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Friday, 18 September 2020

उर्दू के तरक्की के लिए हुकूमत के भरोसे न रहें:कमरूद्दीन


हाजीपुर(वैशाली)उर्दू हमारी मातृभाषा है और जो लोग इसको अपनी माँ की तरह सम्मान नहीं करते उनको भी कहीं सम्मान नहीं मिलता।उर्दू भाषा का अपनी मां की तरह इज्जत करनी चाहिए।उपरोक्त बातें बागमली वेलफेयर ट्रस्ट हाजीपुर,वैशाली के तत्वावधान में आयोजित" उर्दू की आवश्यकता को बनाए रखने"के विषय के साथ-साथ सम्मान समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए नवनिर्वाचित एमएलसी प्रोफेसर गुलाम गौस ने कही।उन्होंने कहा कि मैं हाजीपुर की धरती का पैदावार हूं और मेरी नजर पूरे बिहार पर टिकी है।लेकिन यह अभी भी मेरी नजर में है।मैं सभी सार्वजनिक मुद्दों को हल करने में विशेष रूप से दिलचस्पी रखता हूं।हाजीपुर में एक ईंट भी जुड़ती है तो मुझे बहुत खुशी मिलती है।मुझे लगता है कि मेरे मकान में यह ईंट लग रहा है।यहां के सभी मांगों को पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगा।उन्होंने कहा कि हाजीपुर में उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल कायम करना मेरा ख्वाब है।मैं चाहता हूं कि इसे हाजीपुर शहर के अंजुमन फलाहुल मुस्लेमीन में स्थापित किया जाए।उर्दू भाषा को सरकार पर भरोसा किए बिना उसे अपने घर से जीवित रखें।उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग समाचार पत्र और पत्रिकाएं बंगला भाषा में ही पढ़ते हैं और सभी के हाथ में भी मिल जाएगा।यहूदी अपनी भाषा में ही बोलते हैं।जो आज भी उनकी भाषा को जीवंत बनाता है और आज हम उर्दू बोलने में शर्म महसूस करते हैं।उन्होंने कहा कि कोई आदमी क्रोध की स्थिति में अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं।आज के समय में लोग अंग्रेजी बोलने में गर्व महसूस करते हैं जबकि लोग प्यार व मोहब्बत में उर्दू का उपयोग करते हैं।इस अवसर पर मौजूद लोगों से एक-एक उर्दू अखबार खरीदकर पढ़ने का अहद कराया और कहा कि यह भाषा बहुत प्यारी है।उन्होंने लोगों से उर्दू पढ़ने,उर्दू में शादी कार्ड छपवाने,नेम  प्लेट,दुकान और घर का नाम लिखने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि चुनाव का मौसम शुरू हो गया है और कुछ लोग कल्याणकारी कार्यों का वादा करके आपको ठगने की कोशिश करेंगे उनसे होशियार रहिएगा।ट्रस्ट के संरक्षक अल्हाज अब्दुल खालिक ने कहा कि अगर मदरसा चौक पर अंडरपास के निर्माण की मांग पूरी नहीं की जाती है तो हम प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।उन्होंने कहा कि उर्दू के लिए शिक्षकों और माता-पिता को एक साथ मिलकर कोशिश करने की जरूरत है।मास्टर मोहम्मद कमरूद्दीन ने कहा कि उर्दू के तरक्की के लिए उर्दू शिक्षकों को साथ मिलकर काम करना होगा और   हमें रोने से ज्यादा उर्दू के लिए प्रयास करने की जरूरत है।प्रोफेसर इज़हार-उल-हक ने कहा कि जिस देश से राजनीति खत्म होती है वह देश खत्म हो जाता है।हम खुद उर्दू को नष्ट कर देते हैं। हमें उर्दू के महत्व को समझाने की जरूरत है।उर्दू अखबार खरीदें और अपने सभी कामों में उर्दू का  उपयोग करें।मास्टर अज़ीम-उद-दीन अंसारी ने कहा कि उर्दू को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाना आवश्यक है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर उर्दू को मिटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।उलेमाओं ने उर्दू के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब उर्दू को बचाने के लिए विद्वानों को आगे आने की आवश्यकता है। मास्टर मोहम्मद अकबर अली ने कहा कि उर्दू के नाम पर उर्दू स्कूलों के शिक्षकों को बहाल किया जाता है।लेकिन वे उर्दू में हस्ताक्षर तक नहीं करते हैं जो कि अफ़सोस की बात है।उर्दू का अस्तित्व तभी संभव होगा जब उर्दू के नाम पर बहाल शिक्षक रुचि के साथ उर्दू पढ़ेंगे,लिखेंगे और पढ़ाएंगे।ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष होजैर अहमद खान ने कहा कि यह ट्रस्ट फरवरी महीने से शुरू हुआ है  और जो काम किया है वह सभी की आंखों के सामने है।ट्रस्ट ने अच्छा काम किया है।अब यह  ट्रस्ट हाजीपुर से उर्दू की लड़ाई शुरू की है जो सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।समारोह की शुरुआत कारी अफरोज़ द्वारा पवित्र कुरान के पाठ के साथ किया गया।स्वागत गान को ओसामा फारूक और क़मरूल इस्लाम ने गाया।ट्रस्ट के अध्यक्ष जमील अहमद ने प्रोफेसर गुलाम गौस को शॉल और गुलदस्ता देकर सम्मानित किया।ट्रस्ट के सचिव इंतिखाब आलम ने गुलदस्ता देकर जोरदार स्वागत किया।ट्रस्ट के अध्यक्ष जमील अहमद ने समारोह की अध्यक्षता की और ट्रस्ट की ओर से कई मांगो का ज्ञापन प्रोफेसर गुलाम गौस को सौंपा।ट्रस्ट के महासचिव इंतिखाब आलम द्वारा धन्यवाद के साथ समारोह का समापन किया गया।मौके पर जीशान अली उर्फ ​​शब्बू बाबू,नदीम अख्तर खान,सद्दाम हुसैन,मोहम्मद इमरान,मोहम्मद तबरेज,मोहम्मद शाहनवाज अता, कबीर आलम,अब्दुल गनी,अजहरुद्दीन,मोहम्मद एहसान,मास्टर नसीम सिद्दीकी,मास्टर सोहराब,मास्टर अब्दुल कादिर, महमूद आलम सरदार,अफरोज आलम,आलम अंसारी आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट व फोटो मोहम्मद शाहनवाज 

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