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Friday, 20 March 2020

151 के तहत जानलेवा हमलावर जेल जाते है छेड़खानी करने वाले बाहर मजा लेते है



के के मिश्रा / हरीश सिंह
सन्त कबीर नगर - अपराधियो से सख्ती से निपटने वाली योगी सरकार की वाहवाही भले ही हो रही   हो लेकिन सच्चाई के पायदान पर लुढ़कती नजर आ रही है जिसका जीता जागता उदाहरण बेलहर थानांतर्गत मनैता पुर निवासी निजी पोर्टल समाचार चलाने वाला पत्रकार बेचन यादव है जिस पर शराब माफियाओ ने जानलेवा हमला किया था । जिसकी वजह होली के पावन पर्व पर बन्द शराब बिक्री पर खबर संकलन था । जिस पर बड़ी मशक्कत के बाद पत्रकारो का रोष और ग्रामीण पत्रकार एशोसियेशन की नाराजगी युक्त आवाज उठाने पर 151 के तहत उपजिलाधिकारी के न्यायालय मे पेश किया गया जिस पर तुरन्त जमानत मिल गयी । वही दूसरा उदाहरण धनघटा थाना क्षेत्र के गाईबसंतपुर का निवासी सुभाष है जिसकी नाबालिग लड़की के साथ एक बीस वर्षीय युवक ने छेड़खानी किया था जिसकी शिकायत उसके परिजनो से करने पर बजाय लड़के को डांटने फटकारने के बालिका के परिजनो को पीट दिया । लिहाजा जानलेवा हमला करने वाले जहां राहत की सांस ले रहे है वही छेड़खानी और मारपीट करने वाले मुकदमा मे कैद होकर मजे से बाहर घूम रहे है । ऐसा ही एक और छेड़खानी का मामला है जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है जो कोतवाली थाना क्षेत्र के लहुरादेवा मे बीते अगस्त माह मे एक छेड़खानी का मुकदमा दर्ज हुआ था लेकिन गिरफ्तारी आज तक नही हुई कल तहसील सम्पूर्ण समाधान दिवस मे जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक से पीड़ित परिवार ने गुहार लगायी है । पुलिस को अपनी कर्त्तव्य पारायणता पर सवाल कहां से खड़ा हो रहा है यह अपने आप मे एक बड़ा सवाल है ? वही अगर पीड़ित परिवारो की स्थिति की दृष्टि से देखा जाय तो निर्बल पीड़ित ही पुलिस के आनाकानी के शिकार नजर आते है । बहरहाल पुलिस की कार्यशैली अगर देखी जाय तो समाज को स्वच्छ समाज रखने मे इसकी अहम भूमिका है अपराध पर जहां पुलिस अंकुश लगाती है वही अपराधियो पर कानूनी कार्यवाही करते हुए एक तरफ सुधार का रास्ता प्रशस्त करती है वही दूसरी तरफ हवालात मे डालकर उनकी अपराधिक आदत और मंशा को चकनाचूर करती है । पुलिस अगर अपनी कर्त्तव्य पारायणता से विमुख हो जाय तो आज समाज जो राहत की सांस ले रहा है वह सांस लेने के काबिल ही नही रहेगा । बहरहाल पुलिस की कर्त्तव्य पारायणता पर जो प्रश्न खड़ा हो रहा है सूत्रो की माने तो इसके पीछे कोई राजनैतिक दबाव है । जिसके चलते पुलिस बेबस नजर आ रही है चाह कर भी अपने कर्त्तव्य को पूरा नही कर पा रही है यही वह कारण है जिसके चलते जानलेवा हमले का शिकार पत्रकार एवं छेड़खानी की शिकार बालिका सहित मारे - पीटे गये उसके परिजनो के साथ पुलिस न्याय नही कर पा रही है । ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी होता है कि योगी सरकार अपराध कम करने मे काम कर रही है या बढ़ाने का काम कर रही है ? महिला सम्बन्धी अपराध पर जहां केन्द्र सरकार सख्त है वही पत्रकारो की सुरक्षा को लेकर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक का सख्त रुख है किसी भी हाल मे पत्रकारो पर हमला करने वाले बक्शे नही जायेगे । वैसे योगी सरकार की अपराध पर किये गये कार्यो को देखा जाय तो अपराधियो के साथ योगी सरकार सख्ती से निपट रही है ।

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