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Tuesday, 29 March 2022

06:42

असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा ने नरेन्द्र मोदी का किया आभार व्यक्त जाने क्यों


असम :असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कोनराड के. संगमा ने असम और मेघालय राज्यों के बीच अंतरराज्यीय सीमा विवाद के कुल बारह क्षेत्रों में से छह क्षेत्रों के विवाद के निपटारे के लिए आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के विजन की पूर्ति की दिशा में यह एक और मील का पत्थर है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, असम सरकार और मेघालय सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

     इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन एक विवादमुक्त नॉर्थईस्ट के लिए ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि 2014 में जब श्री नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने, तब से मोदी जी ने नॉर्थईस्ट की शांति प्रक्रिया, विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन लिए अनेक प्रयास किए हैं,  जिसके हम सभी साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि 2019 में गृह मंत्री बनने के बाद जब मैं प्रधानमंत्री से मिलने गया तो उन्होंने इन चारों क्षेत्रों में सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि 2019 से 2022 तक का ये सफ़र एक बहुत बड़ा माइलस्टोन हासिल करने में सफल रहा है। 

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने उग्रवाद को समाप्त करने और पूर्वोत्तर के राज्यों में स्थायी शांति के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए अगस्त, 2019 में NLFT (SD) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसने त्रिपुरा को एक शांत राज्य बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया। फिर 23 साल पुराने ब्रू-रियांग शरणार्थी संकट को हमेशा के लिए हल करने के लिए 16 जनवरी, 2020 को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत 37,000 से ज़्यादा आदिवासी भाई-बहन जो कठिन जीवन जी रहे थे, वो आज सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि 27 जनवरी 2020 को हस्ताक्षरित बोडो समझौता किया गया जिसने असम के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए 50 साल पुराने बोडो मुद्दे को हल किया। असम और भारत सरकार ने इस समझौते की 95 प्रतिशत शर्तों को पूरा कर लिया है और आज बोडोलैंड एक शांत क्षेत्र के रूप में जाना जाता है और विकास के रास्ते पर अग्रसर है। 4 सितंबर, 2021 को असम के कार्बी क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे विवाद को हल करने के लिए कार्बी-आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत लगभग 1000 से अधिक  हथियारबंद कैडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हुए।

Tuesday, 4 January 2022

03:15

असम के दरांग जिले में जल जीवन मिशन (जेजेएम) निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी को सक्षम बना रहा है


 असम:अक्सर यह कहा जाता है कि देश का विकास उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है। लेकिन किसी भी देश की सफलता को मापने का असली पैमाना यह है कि उस देश की महिलाएं राष्ट्र-निर्माण में किस प्रकार भागीदारी कर रही हैं, जैसा कि कहावत है,'एक महिला को सशक्त बनाएं और आप एक राष्ट्र का निर्माण करें।'

        इस मामले के अध्ययन से यह पता चलता है कि असम के दरांग जिले की महिलाएं जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन में अपनी सक्रिय भागीदारी द्वारा किस प्रकार एक उदाहरण स्थापित कर रही हैं।

        असम में दरांग जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपनी स्थिति के कारण असम के सामाजिक-आर्थिक परिवेश में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह जिला रणनीतिक रूप से पूर्वोत्तर गुवाहाटी के प्रवेश द्वार के आस-पास स्थित है। हालांकि यह जिला अपने लोगों की कल्पना के अनुसार विकसित नहीं हो सका है। इस जिले में धीमी विकास गति ने कई मोर्चों पर इसकी प्रगति को प्रभावित किया है। अन्य जिलों की तरह इसके विकास को गति प्रदान करने के लिए दरांग जिले को नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम में शामिल किया गया था।

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        दरांग जिले में अनेक समस्याएं हैं जिनमें से एक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की कमी है। दरांग में पीने के पानी की गुणवत्ता आर्सेनिक अपमिश्रण के कारण प्रभावित है। इससे यह पानी सीधे ही पीने के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। इसके अलावा बारहमासी बाढ़ इस समस्या को और बढ़ा देती है।

        जल जीवन मिशन के शुभांरभ से असम ने ‘घरे-घरे बिसुध पानी’ (हर घर में साफ नल का पानी) के आदर्श वाक्य के साथ इस कार्यक्रम को जोर-शोर से लागू करने की शुरुआत की है। इस मिशन के ढांचे के एक हिस्से के रूप में कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों (आईएसए) को जमीनी स्तर पर इस कार्यक्रम के निष्पादन में सहायता प्रदान करने के लिए लगाया गया है। धूलिकोना फाउंडेशन असम में काम कर रही ऐसी ही एक आईएसए है।

        धूलिकोना फाउंडेशन मुख्य रूप से दरांग जिले में इस मिशन को सुचारू और सहज रूप से कार्यान्वित करने में योगदान देता है। यह नौ ग्राम पंचायतों (जीपी) में फैले 60 गांवों में कार्यरत है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन नौ ग्राम पंचायतों में से सात का नेतृत्व महिला अध्यक्षों द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में धूलिकोना फाउंडेशन प्रत्येक ग्राम पंचायत कार्यालयों में पीआरआई सदस्यों, गांव बुरहास, पीएचईडी प्रतिनिधियों और अन्य समुदाय के सदस्यों के साथ परिचयात्मक बैठकें भी आयोजित करता है। ग्राम पंचायत अध्यक्षों, मुख्य रूप में महिला जीपी अध्यक्षों का नेतृत्व करना और अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में इस मिशन को लागू करने में उनका उत्साह प्रदर्शित करना बहुत अच्छा लगता है।

Tuesday, 2 March 2021

17:09

असम में प्रियंका ने चाय बागान में मजदूरों के साथ पत्तियां तोड़ी tap news India

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गुवाहाटी.कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार को असम के चाय बागान में महिलाकर्मियों के साथ पत्तियां तोड़ती नजर आईं। प्रियंका असम दौरे के दूसरे दिन राज्‍य के सधारू टी स्‍टेट पहुंची थीं। वहां उन्‍होंने चाय बागान मजदूरों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने बागान में पारंपरिक रूप से सिर से टोकरी बांधकर पत्तियां भी तोड़ीं।
प्रियंका ने कहा कि यहां के बड़े-बड़े नेता चार्टर प्लेन में घूमते हैं। आजकल चीन और जापान की ग्रीन टी भी पीने लगे हैं। शायद उन्हें असम की कड़क चाय पिलानी पड़ेगी। उन्हें उनकी जगह दिखानी पड़ेगी। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर असम में चाय बागान और मजदूर अहम चुनावी मुद्दा हैं।
तेजपुर की रैली में प्रियंका ने भरोसा दिया कि अगर असम में कांग्रेस की सरकार बनी तो हम सभी गृहिणियों को हर महीने 2,000 रुपए देंगे। चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं को रोज 365 रुपए दिए जाएंगे। नौकरियों के 5 लाख मौके बनाएंगे। ये वादे नहीं, बल्कि हमारी गारंटी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में CAA लागू नहीं होने दिया जाएगा।
प्रियंका के चुनावी वादे
असम में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हम एक कानून लागू करेंगे, जिससे प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू नहीं हो पाएगा।
हर परिवार को 200 यूनिट बिजली फ्री में दी जाएगी। इससे बिजली के बिल में आपके 1400 रुपए हर महीने बच जाएंगे।
असम की 126 सीटों पर 3 चरणों में चुनाव
असम की 126 सीटों के लिए 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन चरणों में चुनाव होगा। 2 मई को नतीजे घोषित होंगे। फिलहाल यहां भाजपा की सरकार है और सर्वानंद सोनोवाल यहां के मुख्यमंत्री हैं। पिछले चुनाव में भाजपा 89 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसने 60 सीटें जीती थीं, वहीं असम गण परिषद ने 30 सीटों पर चुनाव लड़कर 14 सीटें और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट ने 13 सीटों पर चुनाव लड़कर 12 जीती थीं। कांग्रेस ने 122 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सिर्फ 26 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी।
​​​​​​कामाख्या देवी के दर्शन के साथ दौरे की शुरुआत
प्रियंका ने सोमवार को कामाख्या देवी के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की थी। पूजा के बाद उन्होंने कहा था कि बहुत दिनों से यहां आने की इच्छा थी, जो पूरी हो गई। इसके बाद उन्होंने लखीमपुर में बागान मजदूरों के साथ झुमुर डांस भी किया था।

Saturday, 31 October 2020

21:19

75 हजार रु. किलो बिकने वाली गोल्ड चायपत्ती की कहानी जानिए हर साल यह क्यों रिकॉर्ड बनाती है deepak tiwari

असम में खास तरह की दुर्लभ प्रजाति वाली चायपत्ती ने फिर रिकॉर्ड बनाया है। मनोहारी गोल्ड टी खास तरह की चायपत्ती है, जिसे गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है। यह असम में इस साल दर्ज चाय की सबसे ऊंची कीमत है।
इस चायपत्ती की पैदावार करने वाले मनोहारी टी स्टेट का कहना है, इस साल इसकी केवल 2.5 किलो पैदावार हुई। इसमें से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। महामारी के बीच चाय की इतनी कीमत मिलना इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है।
ये तो हुई नीलामी की बात अब ये भी समझ लीजिए कि यह चायपत्ती इतनी खास क्यों है...
चाय को तोड़ने का तरीका भी है अलग
मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया कहते हैं, ये खास तरह की चायपत्ती होती है जिसे सुबह 4 से 6 बजे के बीच सूरज की किरणें जमीन पर पड़ने से पहले तोड़ा जाता है। इसका रंग हल्का मटमैला पीला होता है। यह चायपत्ती अपनी खास तरह की खुशबू के लिए जानी जाती है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं।
ऐसे तैयार होती है
पिछले 63 साल से असम की टी-इंडस्ट्री से जुड़े चंद्रकांत पराशर कहते हैं, इस खास तरह की चायपत्ती की पैदावार 30 एकड़ में की जाती है। पौधों से पत्तियों के साथ कलियों को तोड़ा जाता है। फिर इन्हें फर्मेंटेशन की प्रोसेस से गुजारा जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इनका रंग ग्रीन से बदलकर ब्राउन हो जाता है। बाद में सुखाने पर इसका रंग गोल्डन हो जाता है। इसके बाद इसे पत्तियों से अलग किया जाता है।
1 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रहा चाय का कारोबार
डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन, मानसून और बाढ़ का सीधा असर असम की चायपत्ती की पैदावार पर हुआ है। टी-इंडस्ट्री इस साल 1 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रही है। लेकिन हाल ही में नीलामी ने कुछ राहत पहुंचाई है।
राजन लोहिया कहते हैं, ढाई किलो में से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। बची हुई चायपत्ती यहां के नीलामी केंद्र पर मिलेगी। इसे गुवाहाटी की विष्णु टी कम्पनी ने खरीदा है। यह कम्पनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए दुनियाभर तक पहुंचाते हैं।

Thursday, 17 September 2020

17:30

असम में हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहीं 100 साल की माई ने कोरोना को दी मात deepak tiwari

 
असम में कोरोना से संक्रमित सबसे उम्रदराज महिला ने वायरस को मात दी। महिला का नाम माई हंदिकि है, इनकी उम्र 100 साल है। हंदिकि 10 दिन तक हॉस्पिटल में कोरोना से लड़ने के बाद घर लौट चुकी हैं। उन्हें कोरोना का संक्रमण होने पर गुवाहाटी के महेंद्र मोहन चौधरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
इलाज के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर हंदिकि ने यह खुशी गाना गाकर सेलिब्रेट की। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होते समय उन्होंने असमिया भाषा में गाना गाया।
डॉक्टरों ने कहा, यह उनके जज्बे की जीत
हंदिकि का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है, यह उनके जज्बे की जीत है। उन्होंने जिस तरह कोरोना से लड़ने की कोशिश की वह काबिले तारीफ है। उनकी पॉजिटिव सोच से यह संभव हो पाया है।
डॉक्टर्स और नर्सों का शुक्रिया अदा किया
हंदिकि की रिपोर्ट निगेटिव आने पर हॉस्पिटल स्टाफ और नर्सेस ने उनके लिए एक पार्टी रखी। इस पार्टी हंदिकि शामिल हुईं और अपनी मधुर आवाज में असमिया गाने भी गाए। इस दौरान उन्होंने, इलाज के दौरान कोई दिक्कत नहीं हुई। यहां खाने में रोटी-सब्जी के साथ मछली, दूध, अंडा और केला मिलता था।
पहले से ब्लड प्रेशर की मरीज थीं
हॉस्पिटल में जब हंदिकि भर्ती हुईं तो डॉक्टर्स चिंतित थे क्योंकि वह हाई ब्लड प्रेशर की मरीज थीं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह मात्र 10 दिन में कोरोना को हरा देंगी। असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने माई के इस जज्बे की तारीफ की।
हंदिकि ने इलाज करने वाले डॉक्टरों और नर्सों का धन्यवाद अदा करते हुए कहा, इन्होंने मेरा ख्याल रखा। सोशल मीडिया पर माई की तारीफ की जा रही है। साेशल मीडिया यूजर ने लिखा, माई उम्मीद की किरण हैं।