Saturday, March 23, 2019

शहीदे आजम भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को टैप न्यूज़ इंडिया का शत शत नमन

देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों को शत शत नमन यह वही भगत सिंह जिन्होंने हर समाज की भलाई की बात की थी और मरते दम तक अंग्रेजो की दमन कारी नीतियों का विरोध करते रहे उनके क्रांतिकारी स्वभाव और एक अंग्रेज की हत्या के जुर्म में भगत सिंह राजगुरु सुखदेव जिनकी अंग्रेजों द्वारा फांसी की सजा बोली गयी  थी लेकिन देश भर में क्रांति की ज्वाला बनजाने के कारण और जनता के बीच  उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अंग्रेजी हुकूमत ने समय से पहले ही  23 मार्च 1931 को सारे नियमों को ताक पर रखते हुए। फांसी की सजा दे दी  जो गैर कानूनी था लेकिन कानून से खेलना तो जैसे अंग्रेजो की आदत थी उनकी तो बात ही छोड़े आजाद भारत मे भी सरकारे शहीदो को लेकर लापरवाह रही है जिस कारक बहुत ही भारी मन के साथ यह कहना पड़ रहा है कि चाहे भगत सिंह हो या चंद्रशेखर आजाद भले ही आजादी के लिए इन क्रांतिकारियों ने अपना सब कुछ न्योछावर  कर दिया हो परंतु आज भी आजादी मिलने के बाद भी आजाद भारत के इतिहास में उन्हें एक आतंकवादी की श्रेणी के पन्नों में दर्ज कर रक्खा है  यह कह कर कि आजादी हमें अहिंसा के बल पर मिली थी। क्या यह  इन बलिदानों का उपहास नहीं है। क्या हमारी आजादी आज भी रहस्य में नहीं है। भारत सरकार इन बलिदानों को शहीद का दर्जा कब देगी। आजादी के बाद भी हमारी सरकारों का उनके प्रति यह रवैया साबित करता है कि आजादी आज भी रहस्यमय है क्योंकि किसी भी अंग्रेज को अपराधी नहीं माना गया अर्थात अंग्रेजों द्वारा किया गया कार्य गैर कानूनी नहीं समझा गया। तो शहीदों की कुर्बानी और क्रांति कैसे गैर कानूनी हो गयी .....?

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