Friday, November 23, 2018

नोटबन्दी के बाद अगले कुछ महीनों में एटीएम बंदी की मार झेल सकते है लोग

रेगुलेटरी परिदृश्य में हो रहे बदलावों के चलते ATMs आॅपरेट करना नुकसानदेह साबित हो रहा है. इसके चलते मार्च 2019 तक देश में 2.38 लाख में से लगभग 50 फीसदी ATM बंद हो सकते हैं. यह चेतावनी कनफेडरेशन आॅफ ATM इंडस्ट्री (CATMi) ने दी है.
CATMi की ओर से बयान में कहा गया कि ATM बंद होने से हजारों नौकरियों पर तो प्रभाव पड़ेगा ही, साथ ही वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को लेकर सरकार की कोशिशें भी प्रभावित होंगी.
CATMi ने बयान में कहा कि जो ATM बंद हो सकते हैं, उनमें से अधिकांश गैर-शहरी क्षेत्रों के होंगे. इससे वित्तीय समावेशन की कोशिशें प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि लाभार्थी ATM का इस्तेमाल सरकारी सब्सिडी निकालने के लिए भी करते हैCATMi ने कहा कि ATM हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड समेत हाल में हुए रेगुलेटरी बदलावों, कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड को लेकर अध्यादेशों और कैश लोडिंग के कैसेट स्वैप मैथड से ATM आॅपरेट किया जाना नुकसानदेह हो जाएगा. नतीजतन इन्हें बंद करना पड़ेगा. CATMi ने अनुमान जताया कि केवल नए कैश लॉजिस्टिक्स और कैसेट स्वैप मैथड से ATM इंडस्ट्री पर 3000 करोड़ रुपये की लागत का बोझ पड़ेगा.मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडर्स, ब्राउन लेबल ATM डिप्लॉयर्स और व्हाइट लेबल ATM आॅपरेटर्स समेत पूरी ATM इंडस्ट्री अभी तक नोटबंदी के झटके से उबरी नहीं है. अब अतिरिक्त अनुपालन जरूरतों के चलते स्थिति और खराब हो चली है क्योंकि इससे लागत और बढ़ने वाली है. सर्विस प्रोवाइडर्स के पास इतनी बड़ी लागत का बोझ उठाने के लिए वित्तीय साधन नहीं हैं और इससे वे ATM बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं.CATMi के मुताबिक, इंडस्ट्री की स्थिति में सुधार लाने का एक ही रास्ता है और वह यह कि अनुपालन की अतिरिक्त लागत का बोझ उठाने के लिए बैंक आगे आएं. अगर ATM डिप्लॉयर्स को बैंकों द्वारा इन इन्वेस्टमेंट्स का मुआवजा नहीं मिलता है, तो संभावना है कि कॉन्ट्रैक्ट सरेंडर करने के हालात पैदा हो जाएं और बड़े पैमाने पर एटीएम बंद करने पड़ें.
देश में ATM लगाने की सर्विस से होने वाली आय नहीं बढ़ रही है. इसकी वजह बहुत कम ATM इंटरचेंज चार्जेस और लगातार बढ़ती लागत है.

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