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Wednesday, 9 October 2019

इंसानों की जिंदगी के लिए सबसे बड़ा खतरा है प्लास्टिक



बदायूं-- प्लास्टिक देश के लिए एक भयंकर समस्या हो गई है इससे पर्यावरण व जीवन को बचाना बहुत ही मुश्किल हो चुका है ऐसी स्थिति में सरकार और बुद्धिजीवी लोगों द्वारा दुनिया भर में प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया जा रहा है यह निश्चित है कि सरकार और कुछ बुद्धिजीवी लोग ही इस कार्य को सफल नहीं कर सकते प्लास्टिक मुक्त भारत में हर व्यक्ति विशेष की भागीदारी नहीं होगी तब तक यह अभियान सफल नहीं हो सकता जनपद बदायूं के जिला अधिकारी श्री दिनेश कुमार सिंह द्वारा प्लास्टिक मुक्त बदायूं का सपना साकार करने में हर किसी की भागीदारी होनी चाहिए  क्योंकि जिलाधिकारी महोदय स्वयं इस अभियान को जमीन पर सफल बनाने के लिए नाली सहित अन्य स्थानों से प्लास्टिक से संबंधित वस्तुओं को उठाकर कचरे के डब्बे में रखवा रहे हैं पर यह अभियान सफल तभी हो सकता है जब हर मानव इस अभियान को अपना कर स्वयं ही प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प लें क्योंकि प्लास्टिक से भयंकर बीमारियां उपजती हैं प्लास्टिक के  बोतल व टिफन इस्तेमाल से कैंसर जैसी भयंकर बीमारी इंसान को बर्बाद कर देती है आज प्लास्टिक एक विशाल समस्या बन चुकी है कुछ आंकड़ों की मानें तो भारत में प्लास्टिक का प्रवेश लगभग 60 दशक  से पहले हुआ था इतने समय में ही इस समस्या ने एक पहाड़ का रूप ले लिया है शुरू में भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 5000 टन वार्षिक था उपयोग बढ़ता रहा तो जल्द ही यह 22000 टन हो सकता है 1991 में भारत में इसका उत्पादन लगभग 9 लाख टन था 2014 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार समुंदर में प्लास्टिक कचरे के रूप में 5 अरब  टुकड़े तैर रहे हैं दुनिया के लगभग 40 देशों में प्लास्टिक प्रतिबंधित है जिनमें पूर्णता प्रतिबंध जैसे फ्रांस चीन इटली सहित अन्य देश आते हैं

मिट्टी की उर्वर शक्ति को नष्ट करता  है प्लास्टिक - प्लास्टिक कचरे का दोबारा उत्पादन आसानी से संभव नहीं होता है क्योंकि इनके जलाने से जहां जहरीली गैस निकलती हैं वहीं यह मिट्टी में पहुंचकर भूमि की उर्वर शक्ति नष्ट करती है वैज्ञानिकों के अनुसार प्लास्टिक नष्ट होने में लगभग 500 से 100 साल तक लग जाते हैं इतनी भयंकर प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग मानव जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है ऐसी स्थिति में प्लास्टिक मानव से अलग करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि प्रतिदिन हम चाय दूध खाद पदार्थ व अन्य खाद पदार्थों के माध्यम से प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग करते हैं यह हमारे मानव जाति के लिए किसी कैंसर से कम नहीं है क्योंकि कैंसर की जड़ ही है प्लास्टिक पॉलीथिन है इसलिए सब साथ आएं और प्लास्टिक मुक्त बदायूं का सपना साकार बनाएं जिलाधिकारी महोदय सहित अन्य आमजन इस मुहिम में शामिल होकर एक नया इतिहास लिखें क्योंकि जिलाधिकारी बदायूं ने कछला गंगा घाट मां भागीरथी के तट पर बनारस की भात प्रतिदिन गंगा आरती का जो संकल्प लिया वह साकार हो चुका है अब प्लास्टिक मुक्त बदायूं मैं भी हम सभी अपनी जिम्मेदारी समझे और प्लास्टिक को पूर्ण प्रबंधित करें

ब्यूरो रिपोर्ट गोविंद सिंह राणा

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