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Saturday, 28 November 2020

01:24

किसान आंदोलन का साइड इफैक्ट जाने क्या deepak tiwari

चंडीगढ़.पंजाब के किसानों को हरियाणा में घुसने से रोकने के लिए लगाए गए नाकों के कारण आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को ऐसे कई मामले सामने आए हैं। यहां तक कि 6 घंटे बारात लेट हो जाने के कारण दूल्हा-दुल्हन फेरे भी नहीं ले सके। इसके अलावा काफी लोगों को बॉर्डर के इस पार आने-जाने के लिए नदी तक पार करनी पड़ी।
दिल्ली-बठिंडा हाईवे पर जाम में फंसे सिरसा के गांव सक्ताखेड़ा निवासी संदीप कुमार ने बताया कि शुक्रवार को फतेहाबाद के लिए वो सुबह साढ़े 8 बजे चले थे। गांव खैरेकां के पास पहुंचकर बारात जाम में फंस गई। फेरे लेने के लिए 11 बजे पहुंचना था, लेकिन 2 बजे तक बारात सिरसा में ही फंसी रही। समय पर नहीं पहुंच पाने की वजह से अब शादी टालनी पड़ी। वहीं संदीप कुमार के रिश्तेदार राकेश कुमार ने बताया कि सिरसा के गांव सक्ताखेड़ा से बारात चलकर फतेहाबाद में 11 बजे पहुंचनी थी, लेकिन काफी लेट हो गए।
दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे के पास घग्गर नदी को पार करते लोग।
उधर दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोके जाने के चलते हाईवे पर जाम लगा हुआ था। इसके चलते लोग कई घंटों के जाम में फंसे रहे। सुबह करीब आठ बजे से लगे जाम में लगभग सात घंटे बड़ी तादाद में लोग फंसे थे। जिन लोगों को जरूरी अपने घर पहुंचना था, उन्हें मजबूरी में घग्गर दरिया में घुसकर कई घंटे पैदल चलना पड़ा। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशान महिलाएं और बच्चे परेशान हुए।

Thursday, 29 October 2020

05:14

पंजाब जाने वाली ट्रेनें रद्द करोड़ों का नुकसान किसान यूनियन ने किया विरोध deepak tiwari

चंडीगढ़। देश में किसानों की ओर से लगातार मोदी सरकार के लाए गए कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है। पंजाब में भी किसान लगातार मोदी सरकार के कृषि से जुड़े कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच कृषि अधिनियमों के खिलाफ आंदोलन को देखते हुए पंजाब की तरफ जाने वाली तमाम ट्रेनों को रद्द किए जाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ सत्ताधारी कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल, किसान यूनियन भी केंद्र सरकार के खिलाफ आ गए हैं।

पंजाब में भारतीय रेलवे के जरिए मालगाड़ियों की आवाजाही बंद किए जाने को लेकर हंगामा मचा हुआ है। किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र की बीजेपी सरकार पंजाब के किसान संगठनों और पंजाब सरकार के साथ बदले की कार्रवाई के तहत मालगाड़ियों को आने नहीं दे रही ताकि पंजाब के लोग परेशान हों। केंद्रीय कृषि अधिनियमों के खिलाफ किसान संगठनों और किसानों के समर्थन में आने वाली पंजाब सरकार से बदला लेने की ये केंद्र की कोशिश है।
पंजाब के बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने जल्द ही पंजाब के लिए मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू नहीं की तो ऐसे में बीजेपी के पंजाब के तमाम नेताओं के घर के बाहर धरना दिया जाएगा और इन नेताओं को उनके घर से बाहर भी आने नहीं दिया जाएगा। बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान संगठनों ने रेलवे ट्रैक खाली कर रखे हैं और मालगाड़ियों की आवाजाही में रुकावट पैदा नहीं कर रहे, फिर भी केंद्र सरकार जानबूझकर माल गाड़ियों की आवाजाही रोक रही है ताकि पंजाब के लोग परेशान हों।
मालगाड़ियों की आवाजाही बंद होने के बाद पंजाब के थर्मल प्लांट्स में कोयले के खत्म होने का संकट भी गहरा गया है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी पीएसपीसीएल के चेयरमैन ए. वेणुगोपाल ने कहा कि मालगाड़ियों के पंजाब में न आने की वजह से कोयले की सप्लाई नहीं हो पा रही है और कुछ थर्मल प्लांट्स में कोयला खत्म होने की कगार पर है और कुछ में खत्म हो चुका है। पंजाब के पास सिर्फ 2 से 3 दिन का कोयला ही बचा है और हर दिन पंजाब को 1000 मेगावाट बिजली बाहर से एक्सचेंज के तौर पर खरीदनी पड़ रही है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने पंजाब के वित्तमंत्री से 200 करोड़ रुपये बिजली बोर्ड को तुरंत प्रभाव से रिलीज करने की मांग की है।
मालगाड़ियों की आवाजाही न होने से पंजाब की इंडस्ट्री में भी कोहराम मचा हुआ है। पंजाब की औद्योगिक नगरी लुधियाना ओर पंजाब के व्यापारी चिंतित है कि उनका अब तक 15000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। व्यपारियों का कहना है कि अगर हालात इसी तरह बने रहे तो जिस तरह से किसान आत्महत्या कर रहे थे, आने वाले समय में उसी रास्ते पर पंजाब का व्यापारी भी चल पड़ेगा। अगर पंजाब में मालगाड़ियों का आवागमन नहीं शुरू हुआ तो माल की सप्लाई दूसरे राज्यों में न होने से पंजाब की इंडस्ट्री को अभी और नुकसान उठाना पड़ेगा।
रेलवे विभाग के जरिए पंजाब में मालगाड़ियां बंद करने पर देश का मेनचेस्टर कहे जाने वाले लुधियाना के व्यापारियों की हालत दिन प्रतिदिन खस्ता हो रही है। इसके अलावा विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाने वाला हौजरी का सामान और अन्य सामान वहीं पर पड़ा सड़ रहा है और व्यापारियों को करोड़ों रुपये का रोजाना नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसी तरह पंजाब में जो दूसरे देशों और राज्यों से स्क्रैप आता था, उसके न आने पर पर भी व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसानों के साथ आपसी खींचतान के कारण व्यापारी वर्ग बहुत ही निराश और क्रोधित है। उनका कहना था कि पहले पंजाब की इंडस्ट्री कोरोना और लॉकडाउन की वजह से मंदी की मार झेल रही थी और अब इस तरह से केंद्र सरकार ने मालगाड़ियों की आवाजाही रोकने का फैसला लेकर पंजाब की इंडस्ट्री को डुबोने का काम किया है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को कहा है कि अगर पंजाब सरकार पंजाब में आने वाली मालगाड़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती है तभी भारतीय रेलवे पंजाब के ट्रेक पर मालगाड़ियों को भेजेगी। इसी वजह से ये मामला केंद्र और पंजाब सरकार के बीच उलझा हुआ है। हालांकि कुछ महीने पहले तक केंद्र की सहयोगी रहे और एनडीए का अलायंस अकाली दल भी अब रेलवे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधने में लगा है और उन्होंने भी कांग्रेस पार्टी की तरह ही केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला है।

Tuesday, 27 October 2020

18:00

7 महीने बाद 2 नवंबर से पीजीआई में शुरू होगी ओपीडी एक विभाग में देखे जाएंगे 50 मरीज deepak tiwari

चंडीगढ़.कोविड-19 के चलते 7 महीने से बंद पीजीआई चंडीगढ़ की ओपीडी अब 2 नवंबर से शुरू होगी। हर विभाग में 50-50 मरीज देखे जाएंगे। हालातों को देखते हुए धीरे-धीरे मरीजों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सोमवार को पीजीआई प्रशासन की हुई मीटिंग में यह फैसला लिया।
पीजीआई के प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक ओपीडी में देखे जाने वाले मरीजों की अपॉइंटमेंट टेली कंसल्टेशन में दिए गए नंबरों से ही मिलेगी। कोविड19 से बचाव के नियमों के मद्देनजर ही फिलहाल एक विभाग में 50 मरीजों को देखने का फैसला किया गया है।
बता दें कि पीजीआई में चंडीगढ़ समेत आसपास के राज्य के मरीज बड़ी संख्या में अपना इलाज करवाने के लिए आते हैं। लेकिन कोरोनाकाल से मरीज यहां इलाज नहीं करवा पा रहे थे। शहरों में कोविड19 पॉजिटिव मरीजों की घटती संख्या के मद्देनजर ही अब दोबारा से ओपीडी संचालित की जा रही है। इससे पहले जीएमएसएच-16 की ओपीडी एक हफ्ता पहले शुरू हो चुकी है और वहां भी मौजूदा समय में हर विभाग में 50 मरीज ही देखे जा रहे हैं।

Monday, 21 September 2020

17:50

चंडीगढ़ की अंशु शर्मा ने डेवलप किया वॉइस सेंसर वाला सैनीटाइजर deepak tiwari

अब सैनीटाइजर को छूने की भी जरूरत नहीं. ‘फतेह’ बोलते ही होगा स्प्रे, चंडीगढ़ की अंशु शर्मा ने डेवलप किया वॉइस सेंसर वाला सैनीटाइजर deepak tiwari 
कोविड-19 की चपेट में आने से बचने के लिए दो गज की दूरी और मास्क पहनना बहुत जरूरी है, वहीं हाइजीन मेंटेन करने को भी जरूरी बताया जा रहा है। हाथों को बार-बार धोने से हम कोरोना के वायरस से बच सकते हैं। लेकिन, कई जगहों पर हमारे पास पानी और साबुन उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे में हाथों को साफ करने के लिए हैण्ड सैनीटाइजर का उपयोग किया जाता है। बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए अब हैण्ड सैनीटाइजर में भी बहुत सारे इनोवेशंस देखने को मिल रहे हैं।
ऐसा ही एक इनोवेशन चंडीगढ़ की अंशु शर्मा ने किया है। इन्होनें आवाज पर काम करने वाला हैण्ड सैनीटाइजर विकसित किया है। जैसे ही आप कहेंगे ‘फतेह’, बस इसमें से स्प्रे हो जाएगा, सैनीटाइजर।
पब्लिक प्लेस पर लगे सेंसर देख आया आइडिया
प्रसार भारती से बातचीत में अंशु शर्मा ने कहा, "मैंने सोचा कि कुछ ऐसा बनाने की कोशिश करूं, जो बिलकुल कान्टैक्टलेस हो। मैने देखा कि एयरपोर्ट आदि जगहों पर सेन्सर्स लगे होते हैं, जिसमें हाथ आगे ले जाते ही सैनीटाइजर निकल आता है। इसलिए, यह सोचा कि क्यों न ऐसा सैनीटाइजर बनाया जाए जो आवाज से चले।"
‘फतह’ के अलावा सात अलग-अलग शब्दों से हो सकता है स्प्रे
"इस डिवाइस में मैने फतेह शब्द डाला है। फतेह बोलते ही यह ऑन हो जाता है। हम इसमें कोई भी शब्द डाल सकते हैं। सात तरह के विभिन्न शब्द प्रयोग किए जा सकते हैं। इस सैनीटाइजर में अलग-अलग आवाजों को रिकार्ड कर उस पर काम करने की क्षमता है। साथ ही, इस मशीन में अपने हिसाब से आवाज को बदला और डिलीट किया जा सकता है।"

Friday, 18 September 2020

15:35

आप सांसद भगववंत मान बोले-कांग्रेस‑अकाली ने तो गिरगिटों को भी शर्मिंदा कियाdeepak tiwari


चंडीगढ़। लोकसभा में पेश हुए कृषि बिलों को लेकर हंगामा मच गया है। पंजाब के किसानों के अलावा सूबे की कई राजनीतिक पार्टियों ने भी बिल का विरोध किया है। अकाली दल की नेता और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने तो केंद्रीय मंत्रिमडंल से इस्तीफा भी दे दिया। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस बिल का विरोध करने वाली पार्टियां आपस में भी एक‑दूसरे के खिलाफ बयान देने में लगी हैं। कौर के इस्तीफे को जहां कांग्रेस ने नाटक करार दिया है, वहीं कांग्रेस और अकाली दल दोनों के ही विरोध पर आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने निशाना साधा है।
मान ने संसद में बहस के दौरान तो अकाली दल और कांग्रेस को निशाने पर लिया ही, साथ ही ट्वीट करके भी दोनों दलों के नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने बिल का विरोध करने पर दोनों दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘अकाली दल और कांग्रेस ने खेती अध्यादेशों पर यू-टर्न लेकर रंग बदलने में गिरगिटों को भी शर्मिंदा कर दिया है।’ वहीं, आम आदमी पार्टी ने बिल का विरोध करने वाले दोनों ही दलों (अकाली-कांग्रेस) को ऐंटी-फार्मर करार दिया है। अपने एक ट्वीट में पार्टी ने एक पोस्टर साझा किया है।

कांग्रेस‑अकाली पर आरोप
पोस्टर के जरिए ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की कांग्रेसनीत कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने केंद्र सरकार के साथ साल 2019 में एक हाई पॉवर मीटिंग में अध्यादेश को मंजूरी दी थी। वहीं अकाली दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने तब इस ऑर्डिनेंस को अप्रूव किया था, जब कैबिनेट में इसे लेकर आया गया था। पार्टी ने कहा कि अकाली और कांग्रेस ही वह कारण हैं, जिसकी वजह से भारत के किसान प्रोटेस्ट कर रहे हैं।
मोदी ने दिया आश्वासन
बता दें कि गुरुवार को लोकसभा में खेती से संबंधित बिलों का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे बहुमत के साथ पास करा लिया गया। इन अध्यादेशों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को आश्वस्त किया है कि इससे उन्हें लाभ होगा। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे। इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा। मोदी ने बिलों के विरोध को लेकर कहा कि किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं। उन्होंने किसानों को इससे बचने की सलाह दी।