलने के बाद ही हो जाना चाहिए था। इससे पहले अभी जल्दी ही बसपा कार्यकाल में इसी तरह संत महात्माओं के नाम तमाम जिले बन चुके हैं और जो राजनैतिक महत्वाकांक्षा उस समय उनके नामकरण पर थी स्वाभावतः वहीं इन निर्णयों से भी होगी। हम एक बार सभी साथियों को ज्योति पर्व की बधाई शुभकामनाएं देते हैं। बहुत बहुत धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / नमस्कार / गुडमार्निंग / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
       .   भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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