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Sunday, 27 October 2019

10:41

Deepawali- रह न जाए इस समर में रोशनी के हाथ खाली फिर विजेता हो न जाए तम भरी ये रात काली-पंकज अंगार




रह न जाएं इस समर में रौशनी के हाथ खाली।
फिर विजेता हो न जाये तम भरी ये रात काली।
हों जहाँ भी नफ़रतें,मनुहार के दीपक रखें।
हम दिलों की ड्योढ़ीयों पर प्यार के दीपक रखें।।


रोग कैसा हो गया ये हो गयी है क्षीण दुनियाँ।
इससे पहले थी कभी क्या इस कदर संकीर्ण दुनियाँ।
घर महल होने लगे पर दिल घरौंदा हो गया है।
आज कल उल्लास मन का नींद गहरी सो गया है।।

रुग्ण इस संसार मे उपचार के दीपक रखें.
हम दिलों की ड्योढ़ीयों पर प्यार के दीपक रखें।।

घूमता है छल बदन पर नेह की चादर लपेटे।
गीत चुप बैठा हुआ है पीर को दिल में समेटे।।
मौन रहते हैं पटाखे,घुल गया बारूद मन में।
गन्ध वह सद्भाव वाली अब कहाँ मिलती सुमन में।

मन मे फिर भी कुछ नये आसार के दीपक रखें ।।
हम दिलों की ड्योढ़ीयों पर प्यार के दीपक रखें।।

प्रेम जैसे हर छलावे की कलई खुलने लगीं हैं।
भोर के मन मे भी पंकज कालिखें घुलने लगी हैं ।
प्रेम का जिसमे भवन था वो गली मिलती नही है।
है दियों की भीड़ पर दीपावली मिलती नही है।

चल भुवन में नेह से विस्तार के दीपक रखें ।।
हम दिलों की ड्योढ़ीयों पर प्यार के दीपक रखें।।

प्रकाश पर्व पर यही प्रार्थना कि आपके द्वारा प्रकाशित हर दीपक आपके घर,आंगन,देहरी,द्वार,बाह्य संसार के साथ साथ अन्तर्जगत एवम भाग्य सौभाग्य को भी प्रकाशित करे।।। पुनः जगमगाती शुभकामनाएं।

पंकज अंगार

Saturday, 26 October 2019

07:52

एकदिन मिश्रा जी की दोस्ती फेसबुक पर सुंदर महिला से हो गई


एक मिश्रा जी थे उसकी दोस्ती सुंदर महिला से फेसबुक पर हो गयी।
गुड मॉर्निंग, nice pic , wow, से आगे कुछ बातें इनबॉक्स में भी होने लगी।

मिश्रा जी खुश रहने लगे। रोज़ इधर उधर से फेसबुकिया फूल भेज देते।

एक दिन उनके मन की हो गयी।
इनबॉक्स में नंबर मांग लिया महिला ने।
अब क्या था। व्हाट्सअप शुरू।
जनाब रोमांटिक मैसेज भेजने लगे।

अरे फेसबुक पर लड़की आपकी पोस्ट लाइक भर कर ले तो आप स्वयं को शाहरुख खान के अवतार समझने लगते हो। और अगर फ्रेंड रिक्वेस्ट आ जाये तो कहना ही क्या।

खैर, एक दिन महिला ने फ़ोन लगा लिया।
जल्दी आ जाओ। "मेरे पति बाहर गए हैं"।
जनाब बिजली की स्पीड से पहुंच गए।
बात शुरू होती, तो अचानक होश आया।
"तुम्हारे पति आ गए तो"

"नहीं आएंगे, और आ जाएं तो तुम कालीन साफ करने लगना, थोड़ी देर में चले जायेंगे। वरना टेबल , पंखे साफ करते रहना"

ये बात चल ही रही थी, की डोर बेल बज गई। पतिदेव आ गए।

जनाब घबरा कर अपना रुमाल निकाल कर टेबल साफ करने लगे।
महिला ने झाड़ू , फटका, डस्टर , वाइपर ला कर पटक दिया।

"लो साफ करो"

पति ने "पूछा कौन है ये।"

पत्नी बोली।
सफाई के लिए हाउसकीपिंग कम्पनी ने भेजा है।

सफाई चलती रही। एक कप मे *पुराने कप में* सफाई वाले को चाय भी मिली।

पंखे, खिड़कियों, कालीनों आदि की सफाई के बाद थके हारे जनाब बोले।
"जाऊं मैडम".
क्योंकि पतिदेव तो खिसकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

मैडम बोली।
ओके।

हस्बैंड ने कहा , "पैसे कितने देना है"

पत्नी बोली मुस्कुराते हुए बोली 
इनकी कंपनी में एडवांस जमा कर दिया था।


 दीवाली की सफाई के लिये, लोग क्या क्या हथकंडे अपनाते हैं यार। 
मिश्रा जी ने अब फेसबुक से दूरी बना ली है।