Monday, January 7, 2019

फूल विक्रेताओं ने किया प्रदर्शन राज्यपाल से मिलकर करेंगे किसानों की बात

Hari om
कानपुर नगर, प्रयागनाराण शिवाला स्थित कैलाश मंदिर प्रांगण जहां वर्षो से फुटकर फूलमण्डी लगती रही और आस-पास के गांवो का किसान अपने फूल ले यहां बेचने आता रहा। यहां शहर की तरफ के फुटकर फूल विक्रेता आकर फूल खरीदते है लेकिन अब कुछ लोगों के कारण फूलमण्डी को उजाड दिया गया है और किसान नये ठिकाने के लिए यहां-वहां भटक रहे है। कैलाश मंदिर प्रांगण से हटने के बाद किसानो ने कैंट क्रासिंग पर जगह घेरी, वहां से हटने के बाद अब मेस्कर घाट द्वारा पर बैठे है और वहां से भी उन्हे हटा दिया जायेगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसानो का क्या होगा।इस सम्बन्ध में कैलाश मंदिर प्रांगण फुटकर फूल बाजार में सोमवार को श्रीमाली सेवा समाज के सदस्यों द्वारा प्रदर्शन कर अपनी मांगो को उठाया गया। इस दौरान शिव कुमार सैनी ने कहा कि यहां फुटकर फूलमण्डी कई वर्षो से लगती है। यह स्थान निजी है और इसका सालाना किराया यहां के मालिक को जाता है, ऐसे में नगर निगम ने भी यहां कभी शुल्क नही लिया। यहां आस-पास के 150 से अधिक गावों का किसान आता है और अपने फूल बेंचता है। उन्होने बताया कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसान विरोधी काम कर रहे है और प्रशासन को भ्रमित कर फूलमण्डी हटवाने का लागातार प्रयास करते आ रहे है। वर्तमान में भी किसानो को जबरन दूसरी जगह ले जाया जा रहा है और जो किसान नही जाते है उन्हे धमकाया जा रहा है। बताया कि जिस प्रकार चकरपुर में सब्जी व फल की थोक मण्डी है लेकिन बादशाहीनाका, फूलबाग, गुमटी आदि स्थानो पर फलो और सब्जी की फुटकर मण्डी है, उसकी प्रकार नौबस्ता में फूल की थोक मण्डी है लेकिन यहां फूलों की फुटकर मण्डी है जहां थोडी मात्रा में किसान अपने फूल लाता है और आस पास के क्षेत्रों से खरीदार आकर फूल खरीदते है ऐसे में 25-30 किलो फूल लाने वाला किसान कितना कमा लेता होगा। कहा यह निजी स्थानी है और यहां पर रहने वालों को इस मण्डी से कोई परेशानी नही है लेकिन कुछ लोग नही चाहते है किसान स्वछंद होकर व्यापार कर सके। बताया कि मण्डी के लिए पूर्व में जिलाधकारी को ज्ञापन भी दिया गया है। नन्हे सैनी ने बताया कि कुछ किसान यहां ऐसे आते है जो उन्नाव, बिल्हौर, शिवराजपुर, सरसौल आदि दूर-दूर से आते है और अपने साथ बेल, दूब, घांस, तुलसी, अशोक, आम के पत्ते, भांग, अकौडा आदि लाते है। अब यह लोग सारा दिन में दो-ढाई सौ की बिक्री कर पाते है उसकी में सारा दिन का उनका खर्चा आना-जाना भी होता है। ऐसे में गरीब किसान नौबस्ता फूलमण्डी पैसा खर्च कर नही पहुंच सकता। बडा चैहारा से नौबस्ता फूलमण्डी में आने जाने का ही 100रू0 खर्च हो जाता है वहीं फुटकर फूल बेंचने वाले माली भी इतनी दूर नही जा सकते है उन्हे परेशानी होती है क्योंकि सुबह मण्डी लगती है ओैर सुबह ही फूल बिकते है। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि हम सब मिलकर इस समस्या को सुलझाये ताकि गरीब फूल उत्पादकों को परेशानी न हो और किसी से उसका धंधा न छिना जाये। इस दौरान शिव कुमार सैनी, अशोक सैनी, ननहे सैनी, डा0 ओपी सैनी, अरविन्द, संजय रावत, सुनील यादवत्र मुरारी दादा के साथ स्थानीय दुकानदार तथा किसान मौजूद रहे।
स्थानी लोगों को धंधा हुआ चैपट
डा0 ओ0पी0 सैनी ने बताया कि कुछ किसान यहां पर स्थानीय दुकानदारों को फूल बेंच देते थे और पैसा लेकर चले जाते थे और स्थानीय दुकानदार सारा दिन में फूल बेंच अपनी रोजी चलाता था। वहीं मण्डी के कारण सजावाट का सामान, धागा, सूई, पन्नी, बेल, आदि चीजों की भी बिक्री करने  वालों का पेट पलता था वहीं कुछ लोग फूलों की लडिया पिरोने का काम करते है जिन्हे फूल पिरोने का प्रति किलो 3 रू0 मिलता है और वह भी सारा दिन में 100 रू0 कमा लेते थे, इन सभी को अब काम मिलना बंद हो गया है, ऐसे में किसान ही नही स्थानीय लोग जो मण्डी के सहारे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे वह बेरोजगार हो गये है।
ज्ञापन देकर इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री व राज्यपाल से करेगे बात
श्रीमाली सेवा समाज के सदस्यों ने कहा कि उन्हे आर्थिक संकट से जूझना पड रहा है और किसान भी इधर उधर के चक्कर में त्रस्त हो चुका है। कहा कि स्वयं की इस समस्या के निदान के लिए अब आन्दोलन शुरू किया जायेगा और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मण्डी को सुव्यवस्थित कराके कैलाश मंदिर परिसर में पुनः लगवाने की मांग की जायेगी साथ ही यदि ऐसा नही होता है तो समाज के सभी सदस्य व कार्यकर्ता लखनऊ जानकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ तथा राज्यपाल से मिलकर अपनी समस्या उनके सामने रखेंगे।

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