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Thursday, 10 September 2020

मां तो आखिर मां होती है:deepak tiwari

मां तो आखिर मां होती है:deepak tiwari बेटा कट्टा लेकर मां को मारने के लिए खोज रहा है, और मां ने उसी बेटे की लंबी उम्र के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा है
भागलपुर.लबों पर उसके बद्दुआ नहीं होती, बस एक मां है जग में जो खफा नहीं होती। जी हां, दरभंगा से अपने बेटे के खौफ से भागकर भागलपुर आई एक मां ने उसी की लंबी उम्र के लिए जिउतिया का व्रत रखा है। यहीं से वह अपने बेटे की सलामती की दुआ मांग रही है। उसने लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखा है... उसी बेटे के लिए जो कट्‌टा लेकर उनके खून का प्यासा बना हुआ है। उसी बेटे से जान बचाकर महिला को अपना घर छोड़ना पड़ा। इस दुनिया में इस महिला का और कोई नहीं है सो उसने वृंदावन के वृद्धाश्रम जाना तय किया है।
ये महिला दरभंगा जिले के लादौर की रहने वाली हैं। लाॅकडाउन में जब बेटे ने राेज प्रताड़ित किया ताे घर छाेड़ कर वृद्धाश्रम जाने के लिए वहां से भाग आईं। बेटे की ज्यादतियाें के निशान उनके शरीर पर जगह-जगह नीला दाग माैजूद है। किस्मत ऐसी कि इनकी एक बेटी बचपन में ही सांप काटने की वजह से मर गई। एक बेटा भी कम उम्र में बीमार हाेकर मर गया। पति लुधियाना में एक फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। सात साल पहले ईश्वर ने वह सहारा भी छीन लिया। बेटा पहले लुधियाना और दिल्ली में काम करता था। महिला पिछले चार महीने से समाजसेवी सुजाता चाैधरी के घर में शरण लिए हुए है।
मां का खाैफ : मैं कहां हूं, उसे पता चल जाए ताे मेरी जान ले लेगा
बेटे के खाैफ के साये में वह मां जी रही हैं। इस मां ने कई बार अपने बेटे काे समझाने की काेशिश की। लेकिन बेटा बीते सात साल से कभी पैसा मांगता ताे कभी अपना तनाव इन्हें पीटकर खत्म करता। बैंक खाते में जाे भी पैसा था वह भी निकाल चुका। वह कहती हैं मेरा बेटा मुझे कमजाेर समझकर मुझ पर जुल्म करता है। मैं भाग आई हूं। एक साल पहले भी मैं उसकी मार से तंग आकर भाग गई थी। फिर मुझे लगा उसे मेरी याद आती हाेगी। वह सुधर गया हाेगा। मैं वापस उसके पास गई। लेकिन अब ताे वह और उग्र हाे गया। मेरी जान के पीछे पड़ गया है। अगर उसे पता चल जाए मैं कहां हूं, ताे मेरी जान ले लेगा।
मां की ममता : बेटा बुरा है मगर मैं मां हूं, उसका बुरा नहीं चाह सकती
महिला बताती है कि पहले ऐसा नहीं था। पति का जबसे देहांत हुआ तब से ये मुझपर हाथ उठाने लगा। मैं व्रत कर रही हूं क्याेंकि नाै महीने उसे अपनी खून से सींचा है, तीन साल तक उसे अपना दूध पिलाकर बड़ा किया है। वह मेरा अंश है। मैं उसका बुरा नहीं चाह सकती। मैं ताे अब भी उसके साथ रहना चाहती हूं, अफसाेस कि ये संभव नहीं है। मैंने पुलिस में शिकायत नहीं की क्याेंकि वह उसे मारेंगे। मेरे पास घर छाेड़ के भागने के अलावा काेई रास्ता नहीं था। आश्रम में मैं अपनी बची हुई जिंदगी काट लूंगी।

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