Saturday, May 18, 2019

बिना मानक के चल रहे पानी के प्लांट करते लोगों के जीवन से खिलवाड़

गोंडा ब्यूरो पवन कुमार द्विवेदी
गोण्डा:गर्मी शुरू होते ही आर-ओ पानी अवैध तरीके से बेचा जा रहा है। आरओ से फिल्टर केन के जरिए पानी पहुंचाने वाले यह लोग जहां एक और बोरिंग के लाखों लेटर पानी का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इनके इस पानी का मानक स्तर क्या है यह भी किसी को मालूम नहीं यह पानी पीने योग्य है अभी या नहीं इसके लिए खाद विभाग की टीम कभी इस तरह का पानी तैयार करने वाली जगहों पर जाकर पता लगाने का जहमत नहीं उठाती | क्षेत्र के कई जगहों पर जब  हमारी संवाददाता की टीम ने आरओ  से फिल्टर का पानी तैयार करने वाली कुछ फैक्ट्रियों का जायजा लिया तो पता चला की कहीं यह घर में चल रही हैं तो कहीं लेबर के भरोसे ही मानक स्तर का पानी तैयार हो रहा है

क्षेत्र  में दर्जन भर से ज्यादा जगहों पर ये प्लांट लगा है। इनके पास न तो लाइसेंस है, न ही एनओसी। यह धंधा अवैध है, लेकिन खुलेआम और बेखौफ हो रहे खरगूपुर,इटियाथोक, जय प्रभा ग्राम ,बाबागंज ,धानेपुर जगहों पर  अवैध तरीके से आर-ओ पानी बेचने का प्लांट लगा हुआ है। हैवी बोरिंग कराकर कारोबारी धरती का पानी निकालकर उसे फिल्टर करते हैं। इसके बाद उसे चिलर में डालकर ठंडा करते हैं। इसी पानी को कूल केज व ट्रांसपेरेंट बोतल में भरकर 20 से 25 रुपये में बेचते हैं। कई जगहे ऐसी हैं, जहां आरओ प्लांट तीन व चार-चार हैं। कारोबारी शादी-ब्याह में भी पानी की सप्लाई का आर्डर लेते हैं। गिरते भू-जल स्तर के कारण पानी की भयावह स्थिति है। 150 से 200 फिट की बोरिंग वाले हैंडपंप पानी छोड़ दे रहे हैं।

कारोबारी धरती का पानी निकालकर बेच रहे हैं। इसके बदले वह मोटी रकम भी कमा रहे हैं। यह सारा खेल अवैध है। किसी के पास पानी बेचने का लाइसेंस नहीं है। न ही पानी की जांच कराकर किसी ने एनओसी ली है। चार साल से आरओ पानी बेचने का खेल शुरू है। एक भी प्लांट की अधिकारियों ने जांच नहीं की है। प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बेचा जा रहा है। पानी गुणवत्ता युक्त है या नहीं। अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं है। वह इस अवैध धंधे का तमाशा देख रहे हैं।

आर ओ पानी से सावधान 

आजकल लोग आरओ पानी पीने के इतने ज्यादा आदी हो जाते हैं कि बाहर का पानी उनके लिए पचाना मुश्किल हो जाता है। हम इसके बारे सोचते हैं कि शायद पानी प्योर न होने के कारण सेहत खराब हो रही है लेकिन असल में इसकी वजह आरओ का पानी होता है। आरओ पानी को प्योरीफाई करने के साथ इसमें शामिल मिनरल्सक की ज्यादातर मात्रा को खत्म कर देता है। जिससे हमारे शरीर को पानी में मौजूूद मिनरल्स का पूरा फायदा नहीं मिलता। इन खनिजों की कमी से स्वास्थ्य को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

पानी से साथ मिनरल्स भी हो जाते हैं साफ

पानी में प्राकृतिक रूप से कुछ महत्वपूर्ण तत्व मौजूद होते हैं। इनको दो भागो में रखा जाता है, एक गुड मिनरल्स और दूसरे बैड मिनरल्स। पहले श्रेणी वाले मिनरल्स में केल्शियम, मैग्नीशियम,पोटाशियम जैसे तत्व शामिल होते हैं। जो हैल्दी रहने के लिए बहुत जरूरी है। इसके दूसरी तरफ बैड मिनरल्स में लेड,आर्सेनिक,बेरियम, एल्यूबमीनियम आदि शामिल होते हैं। 

जब आरओ पानी को प्यूरीफाई करता है तो इसके साथ गुड और बैड दोनो तरह के तत्व भी साफ हो जाते हैं। पानी तो साफ हो जाता है लेकिन गुड और बैड दोनो मिनरल्स भी पानी से खत्म हो जाते हैं। इससे पानी की उपयोगिता पर बहुत बुरा असर पड़ता है। 

हो सकती हैं ये परेशानियां

जो लोग लगातार सालों से इस पानी का सेवन कर रहे है, बीच में किसी दूसरा यानि बिना आरओ किए पानी नहीं पीते वह जल्दी बीमरियों का शिकार हो सकते हैं। इससे दिल की बीमारी, इंफैक्शन, पाचन क्रिया की गड़बडी, कमजोरी,सिरदर्द,पेट खराब होना और थकान आदि होने लगती है। इससे हड्डियों से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं।

कई आरओ प्लांट वाले पानी के नाम पर बेंचते है कैंसर  

कई आरओ फैक्ट्रियों में जाकर देखने पर पता चला कि उनके फैक्ट्रियो में आर ओ मशीन तो लगी है लेकिन वे पूर्णतया काम नहीं कर रही है बल्कि वे मशीन पानी में केवल एक घोल छिड़कती है , नाम न बताने के शर्त पर मौके पर मौजूद कर्मी ने बताया कि अगर आरओ पूरी तरह काम करेगा तो फ़िल्टर पानी से ज्यादा गन्दा पानी निकालेगा जिससे पानी में वास्तव में क्लोरीन का छिडकाव करके उसे ठंडा कर बेंच दिया जाता है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में वर्ष 2010 तक जल शुद्धिकरण में जहरीली गैस क्लोरीन का प्रयोग बंद कर दिया जाना था। विकसित देशों में यह वर्ष 2005 से पहले ही बंद कर दिया गया था। क्लो रीन पानी में मिलाने से माइक्रो बैक्टीरिया एवं कैलीफाम बैक्टीरिया तुरंत मर जाते हैं। दूसरी ओर क्लोरीन का जल में घोला जाना गॉल ब्लेडर में कैंसर जैसी बीमारियां भी परोस रहा है।

आर-ओ पानी बेचने का क्या है मानक

• आर-ओ प्लांट लगाकर ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड लखनऊ (बीओआईएस) अनुमति लेनी पड़ती है।

• बीओआईएस से अनुमति मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी लाइसेंस देते हैं।

• आरओ-प्लांट की फर्म का सेल्स टैक्स देना पड़ता है।

• श्रम विभाग में प्लांट में काम करने वाले कर्मियों का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।

• आर-ओ प्लांट के पानी की हर माह जांच रिपोर्ट भेजनी पड़ती है।

• आर-ओ प्लांट चलाने के लिए कामर्शियल विद्युत कनेक्शन होना चाहिए।

क्या कहते है जिम्मेदार  एसडीएम सदर ने बताया कि  अवैध आरोवाटर प्लांट चल रहे है उनको नोटिस भेजी जा रही है

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