Sunday, November 4, 2018

धनतेरस को करें ये उपाय तो होगा अधिक लाभ-पंडित रामजी पांडेय

दीपावली से 2 दिन आने वाला पर्व  धनतेरस 5 नवंबर 2018 के दिन मनाया जाएगा. इस दिन धन प्राप्ति के उपाय करने से धन के योग बनते हैं और उसके साथ ही घर मे सुख सम्रद्धि आती है धन और वैभव के श्रेष्ठ देवी-देवता माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर को माना जाता है. कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं. कुबेर यदि कृपा दृष्टि बनाएं तो कोई भी व्यक्ति धन की प्राप्ति कर सकता है धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और धातु का सामान खरीदना शुभ फलदायी माना जाता है. धनतेरस पर जो भी उपाय आजमाए जाते हैं सामान्यत उनसे मिलने वाला फल धनतेरस पर 13 गुना बढ़ जाता है. इस दिन 13 की संख्या शुभ मानी जाती है. आप चाहें तो धनतेरस के दिन एक उपाय करके यह जान सकते हैं कि आने वाले साल में आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी. इसके लिए आपको सिर्फ पांच रुपए खर्च करने होंगे. धनतेरस के दिन पांच रुपए का साबुत धनिया खरीदें. इसे संभालकर पूजा घर में रख दें.दीपावली की रात लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा करें. अगले दिन प्रातः साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें. माना जाता है कि साबुत धनिया से हरा भरा स्वस्थ पौधा निकल आता है तो आर्थिक स्थिति उत्तम होती है.
 धनिया का पौधा हरा भरा लेकिन पतला है तो सामान्य आय का संकेत होता है. पीला और बीमार पौधा निकलता है या पौधा नहीं निकलता है तो आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.धनतेरस पर सूर्यास्त के बाद दीप जलाकर कौड़ियां रखें, धन कुबेर और देवी लक्ष्मी का पूजन करें. आधी रात के बाद 13 कौड़ियां घर के किसी कोने में गाड़ दें. अनायास ही अपार धन प्राप्ति के योग बनने लगेंगे.
घर में चांदी के 13 सिक्के रखें और केसर व हल्दी लगाकर पूजन करें. इससे बरकत बढ़ेगी.
 धनतेरस पर 13 दीप घर के अंदर और 13 दीप घर के बाहर दहलीज और मुंडेर पर रखें.कुबेर यंत्र लाएं, उसे दुकान के गल्ले या तिजोरी में स्थापित करें. इसके 108 बार इस मंत्र का जाप करें. अगर 108 जाप नहीं कर सके तो 13 बार इस मंत्र को पढ़ें और चमत्कार देखें. इससे धन संबंधी हर तरह की परेशानियों का अंत होगा.
कुबेर धन प्राप्ति मंत्र-
 
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
 
 कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥

कुबेर मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय दापय स्वाहा॥

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