Saturday, March 23, 2019

आप राजस्थान के युवा नेता प्रकास चन्द्र सैनी ने किया शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित

डेहरा जोड़ी  ग्राम पंचायत गुहला मे भगत सिंह स्टेडियम में भगतसिंह जी की प्रतिमा पर फूलों की माला डाल कर शहीद-ए-आजम भगतसिंह जी को श्रद्धांजलि ।  आप नेता प्रकाश चंद सैनी ने बताया कि
आज़ादी के 70 साल बाद भी हम अपने शहीदों के सपनो का भारत नहीं बना पाए।हमारे शहीदों ने एक ऐसे भारत के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी थी जहाँ हर जाति-धर्म के लोग शांति से रह सकें, किसानों को उनका हक़ मिले और सबको अच्छी शिक्षा मिले।" अरविंद केजरीवाल ।प्रकाश जी ने अपने संबोधन में युवाओं को भगत सिंह जी से प्रेरणा लेकर देश हित में तन मन धन से कार्य करने का आह्वान किया।उन्होंने बताया कि भगत सिंह के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आने का एक बहुत बड़ा कारण था उनका लाहौर स्थित ' नर्सरी ऑफ पैट्रियाट्स' के रूप में विख्यात नेशन कॉलेज में दाखिला लेना। इस कॉलेज की शूरुआत लाला लाज पतराय ने की थी। कॉलेज के दिनों में भगत सिंह ने एक एक्टर के रूप में कई नाटकों जैसे राणा प्रताप , सम्राट चंद्रगुप्त और भारत दुर्दशा में हिस्सा लिया जानकर हैरान रह जायेंगे कि परिवार वालो ने जब भगत सिंह की शादी करनी चाही तो वे घर छोड़ कर कानपुर भाग गए । अपने पीछे जो खत छोड़ कर गए उसमे लिखा कि मैंने अपने आप को देश को आजाद कराने के लिये समर्पित कर दिया है।आगे प्रकाश जी ने बताया कि बावजूद इसके शहीद -ए-आजम भगत सिंह की शादी हुई पर कैसे हुई उसकी कहानी सुनकर कोई भी जोश से भर जाता है । भगत सिंह की शहादत के बाद उनके घनिष्ठ मित्र भगवती चरण बोहरा की धर्मपत्नी दुर्गा भाभी ने जो जो एक स्वयं क्रांतिकारी वीरांगना थी बताया कि भगत सिंह की शादी हुई फांसी का तख्ता उसके लिये मण्डप बना ,  फांसी का फंदा वरमाला और मौत बनी उसके लिये दुल्हन।एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी भगत सिंह का योगदान भी अपने आप मे अद्भुत है। 8 अप्रेल,1929 को गिरफ्तारी होने से पहले उन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम की प्रत्येक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर भाग लिया।1920 में जब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया उस समय भगत सिंह मात्र 13 साल के थे ।1929 में जब गिरफ्तार हुए तो 22 साल के।इन 9 वर्षों में उनकी स्वतन्त्रता सेनानी के रूप में गतिविधियां किसी भी देश भक्त से कम नहीं।लाहौर षड्यंत्र केस में जब भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी की सजा सुनाई गई, 24 मार्च,1931 को फांसी देने की तारीख तय हुई लेकिन नियत तारीख और समय से 11 घंटे पहले ही 23 मार्च 1931 को शाम साढ़े सात बजे फांसी दे दी गई जो नाजायज तौर पर ही दी गई थी क्योंकि उनके नाम FIR में थे ही नहीं।झूठ को सच बनाने के लिये पाकिस्तान की सरकार ने 451 लोगो से झूठी गवाही दिलवाई।मनोहर सैनी , बजरंग सैनी सुनील सैनी गुरुजी ,छितर मल सैनी, सुनील चौधरी , भोलू चौधरी, पांडेय जी, सुशील चौधरी, विकास गुरुजी, भरत सैनी, महेंद्र गुर्जर, प्रकाश आम आदमी कार्यकर्ता, शीशपाल सरपंच, नवीन सैनी, विक्रम, सैनी, मनीष सैनी ,महेंद्र सैनी, बीरबल गुरुजी, राजेश सैनी,

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