हमारी पुरानी पंचायत व्यवस्था में है बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत-के सी शर्मा



के सी शर्मा
अगर ध्यान दिया जाये तो सबसे ज्यादा घोटाला ग्राम पंचायतों में किया जाता है।
 जिसमे किसी भी कार्य को सही तरह से क्रियान्वित नहीं किया जाता है वैसे तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों के द्वारा बहुत सारी लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर तक पहुंचने पर उसको निगल लिया जाता है। प्रायः देखने में आता है ग्रामपंचायतो के प्रधान और सचिव उसको निगल जाते है। चाहे वह सौचालय हो और चाहे वह प्रधानमंत्री आवास योजना, सबमें उनकी कमीशन होती है नहीं तो इसका लाभ उस व्यक्ति को नहीं दिया जाता जो मोटी रकम देने से मना कर देता है।

 वेचारे गरीब का भगवान भी नहीं होता ये सुना था लेकिन इन सब को देखकर इसका एहसास होना भी लाजमी है, वही सरकार द्वारा सीधे खाते में पैसे डालने पर भी कई मार्ग खोज लिए गए है जिसमे  जेसीबी मशीन द्वारा कार्य करा लिया जाता है और अपने आपसी लोंगो के खाते में मस्टर्ड रोल चढ़ाकर पैसे खींच लिए जाते है।
 जिसमे मुख्य भूमिका सचिव निभाते है सचिवों का ना कभी पेट भरा है और ना कभी भरेगा पूरे मास्टर माइंड तो यही होते है कि किस प्रकार हमें पैसे कमाने है।
 पंचायतों में जाना तो इनके लिए बड़ी कष्ट की बात होती है।
  जिसका काम हो वो इन्हे खुद ढूंढे ,और सही भी है कहते है कि ढूंढने पर भगवान भी मिल जाते है फिर तो ये सचिव हैं पूरी व्यवस्थाएं चौपट कर दी है।

 ये जनता के सेवक है कि भक्षक है अनुमान लगाना मुश्किल है। पंचायतों के कार्यालय शायद ही 5 सालों में 5 बार खुल जाए और घोटाला तो इतना कि अगर इनका लेखा जोखा देखा जाये तो करोङो में निकलना निश्चित है इसका कारण भी कही ना कहीं अधिकारियों की लापरवाही है जो इन पर शख्ती की वजाय इनको फ्री रखते हैं कहीं ना कहीं अब लगाम लगना आवश्यक है।

वीते महीने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के दुद्धी विधान सभा के विधायक हरिराम चेरो में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मिलकर लिखित शिकायत की ग्राम पंचायतों में 50% की कमीशन खोरी चल रही है। उन्होंने किसका कितना प्रतिशत हिस्सा है का सिलसिलेवार उल्लेख कर 50% का आंकड़ा पेस कर पूरे राज्य के पंचायत महकमे हड़कम्प मचा दिया था।
पता चला है कि मुख्यमंत्री जी ने इसका सज्ञान लिया और इसकी गहराई से जांच कराने का आदेश दे दिया है।जिससे पंचायत महकमे में खलबली मच गई है।कईयों को कहते है जेल जाने का भी डर सताने लगा है।
कई कई ग्राम पंचायते तो ऐसी है जहाँ शौचालय, आवास बना ही नही है लेकिन धन निकलवा के डकार लिया गया है।पानी संचय योजना में तलाबों के गहरीकरण और निर्माण का काम कागजो पर ही होगया ।मस्टररोल भर कर पैसा डकार लिए।पौध रोपण,का यही हाल है कही पौधा लगा ही नही, प्रधान मंत्री के स्वच्छता अभियान को तो ग्राम पंचायते इस तरह पलीता लगा रही है कि साल साल भर बीत जा रहे है, सफाई कर्मियों का अतापता तक नही है।नालियां गंदगी से दुर्गंध फेंकती हुई ,बीमारियों को जन्म देरही है, डेंगू, मलेरिया का कहर जारी है ,लेकिन इनकी सुधि लेने की फुर्सत ग्राम पंचायतों को नही है।ग्राम पंचायतो में चारो तरफ भ्र्ष्टाचार का बोल बाला है।किसी भी तरह विकास का कार्य हो सब के सब भ्र्ष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है।
इसीलिए तो स्वच्छ भारत सपनों में ही संभव है, यथार्थ में नहीं?