Sunday, February 24, 2019

IADVL SKIN सफर की पहली यात्रा पूरी 18 राज्य सामिल


एस के मिश्रा की रिपोर्ट

IADVL SKIN SAFAR ने 2 महीने की लंबी यात्रा के बाद भारत के संविधान क्लब, नई दिल्ली में डॉ. दिनेश कुमार देवराज, संयुक्त सचिव, IADVL (2018)  के अनुसार, 18 राज्य,  54  शहरों / कस्बों / गांवों, २००  अधिक स्टॉप ओवर ,12000 किमी 63 दिनों में कवर किएत्वचा रोग विशेषज्ञ सर गंगा राम हॉस्पिटल और IADVL पीपल कनेक्ट सेल (2018) के चेयरमैन ने कहा, “हम इस सफारी के माध्यम से वैन द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे दिल्ली-गुरुग्राम-करनाल-सोनीपत, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई-पुणे-गोवा-बैंगलोर-चेन्नई-हैदराबाद-कोलकाता-गुवाहाटी-पटना-लखनऊ-ग्वालियर-आगरा-नोएडा आदि को कवर किया।
त्वचा की समस्याओं, मिथकों और कुष्ठ व विटिलिगो जैसी त्वचा और बालों की स्थिति के बारे में भारत को जागरूक और  शिक्षित करना ही इसका उद्देश्य था।
डॉ. दिनेश कुमार देवराज, संयुक्त सचिव, IADVL (2018) ने बताया कि "कुष्ठ रोग का अब आसानी से पता लगाकर उसका इलाज संभव है।डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार 31/8/2018 से अप्रैल 2017 तक भारत में कुष्ठ मामलों की कुल संख्या लगभग 126164 है  पंजीकृत  90709 है। ज्यादातर कुष्ठ रोग उड़ीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से हैं। इन बीमारियो मे से 10 मिलियन से अधिक भारतीय विटिलिगो से पीड़ित हैं।डा रोहित बत्रा के अनुसार हमने देखा कि यात्रा के दौरान हमारे पास जितने भी रोगी मिले, उनमें से इस बीमारी से पीड़ित 5% से अधिक थे .
डॉ. मुकेश गिरधर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष IADVL (2018) ने कहा, “हालांकि यह सफर सर्दियों के महीनों में शुरू हुआ था, लेकिन फंगल संक्रमण से पीड़ित बहुत सारे मरीज थे।हमें इस बिमारी से पीड़ित गंभीर मामले  95 % से अधिक और साधारण 60% से ज्यादा मिले।परिवार के सदस्य 70% तक प्रभावित थे और 80% से अधिक बच्चों के मामले से प्रभावित वयस्क थे।इसके अलावा, 50-70% ऐसे थे जिन्होंने फंगल संक्रमण के लिए स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल किया “इन स्थितियों में प्रमुख चिंता का विषय है झोलाछाप डॉक्टर  (quackery ) यानि दुर्भाग्य से हमारे देश में बहुत सी बाधायें हैं । उनमें से कनेक्टिविटी का मुद्दा,   ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी आदि जैसे कई बाधाएं हैं, जो लोगों को झोलाछाप (quackery ) की ओर ले जाती हैं। बिना डिग्री के  डॉक्टर  की चिकित्सा रोगी की स्थिति को और भी खराब कर सकता है।यही नहीं, हाल ही में जारी एक विज्ञप्ति  रिपोर्ट के अनुसार देश में 50% से अधिक डॉक्टर  बिना औपचारिक डिग्री के अभ्यास कर रहे हैं। ''राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. ऋषि पाराशर IADVL (2019)  ने कहा, “ त्वचा सफर यात्रा का मुख्य उद्देश्य था जिन 3.0 लाख लोगों को हमने शिक्षित किया है, और जिनके साथ ज्ञान   साझा किया है वे इस ज्ञान  को आगे बढ़ाने में राजदूत के रूप में कार्य करेंगे।
IADVL द्वारा स्किन सफर, निश्चित रूप से न केवल त्वचाविज्ञान बल्कि किसी भी गैर-सरकारी संगठन द्वारा किए गए सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता पहल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने में सफल रहा।IADVL SKIN SAFAR, इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स वेनेरोलॉजिस्ट और लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) द्वारा आयोजित, डॉ. रमेश भट अध्यक्ष IADVL (2018) द्वारा परिकल्पित और IADVL पीपल कनेक्ट सेल (2018) के चेयरमैन डॉ. रोहित बत्रा और संयुक्त सचिव IADVL (2018) डॉ. दिनेश कुमार देवराज द्वारा समन्वित, और IADVL (2018) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश गिरधर ने 2 महीने की लंबी यात्रा के बाद वापसी की।

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