Saturday, April 20, 2019

विद्या वान गुणी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर


हनुमान जी का जीवन हमें शिक्षा देता है कि सेवा ही वो मार्ग है जिससे जगत तो क्या जगदीश को भी जीता जा सकता है। प्रभाव से नहीं स्वभाव से ही किसी को जीता है। विद्यावान गुणी अति चतुर-हमारी सारी विद्या और सारे गुणों का समर्पण अगर श्री राम जी कार्य के लिए नहीं है तो वह ज्ञान बोझ है। हनुमान जी तो राम काज के लिए ही सारे सद्गुणों का उपयोग करते हैं  विभीषण ने पूछा कि मै इतना राम नाम जप करता हूँ तो भी प्रभु श्री राम मेरे ऊपर कृपा और मुझे दर्शन क्यों नहीं देते हैं ? हनुमान जी ने कहा कि तू राम नाम तो जपता है पर राम जी का काम नहीं करता। राम नाम जपने के साथ-साथ जिस दिन रामजी का काम भी करने लगेगा, दर्शन हो जायेंगे  हनुमान जी को तो राम काज की सूचना मिली और सोचना बंद। सेवा, सुमिरन, सहजता और इतना सब करने के बाद भी निराभिमानिता ये सब हनुमान जी से हमें सीखने को मिलते हैं। सारे कार्य स्वयं करते हैं पर श्रेय सारे वानरों को दिलाते हैं। जिसने अपने मान का हनु कर रखा है, वहीं श्री हनुमान जी हैं।

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